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टिकट के दावेदारों के नामों पर मंथन शुरू
Updated Sun, 15 Oct 2017 11:38 PM IST
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मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। नगर निकाय के चुनाव की अधिसूचना दीपावली बाद जारी होने की संभावना को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक पार्टियों की बैठकों में आए पार्टी पर्यवेक्षकों के सामने चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर दी है।
पिछले चुनाव में नगरपालिका परिषद मुहम्मदाबाद का चेयरमैन का पद अनारक्षित था और कौमी एकता दल के एजाजुल हक अंसारी सपा के रईस अहमद एवं भाजपा के तेजबहादुर यादव को पराजित कर चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। इस बार के चुनाव में चेयरमैन का पद पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित है। इसके चलते चुनाव के लिए काफी दिनों से तैयारी कर रहे सामान्य जाति के वर्तमान चेयरमैन सहित कई दावेदार चुनाव लड़ने से वंचित हो गए हैं। आगामी चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इससे इस बार का चुनाव बसपा, भाजपा, सपा एवं कांग्रेस के सिंबल पर लड़ा जाएगा। इसके लिए सभी दलों में टिकट के दावेदारों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। मुहम्मदाबाद में 1971 से लेकर 2012 तक हुए चुनाव में 1995 का चुनाव जिसमें भाजपा की शांति देवी चेयरमैन निर्वाचित हुई थी को छोड दिया जाए तो सभी चुनावों में अंसारी बंधुओं का दबदबा रहा है। अंसारी बंधुओं के बसपा में चले जाने के बाद बसपा में सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार हैं। इसके बाद प्रदेश में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी में भी टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। जबकि सपा और कांग्रेस को प्रत्याशी ढूंढने पड़ रहे हैं। राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के बाद ही चुनावी सरगर्मी दिखनी शुरू हो सकेगी।
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पिछले चुनाव में नगरपालिका परिषद मुहम्मदाबाद का चेयरमैन का पद अनारक्षित था और कौमी एकता दल के एजाजुल हक अंसारी सपा के रईस अहमद एवं भाजपा के तेजबहादुर यादव को पराजित कर चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। इस बार के चुनाव में चेयरमैन का पद पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित है। इसके चलते चुनाव के लिए काफी दिनों से तैयारी कर रहे सामान्य जाति के वर्तमान चेयरमैन सहित कई दावेदार चुनाव लड़ने से वंचित हो गए हैं। आगामी चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इससे इस बार का चुनाव बसपा, भाजपा, सपा एवं कांग्रेस के सिंबल पर लड़ा जाएगा। इसके लिए सभी दलों में टिकट के दावेदारों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। मुहम्मदाबाद में 1971 से लेकर 2012 तक हुए चुनाव में 1995 का चुनाव जिसमें भाजपा की शांति देवी चेयरमैन निर्वाचित हुई थी को छोड दिया जाए तो सभी चुनावों में अंसारी बंधुओं का दबदबा रहा है। अंसारी बंधुओं के बसपा में चले जाने के बाद बसपा में सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार हैं। इसके बाद प्रदेश में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी में भी टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। जबकि सपा और कांग्रेस को प्रत्याशी ढूंढने पड़ रहे हैं। राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के बाद ही चुनावी सरगर्मी दिखनी शुरू हो सकेगी।
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