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पुलिस का ‘खेल’ हो गया ‘फेल’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:17 AM IST
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घाटमपुर कोतवाली पुलिस के लिए प्राचीन मंदिर से चोरी हुई राधा की अष्टधातु की मूर्ति और साढ़ क्षेत्र में लूटी गई गार्ड की बंदूक बरामद करना गले की फांस बन गया है।
आम तौर पर छुटभैयों को जेल भेजकर वाहवाही लूटने वाली पुलिस राधा जी की अष्टधातु की मूर्ति चोरी और गार्ड के बंदूर बरामदी के मामले में फेल होती नजर आ रही है। एसओ एके सिंह ने बताया कि घटनाओं के खुलासे के लिए पुलिस टीमें सक्रिय हैं।
तीन दिन पहले (13 जनवरी) की रात चोरों ने स्योंढ़ारी गांव के एक सदी प्राचीन मंदिर से राधा जी की अष्टधातु से निर्मित कीमती मूर्ति की चोरी कर ली है।
जबकि, इस घटना के दी दिन बाद (15 जनवरी) की सरेशाम बदमाश साढ़ इलाके के दरगाहीलाल नहर पुल के निकट एक गार्ड की दोनाली बंदूक लूट ले गए। एक ओर जहां चोरी और लूट की घटनाएं खोलने के नाम पर पुलिस खेल करती है, जिसमें लूटे गए सामान जेवर अथवा नगदी की बरामदगी दिखाकर छुटभैयों को जेल पहुंचाकर अपने हाथ खुद की पीठ ठोंककर खुश होती है।
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वहीं, बंदूक लूट और राधा की मूर्ति चोरी के मामले में पुलिस ऐसा कुछ कर पाने में खुद को असहाय पा रही है।
स्योंढ़ारी गांव के प्राचीन मंदिर में हुई चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले अरुणेंद्र सचान ने बताया कि पहले तो पुलिस ने दबाव डाला कि वह लिखकर दें कि चोरी गई मूर्ति पीतल से निर्मित थी।
लेकिन, जब यह बताया गया कि मंदिर में स्थापित राधा की नहीं बल्कि, पांच अन्य मूर्तियां भी अष्टधातु से ही निर्मित हैं तो पुलिस ने मजबूरी में उनकी रिपोर्ट में चोरी गई मूर्ति के अष्टधातु से निर्मित होने की बात लिखी।
इधर, 15 जनवरी की शाम साढ़ कसबे के पास हुई एक कंपनी के सुरक्षा गार्ड पंकज यादव की लाइसेंसी दोनाली बंदूक की लूट के मामले में भी पुलिस उसकी बरामदगी किए बिना केस को झूठा नहीं खोल सकती है।
जानकारों ने बताया कि लाइसेंसी बंदूक का नंबर बिना बरामदगी हुए पुलिस कहां से ला पाएगी।
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आम तौर पर छुटभैयों को जेल भेजकर वाहवाही लूटने वाली पुलिस राधा जी की अष्टधातु की मूर्ति चोरी और गार्ड के बंदूर बरामदी के मामले में फेल होती नजर आ रही है। एसओ एके सिंह ने बताया कि घटनाओं के खुलासे के लिए पुलिस टीमें सक्रिय हैं।
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तीन दिन पहले (13 जनवरी) की रात चोरों ने स्योंढ़ारी गांव के एक सदी प्राचीन मंदिर से राधा जी की अष्टधातु से निर्मित कीमती मूर्ति की चोरी कर ली है।
जबकि, इस घटना के दी दिन बाद (15 जनवरी) की सरेशाम बदमाश साढ़ इलाके के दरगाहीलाल नहर पुल के निकट एक गार्ड की दोनाली बंदूक लूट ले गए। एक ओर जहां चोरी और लूट की घटनाएं खोलने के नाम पर पुलिस खेल करती है, जिसमें लूटे गए सामान जेवर अथवा नगदी की बरामदगी दिखाकर छुटभैयों को जेल पहुंचाकर अपने हाथ खुद की पीठ ठोंककर खुश होती है।
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वहीं, बंदूक लूट और राधा की मूर्ति चोरी के मामले में पुलिस ऐसा कुछ कर पाने में खुद को असहाय पा रही है।
स्योंढ़ारी गांव के प्राचीन मंदिर में हुई चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले अरुणेंद्र सचान ने बताया कि पहले तो पुलिस ने दबाव डाला कि वह लिखकर दें कि चोरी गई मूर्ति पीतल से निर्मित थी।
लेकिन, जब यह बताया गया कि मंदिर में स्थापित राधा की नहीं बल्कि, पांच अन्य मूर्तियां भी अष्टधातु से ही निर्मित हैं तो पुलिस ने मजबूरी में उनकी रिपोर्ट में चोरी गई मूर्ति के अष्टधातु से निर्मित होने की बात लिखी।
इधर, 15 जनवरी की शाम साढ़ कसबे के पास हुई एक कंपनी के सुरक्षा गार्ड पंकज यादव की लाइसेंसी दोनाली बंदूक की लूट के मामले में भी पुलिस उसकी बरामदगी किए बिना केस को झूठा नहीं खोल सकती है।
जानकारों ने बताया कि लाइसेंसी बंदूक का नंबर बिना बरामदगी हुए पुलिस कहां से ला पाएगी।