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कृषि में बूंद-बूंद पानी की उपयोगिता पर किया शोध

Thu, 21 Dec 2017 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 21 Dec 2017 01:30 AM IST
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Research on the usefulness of drop-down water in agriculture
समारोह में बैठे प्रो. नारायण। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
साधारण परिवार में जन्मे तेजपुर गांव निवासी प्रोफेसर डा.कमलेश नरायण तिवारी गांव की माटी में पले-बढ़े और प्राथमिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। कृषि क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी की उपयोगिता पर की गई खोज के लिए प्रधानमंत्री ने उनको पुरस्कृत भी किया है। वहीं, तहसील क्षेत्र के तेजपुर गांव में आईआईटी खड़गपुर (पश्चिम बंगाल) के प्रोफेसर डा.कमलेश नरायण तिवारी ने प्रतिवर्ष की भांति इसबार भी तीन मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि तहसीलदार (घाटमपुर) अवनीश कुमार ने मेधावियों को छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने बताया कि पांचवीं कक्षा तक गांव के प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूल की शिक्षा पड़ोसी गांव तिलसड़ा के परिषदीय विद्यालय में ग्रहण करने के बाद हाईस्कूल की पढ़ाई कानपुर में करने के बाद भोपाल (मध्य प्रदेश) चले गए। उन्होंने बीटेक जबलपुर (मध्य प्रदेश) से जबकि, एमटेक और पीएचडी की पढ़ाई दिल्ली से की। कृषि क्षेत्र में पानी की उपयोगिता पर पीएचडी करने के उपरांत ही उनको आईआईटी में प्रोफेसर के पद नियुक्ति मिल गई।
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.. कैसे करें सिंचाई
आईआईटी खड़गपुर (पश्चिम बंगाल) में कृषि विभाग के प्रोफेसर डा.कमलेश नरायण तिवारी ने बताया कि बूंद-बूंद पानी से फसलों की सिंचाई कैसे करें। उनका यह शोध देश ही नहीं बल्कि, विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हुआ है। बताया कि इस खोज के लिए वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना (बिहार) में उनको अवार्ड देकर सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि बूंद-बूंद पानी से फसल की सिंचाई करने की विधि में छोटे-छोटे छेदों वाले पाइप को खेतों की उपजाऊ मिट्टी की परत के बिछा दिया जाता है। जिसके जरिए से बूंद-बूंद पानी रिसकर सीधा पौधों की जड़ों में पहुंचता है। बताया कि इस विधि से फसल के पौधे सिर्फ उतना ही पानी खींचते हैं जितनी उनको जरूरत होती है।बताया कि विधि सिंचाई संसाधनों के अभाव वाले इलाकों में काफी कारगर और लोकप्रिय साबित हुई है। जबकि नहरों और नलकूपों के जरिए फसल में सीधे पानी भरने से जहां पानी की बर्बादी होती है। वहीं, पौधों को मिलने वाली उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो जाती है।
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कम पानी में अधिक पैदावार पर होगी चर्चा
प्रो. कमलेश नरायण तिवारी ने बताया कि जल्द ही उनकी अपने गांव में कृषि सेमिनार और कृषक प्रशिक्षण का आयोजन कराने की योजना है। बताया कि सेमिनार और प्रशिक्षण में देश के कई शीर्ष कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही विदेशों से भी कुछ विशेषज्ञों को बुलवाना चाहते हैं। कहा कि प्रशिक्षण में किसानों को कम पानी में फसलों का अधिक पैदावार और ग्लोबल वार्मिंग के असर को कैसे कम करें, इस पर चर्चा कराएंगे।
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