डीजल नहीं तो ऑपरेशन नहीं

Ghaziabad Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
जनरेटर चलाने को डीजल नहीं, महिला हास्पिटल में रोके गए डिलीवरी ऑपरेशन
विज्ञापन

गाजियाबाद। 35 लाख की आबादी पर एक महिला अस्पताल और उसका भी ऐसा हाल। सरकार की बेरुखी से एमएमजी महिला अस्पताल पर ऐसा संकट छाया है कि प्रसव को आने वाली महिलाओं के ऑपरेशन ही रुक गए हैं। बिजली तो आ नहीं रही, अस्पताल के पास जेनरेटर चलाने को पैसा नहीं है। पंप मालिक ने और डीजल उधार देने से मना कर दिया है और अस्पताल का बजट लखनऊ में अटका है। सीएमएस ने साफ कह दिया है कि अंधेरे में ऑपरेशन का रिस्क नहीं ले सकते। इसलिए, डीजल नहीं तो ऑपरेशन नहीं।
राजकीय महिला चिकित्सालय पर शुक्रवार को पूरे दिन अंधेरा छाया रहा। अघोषित बिजली कटौती से अस्पताल में भर्ती मरीज परेशान रहे। बहुत मुश्किल में दिखे। जनरेटर जवाब दे गया और अस्पताल स्टाफ के पास जेनरेटर चलाने को डीजल नहीं था। नतीजा, हेल्थ स्टाफ से लेकर जच्चा-बच्चा मरीजों तक सब नरक भोगते नजर आए। उन्हें इस मुसीबत से आगे भी जल्दी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दरअसल, जिस बजट से अस्पताल में डीजल आदि का इंतजाम होता है, वो इस बार लखनऊ में ही अटक गया है। पिछले एक महीने से जेनरेटर उधार के डीजल से चल रहा था मगर पैमेंट नहीं होता देख पंप मालिक ने और डीजल देने से इंकार कर दिया। इससे अस्पताल में जरूरी सेवाएं ठप सी हो गई।
ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, लैब सब प्रभावित रहे। इससे सैकड़ों मरीजों को वापस लौटना पड़ा। अस्पताल में भर्ती मरीज सुमन ने बताया कि रात को डिलीवरी हुई। तबियत काफी खराब है और बिजली न आने से गर्मी में बच्चा परेशान हो रहा है। बीमारी में हाथ का पंखा चला रहे हैं। बेटी केसाथ अस्पताल में भर्ती कैला भटटा की मरीज शबनम बताया कि सुबह से कई बार लाइट गई है मगर जनरेटर नहीं चलाया जा रहा। भारी गर्मी से मरीज बेहाल हैं। यह रोज की ही कहानी है।

सभी अस्पतालों का हाल एक जैसा
एमएमजी जिला अस्पताल और संयुक्त जिला अस्पताल भी ऐसे ही संकट का सामना कर रहे हैं। महिला अस्पताल पर डीजल का 65 हजार रुपये बकाया हैं तो संयुक्त जिला अस्पताल पर यह कर्जा तीन लाख से भी ऊपर बताया जाता है। अफसरों केबहुत कहने पर पंप मालिक ने संयुक्त जिला अस्पताल को उधार में डीजल देना जारी रखा है मगर कब यहां भी व्यवस्था चौपट हो जाए, कहा नहीं जा सकता। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस अतर सिंह यादव ने बताया कि डीजल का बजट एनआरएचम के तहत आता है। पहले भरपूर बजट मिल जाता था मगर इस बार काफी देर हो रही है।

हम क्या करें
हर बार मांग के 10-15 दिन में शासन से बजट मिल जाता था मगर इस बार कई महीने हो गए हैं। पत्र लिख रहे हैं। अस्पताल के बाबू को भी लखनऊ भेजा मगर नतीजा जीरो। डीजल है नहीं। बिजली का भरोसा बिल्कुल नहीं। गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन इन्वर्टर के सहारे नहीं कर सकते। जब तक डीजल का बजट नहीं आता, अस्पताल में आपरेशन का रिस्क नहीं ले सकते। - कल्पना गुप्ता, सीएमएस महिला अस्पताल
बिल को भेजा नोटिस
जनरेटर ठप होने से अस्पताल को बिजली का ही सहारा है। दरअसल, डेढ़ लाख से अधिक का बिल बकाया होने से अस्पताल की बिजली कभी भी कट सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us