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छात्रा के इलाज के लिए शिक्षकों ने किया चंदा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 May 2018 01:16 AM IST
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आरुषी की मां को धनराशि सौंपते शिक्षक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
भीतरगांव के छतेरुआ गांव स्थित परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा 4 की मेधावी छात्रा आरुषि के इलाज के लिए शिक्षकों ने 25 हजार रुपये का चंदा करके उसके माता-पिता को दिया है। आरुषी के मस्तिष्क में गांठ होने के चलते उसे असहनीय दर्द होता है।
इधर, आरुषि अपनी कक्षा में मेधावी है। बीते दिनों जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई शिक्षा गृह परीक्षा में उसको विकास खंड स्तर पर द्वितीय स्थान मिला है। गत दिनों वह बीआरसी में आयोजित समारोह में पुरस्कार लेने गई थी। तभी स्कूल की प्रधानाध्यापक शिखा शुक्ला ने अन्य शिक्षकों को आरुषी की बीमारी और माता-पिता की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। छात्रा की बीमारी की बात सुनकर शिक्षकों ने उसकी मदद करने की ठानी। जिसकी अगुवाई परिषदीय विद्यालय सचौली के प्रधानाध्यापक अजय कुमार तिवारी ने की। बताया कि शिक्षकों ने एक ही दिन में 25 हजार रुपये एकत्र कर लिए।
इधर, आरुषी को इलाज के लिए किदवईनगर (कानपुर) के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां डाक्टर उसके मर्ज की जांच कर रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक पहले मस्तिष्क की गांठ को दवा के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया जाएगा। यदि, इसमें सफलता नहीं मिली तो फिर आपरेशन किया जाएगा। शिक्षकों ने बताया कि अगर आरुषी के इलाज में और खर्च आएगा तो वह लोग चंदा करके फिर मदद करेंगे। शिक्षकों के इस कार्य की लोगों ने सराहना की है।
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इधर, आरुषि अपनी कक्षा में मेधावी है। बीते दिनों जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई शिक्षा गृह परीक्षा में उसको विकास खंड स्तर पर द्वितीय स्थान मिला है। गत दिनों वह बीआरसी में आयोजित समारोह में पुरस्कार लेने गई थी। तभी स्कूल की प्रधानाध्यापक शिखा शुक्ला ने अन्य शिक्षकों को आरुषी की बीमारी और माता-पिता की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। छात्रा की बीमारी की बात सुनकर शिक्षकों ने उसकी मदद करने की ठानी। जिसकी अगुवाई परिषदीय विद्यालय सचौली के प्रधानाध्यापक अजय कुमार तिवारी ने की। बताया कि शिक्षकों ने एक ही दिन में 25 हजार रुपये एकत्र कर लिए।
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इधर, आरुषी को इलाज के लिए किदवईनगर (कानपुर) के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां डाक्टर उसके मर्ज की जांच कर रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक पहले मस्तिष्क की गांठ को दवा के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया जाएगा। यदि, इसमें सफलता नहीं मिली तो फिर आपरेशन किया जाएगा। शिक्षकों ने बताया कि अगर आरुषी के इलाज में और खर्च आएगा तो वह लोग चंदा करके फिर मदद करेंगे। शिक्षकों के इस कार्य की लोगों ने सराहना की है।
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