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पातालेश्वर महादेव के नाम पर बसा पतरसा गांव
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jul 2016 12:55 AM IST
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पतरसा गांव में बना पातालेश्वर महादेव मंदिर
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तहसील क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में पतरसा गांव के पातालेश्वर महादेव की दूर-दूर तक मान्यता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग में अर्द्धनारीश्वर के रूप में शिव के दर्शन होते हैं।
किवदंती है कि मंदिर का निर्माण घुमंतू जाति के बंजारों ने एक ही रात में करवाया था। वहीं पतरसा का गांव का नामकरण भी शिव के नाम पर ही किया गया।
गांव के लोग बताते हैं कि शिवलिंग पाताल फोड़कर निकला था। जिस जगह पर मंदिर बना है वहां सिर्फ मिट्टी का एक टीला भर था। शिवलिंग को खोदकर ले जाने के लिए चोरों ने काफी प्रयास किया लेकिन, उसकी गहराई की थाह नहीं लगा पाए। किवदंती है कि शिवलिंग में अर्द्धनारीश्वर स्वरूप के सिर पर बना घाव चोरों की खुदाई के समय फावड़ा लग जाने से हो गया था।
शिवलिंग कितना प्राचीन है इसका प्रमाण नहीं मिलता है। फिर भी पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे तीन से पांच सौ वर्ष प्राचीन बताया है। मंदिर में शिवरात्रि पर्व के अलावा भी प्रमुख त्योहारों और सावन के सोमवारों में बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
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किवदंती है कि मंदिर का निर्माण घुमंतू जाति के बंजारों ने एक ही रात में करवाया था। वहीं पतरसा का गांव का नामकरण भी शिव के नाम पर ही किया गया।
गांव के लोग बताते हैं कि शिवलिंग पाताल फोड़कर निकला था। जिस जगह पर मंदिर बना है वहां सिर्फ मिट्टी का एक टीला भर था। शिवलिंग को खोदकर ले जाने के लिए चोरों ने काफी प्रयास किया लेकिन, उसकी गहराई की थाह नहीं लगा पाए। किवदंती है कि शिवलिंग में अर्द्धनारीश्वर स्वरूप के सिर पर बना घाव चोरों की खुदाई के समय फावड़ा लग जाने से हो गया था।
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शिवलिंग कितना प्राचीन है इसका प्रमाण नहीं मिलता है। फिर भी पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे तीन से पांच सौ वर्ष प्राचीन बताया है। मंदिर में शिवरात्रि पर्व के अलावा भी प्रमुख त्योहारों और सावन के सोमवारों में बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
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