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नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की....
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2016 02:01 AM IST
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भागवत कथा सुनाते भागवताचार्य सतेंद्र शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
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यूपीएसआईडीसी आवासीय परिसर जैनपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भागवताचार्य ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुना कर आनंदित किया। जय मां वैष्णो शृंगार समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हुए भागवताचार्य पंडित सतेंद्र शुक्ला ने कहा कि जब जब इस धरती अत्याचार बढ़ता है तब तब भगवान इस पृथ्वी पर उसका अंत करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
द्वापर युग में कं स के अत्याचार से जनता त्राहि त्राहि कर रही थी। कंस अपने प्रतापी पिता मथुरा नरेश उग्रसेन को गद्दी से उतार कर स्वयं ही राज सिंहासन पर बैठ गया था। कं स से छोटी एक बहन थी, जिसका नाम देवकी था। कं स उससे बहुत प्यार करता था। कंस अपनी बहन देवकी का विवाह अपने मित्र वसुदेव के साथ किया। विवाह के बाद जब वह बहन बहनोई को विदा करने जा रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस जिस बहन को तू इतने प्यार से विदा करने जा रहा है उसी की आठवीं संतान के द्वारा तुम्हारा वध होगा।
आकाशवाणी सुनते ही कंस ने देवकी व वसुदेव को बंदी बना कर उनकी हत्या करना चाहा लेकिन देवकी के यह कहने पर कि वह जन्म के बाद प्रत्येक संतान उसे सौंपती जाएगी। चाहे तो वह उसकी हत्या कर सकता है। देवकी की बात से सहमत होकर कंस ने उन दोनाें को कारागार में डलवा दिया। कारागार में देवकी पैदा होने वाली सभी संतानों को कंस को साैंपती जाती कंस उनकी हत्या करता जाता। अंत में भगवान कृष्ण के हाथों कंस का वध हुआ।
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द्वापर युग में कं स के अत्याचार से जनता त्राहि त्राहि कर रही थी। कंस अपने प्रतापी पिता मथुरा नरेश उग्रसेन को गद्दी से उतार कर स्वयं ही राज सिंहासन पर बैठ गया था। कं स से छोटी एक बहन थी, जिसका नाम देवकी था। कं स उससे बहुत प्यार करता था। कंस अपनी बहन देवकी का विवाह अपने मित्र वसुदेव के साथ किया। विवाह के बाद जब वह बहन बहनोई को विदा करने जा रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस जिस बहन को तू इतने प्यार से विदा करने जा रहा है उसी की आठवीं संतान के द्वारा तुम्हारा वध होगा।
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आकाशवाणी सुनते ही कंस ने देवकी व वसुदेव को बंदी बना कर उनकी हत्या करना चाहा लेकिन देवकी के यह कहने पर कि वह जन्म के बाद प्रत्येक संतान उसे सौंपती जाएगी। चाहे तो वह उसकी हत्या कर सकता है। देवकी की बात से सहमत होकर कंस ने उन दोनाें को कारागार में डलवा दिया। कारागार में देवकी पैदा होने वाली सभी संतानों को कंस को साैंपती जाती कंस उनकी हत्या करता जाता। अंत में भगवान कृष्ण के हाथों कंस का वध हुआ।
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