गांव मेें जाकर देखी स्वच्छता अभियान की हकीकत

टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 08 Nov 2017 12:58 AM IST
Reality of the Sanitation campaign seen in the village
जांच करती टीम - फोटो : अमर उजाला
विश्वबैंक की टीम मंगलवार को मलासा ब्लाक के दो गांवों में जाकर वहां शौचालयों निर्माण की हकीकत देखी। इसके पहले सोमवार को टीम ने मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया था।
स्वच्छता अभियान के जिले को खुले में शौचमुक्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जिसकी हकीकत देखने विश्व बैंक की टीम की सदस्य परोमिता यूकील व प्रशंसा दीक्षित ने मकरंदापुर व हारामऊ ग्राम पंचायत का निरीक्षण किया। टीम ने गांव में बनाए गए शौचालयों को देखा। ग्रामीणों से शौचालयों निर्माण में मिलने वाली अनुदान राशि के बारे में जानकारी ली।

टीम ने यह भी हकीकत देखी कि यहां ग्रामीण अपनी मर्जी से शौचालय निर्माण करवा रहे हैं या फिर ठेके में देकर शौचालय बनवाए जा रहे हैं। मकरंदापुर व अंतापुर में ग्रामीणों ने टीम को बताया कि वह खुद सरकार के मानक अनुसार शौचालय का निर्माण करवा रहे हैं, इसके बाद सरकार की ओर से मिलने वाली 12 हजार रुपये की अनुदान राशि उन्हें दी जाती है। टीम के सदस्य शौचालयों निर्माण के गुणवत्ता की हकीकत देखी। टीम ने यह भी देखा कि इस अभियान में जिले में कुल कितने लोग काम कर रहे है, उनकी भूमिका

क्या है। स्वच्छाग्रही का इस अभियान में योगदान कितना है। टीम स्वच्छता अभियान से जुड़े हर गतिविधि की बारीकी से जानकारी जुटा रही है। डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि टीम के सदस्यों ने जिले में स्वच्छता अभियान के तहत हो रहे काम की सराहना की है।

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