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रक्तदान कर हड़ताली लेखपालों ने जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Sep 2016 03:02 AM IST
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कलेक्ट्रेट में रक्तदान करते लेखपाल।
- फोटो : अमर उजाला
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उ.प्र. लेखपाल संघ की हड़ताल गुरुवार को जारी रही। कलक्ट्रेट में सुबह 10 से 4 बजे तक लेखपालों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। दोपहर बाद 52 लेखपालों ने रक्तदान कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि सरकार उनकी मांग मान वरना उनका आंदोलन निरंतर चलता रहेगा।
जिलाध्यक्ष विकास सचान, महामंत्री बृजेश दीक्षित के नेतृत्व में तहसील सिकंदरा अध्यक्ष लालाराम, अकबरपुर अध्यक्ष सुधीर द्विवेदी, भोगनीपुर अध्यक्ष अश्वनी, डेरापुर अध्यक्ष सूर्यपाल, रसूलाबाद तहसील मंत्री रवींद्र शुक्ल, डेरापुर तहसील मंत्री विनोद गौतम समेत एक सैकड़ा से अधिक लेखपाल कलेक्ट्रेट में धरनास्थल पर पहुंचे। आरोप लगाया कि सरकार लेखपालों का उत्पीड़न कर रही है।
दोपहर बाद जिला चिकित्सालय से टीम के पहुंचने के बाद रक्तदान शिविर लगाया गया। इसमें जिलाध्यक्ष के साथ सियाराम दुबे, राममिलन, सुजीत, रवींद्र शुक्ला, अंकित गौतम, संत कुमार पटेल, अजीत कुमार, मिलन दुबे समेत 52 लेखपालों ने रक्तदान किया।
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तमाम लेखपालों के गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के कारण उनका रक्त नहीं लिया गया। स्वयं सेवी संस्था ब्रह्मासिंह शिक्षा एवं सेवा समिति के अखिलेंद्र प्रताप सिंह, मुकेश रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रम को दूर किया।
पहली बार विरोध जताने के लिए हुआ रक्तदान- कानपुर देहात। लेखपालों ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए रक्तदान करके नई परंपरा को जन्म दिया है। आम तौर पर विभिन्न संगठन विरोध जाहिर करने के लिए धरना, प्रदर्शन, जाम व तोड़फोड़, घेराव आदि प्रचलित तरीकों को अपनाते हैं, लेकिन जिले में पहली बार विरोध को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए रक्तदान करने का तरीका अपनाया गया है।
तहसील व कलक्ट्रेट में रक्दान की सराहना की। लोगों ने कहा कि यह ऐसा तरीका है जिससे तमाम जरूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी। दान का रक्त कई लोगों की जान बचाने के काम आएगा।
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जिलाध्यक्ष विकास सचान, महामंत्री बृजेश दीक्षित के नेतृत्व में तहसील सिकंदरा अध्यक्ष लालाराम, अकबरपुर अध्यक्ष सुधीर द्विवेदी, भोगनीपुर अध्यक्ष अश्वनी, डेरापुर अध्यक्ष सूर्यपाल, रसूलाबाद तहसील मंत्री रवींद्र शुक्ल, डेरापुर तहसील मंत्री विनोद गौतम समेत एक सैकड़ा से अधिक लेखपाल कलेक्ट्रेट में धरनास्थल पर पहुंचे। आरोप लगाया कि सरकार लेखपालों का उत्पीड़न कर रही है।
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दोपहर बाद जिला चिकित्सालय से टीम के पहुंचने के बाद रक्तदान शिविर लगाया गया। इसमें जिलाध्यक्ष के साथ सियाराम दुबे, राममिलन, सुजीत, रवींद्र शुक्ला, अंकित गौतम, संत कुमार पटेल, अजीत कुमार, मिलन दुबे समेत 52 लेखपालों ने रक्तदान किया।
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तमाम लेखपालों के गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के कारण उनका रक्त नहीं लिया गया। स्वयं सेवी संस्था ब्रह्मासिंह शिक्षा एवं सेवा समिति के अखिलेंद्र प्रताप सिंह, मुकेश रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रम को दूर किया।
पहली बार विरोध जताने के लिए हुआ रक्तदान- कानपुर देहात। लेखपालों ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए रक्तदान करके नई परंपरा को जन्म दिया है। आम तौर पर विभिन्न संगठन विरोध जाहिर करने के लिए धरना, प्रदर्शन, जाम व तोड़फोड़, घेराव आदि प्रचलित तरीकों को अपनाते हैं, लेकिन जिले में पहली बार विरोध को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए रक्तदान करने का तरीका अपनाया गया है।
तहसील व कलक्ट्रेट में रक्दान की सराहना की। लोगों ने कहा कि यह ऐसा तरीका है जिससे तमाम जरूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी। दान का रक्त कई लोगों की जान बचाने के काम आएगा।