{"_id":"5762fe8e4f1c1b481e11c7e3","slug":"sengur-river","type":"story","status":"publish","title_hn":"झमाझम बारिश हुई तो कहर बरपाएगी सेंगुर नदी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झमाझम बारिश हुई तो कहर बरपाएगी सेंगुर नदी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन
मूसानगर हलिया घाट पर यमुना नदी में गिरने वाली सेंगुर नदी बारिश में लगभग हर साल उफनाती है। करीब दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। लोगों का आवागमन छोटी नावों के सहारे ही होता है। वहीं सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो जाते हैं। जिससे खरीफ की फसलें नहीं हो पाती हैं और चारे का संकट भी गहरा जाता है।
यमुना नदी में पानी का दबाव बढ़ने से सेंगुर नदी उफनाती है। मुसरिया गांव की पुलिया और मूसानगर से जुड़े यमुना संपर्क मार्ग की पुलिया नीची होने के कारण पानी खेतों में भरकर गांवों को घेर लेता है। मौसम विभाग ने इस साल अच्छे मानसून की उम्मीद जताई है। ऐसे में समय रहते बचाव और राहत के पुख्ता बंदोवस्त न किये गए तो हालात बदतर हो सकते हैं।
मालूम हो कि मालूम हो कि जुलाई 2013 के आखिरी हफ्ते में सेंगुर नदी का पानी बढ़ने से चपरघटा का पुराना पुल डूब गया था। मुसरिया गांव की पुलिया और मूसानगर से जुड़े यमुना संपर्क मार्ग की पुलिया के ऊपर से पानी बहने के कारण चपरघटा, आढ़न, पथार, रसूलपुर, पड़ाव, भरतौली, कुंभापुर, चतुरीपुर्वा, लबरसी, क्योंटरा-बांगर, हलिया, सरौटा, नगीना-बांगर, बम्हरौली-घाट, अहरौली-घाट, सिमरिया, हंसपुर, कलुवाताला, मउदन, कट्टापुर्वा गांव करीब एक पखवारे तक पानी से घिरे रहे। स्थानीय स्तर पर आवागमन के लिए छोटी नावों का बंदोबस्त कराया गया था।
विज्ञापन
2014 में सूखे के कारण हालात ज्यादा नहीं बिगड़े। वहीं गत वर्ष जुलाई के आखिरी हफ्ते में ही सेंगुर नदी के उफनाने से 16 गांव पानी से घिर गए थे। पथार के फैलू बाबा, नगीनाबांगर के मनीराम, मुसरिया के अमर सिंह, बलवीर का कहना है कि समय रहते पुलियां ऊंची न कराई गईं और मौसम विभाग के अनुसार बारिश अच्छी हुई तो हालात बदतर हो सकते हैं।
विज्ञापन
यमुना नदी में पानी का दबाव बढ़ने से सेंगुर नदी उफनाती है। मुसरिया गांव की पुलिया और मूसानगर से जुड़े यमुना संपर्क मार्ग की पुलिया नीची होने के कारण पानी खेतों में भरकर गांवों को घेर लेता है। मौसम विभाग ने इस साल अच्छे मानसून की उम्मीद जताई है। ऐसे में समय रहते बचाव और राहत के पुख्ता बंदोवस्त न किये गए तो हालात बदतर हो सकते हैं।
विज्ञापन
मालूम हो कि मालूम हो कि जुलाई 2013 के आखिरी हफ्ते में सेंगुर नदी का पानी बढ़ने से चपरघटा का पुराना पुल डूब गया था। मुसरिया गांव की पुलिया और मूसानगर से जुड़े यमुना संपर्क मार्ग की पुलिया के ऊपर से पानी बहने के कारण चपरघटा, आढ़न, पथार, रसूलपुर, पड़ाव, भरतौली, कुंभापुर, चतुरीपुर्वा, लबरसी, क्योंटरा-बांगर, हलिया, सरौटा, नगीना-बांगर, बम्हरौली-घाट, अहरौली-घाट, सिमरिया, हंसपुर, कलुवाताला, मउदन, कट्टापुर्वा गांव करीब एक पखवारे तक पानी से घिरे रहे। स्थानीय स्तर पर आवागमन के लिए छोटी नावों का बंदोबस्त कराया गया था।
विज्ञापन
2014 में सूखे के कारण हालात ज्यादा नहीं बिगड़े। वहीं गत वर्ष जुलाई के आखिरी हफ्ते में ही सेंगुर नदी के उफनाने से 16 गांव पानी से घिर गए थे। पथार के फैलू बाबा, नगीनाबांगर के मनीराम, मुसरिया के अमर सिंह, बलवीर का कहना है कि समय रहते पुलियां ऊंची न कराई गईं और मौसम विभाग के अनुसार बारिश अच्छी हुई तो हालात बदतर हो सकते हैं।