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हत्या में दस वर्ष का कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 15 Nov 2016 12:31 AM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अजय पाल सिंह की अदालत ने नौ वर्ष पूर्व मरदह थाना क्षेत्र में हुए हत्या के एक मामले में सोमवार को एक अभियुक्त को दस वर्ष के सश्रम कारावास और सात हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
जानकारी के मुताबिक मरदह थाना क्षेत्र के दुरखुशी गांव निवासी बसंती देवी पत्नी हरिश्चंद्र गोड़ ने थाने में मौखिक सूचना दी कि दलित बस्ती में आरकेस्ट्रा देखने को लेकर उनके पति का वादी के लड़के राजेश एवं संतोष पुत्र रमाकांत से झगड़ा हो गया। मना करने पर रमाकांत एवं उनका लड़का संतोष एकाएक गाली देते हुए हरिश्चंद्र और उनकी पुत्री कुुसुम को लाठी-डंडे से मारने लगे। शोर सुन लोग एकत्र हो गए। थाना में एनसीआर दर्ज हुआ। इलाज के दौरान घायल हरिश्चंद्र की मौत हो गई थी। 14 दिसंबर 2007 को अभियुक्तों के खिलाफ धारा 304 की बढ़ोत्तरी की गई। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। संतोष के नाबालिग होने के कारण उसके विरुद्ध आरोप पत्र किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की सहायक शासकीय अधिवक्ता जयशंकर सिंह ने कुशवाहा ने नौ गवाह पेश किए। अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त रमाकांत गोड़ को धारा 304, 323, 504 भादवि के अंतर्गत दोषी पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और सात हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई।
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जानकारी के मुताबिक मरदह थाना क्षेत्र के दुरखुशी गांव निवासी बसंती देवी पत्नी हरिश्चंद्र गोड़ ने थाने में मौखिक सूचना दी कि दलित बस्ती में आरकेस्ट्रा देखने को लेकर उनके पति का वादी के लड़के राजेश एवं संतोष पुत्र रमाकांत से झगड़ा हो गया। मना करने पर रमाकांत एवं उनका लड़का संतोष एकाएक गाली देते हुए हरिश्चंद्र और उनकी पुत्री कुुसुम को लाठी-डंडे से मारने लगे। शोर सुन लोग एकत्र हो गए। थाना में एनसीआर दर्ज हुआ। इलाज के दौरान घायल हरिश्चंद्र की मौत हो गई थी। 14 दिसंबर 2007 को अभियुक्तों के खिलाफ धारा 304 की बढ़ोत्तरी की गई। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। संतोष के नाबालिग होने के कारण उसके विरुद्ध आरोप पत्र किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की सहायक शासकीय अधिवक्ता जयशंकर सिंह ने कुशवाहा ने नौ गवाह पेश किए। अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त रमाकांत गोड़ को धारा 304, 323, 504 भादवि के अंतर्गत दोषी पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और सात हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई।
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