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खांदी कटने से 300 बीघा फसलें डूबीं
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर देहात
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:48 AM IST
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फसलों में भरा पानी।
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शनिवार को मंसुरा गांव के पास घाटमपुर रजबहे से कटी खांदी दूसरे दिन भी नहीं बांधी जा सकी। इससे पांच गांवों सहित करीब 300 बीघा धान, आलू, लाही सहित अन्य फसलें पानी से लबालब डूबी रही। किसानों को अब धान की पकी फसल बर्बाद होने चिंता सता रही है। नहर विभाग के अधिकारी सोमवार को रजबहे का पानी रुकवाकर खांदी बांधेंगे।
बताते चलें कि शनिवार को मंसुरा गांव के समीप घाटमपुर रजबहे की कटी खांदी रविवार को भी बांधने कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। रजबहे का पानी गांवों व खेतों में खड़ी फसलों को अपनी जद में लेता रहा। पूरी रात बहाव के चलते रहीमपुर, उमरन, संतोष का पुरवा, रामदीन का पुरवा, बिलई गांव पानी से लबालब डूब रहे। गांवों की गलियों से लेकर सड़कें पानी से पूरी तरह से जलमग्न रही। इसके चलते लोगों जरूरी कामों के लिए जलमग्न सड़कों से होकर निकलने को मजबूर रहे।
वहीं रविवार को रजबहे की खांदी ने किसानों की करीब 300 बीघा धान, आलू, लाही सहित अन्य फसलों को अपनी चपेट में ले लिया। किसान शनिवार रात खेतों में मेड़बंदी कर पानी फसलों में जाने से रोकने का प्रयास करते रहे। लेकिन कोई सफलता नहीं लगी। इससे किसानों को अब खेतों में पकी व कटी पड़ी धान की फसल बर्बाद होने की आशंका से हड़कंप है। किसान किसी तरह फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पानी का बहाव फसलों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।
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बताते चलें कि शनिवार को मंसुरा गांव के समीप घाटमपुर रजबहे की कटी खांदी रविवार को भी बांधने कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। रजबहे का पानी गांवों व खेतों में खड़ी फसलों को अपनी जद में लेता रहा। पूरी रात बहाव के चलते रहीमपुर, उमरन, संतोष का पुरवा, रामदीन का पुरवा, बिलई गांव पानी से लबालब डूब रहे। गांवों की गलियों से लेकर सड़कें पानी से पूरी तरह से जलमग्न रही। इसके चलते लोगों जरूरी कामों के लिए जलमग्न सड़कों से होकर निकलने को मजबूर रहे।
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वहीं रविवार को रजबहे की खांदी ने किसानों की करीब 300 बीघा धान, आलू, लाही सहित अन्य फसलों को अपनी चपेट में ले लिया। किसान शनिवार रात खेतों में मेड़बंदी कर पानी फसलों में जाने से रोकने का प्रयास करते रहे। लेकिन कोई सफलता नहीं लगी। इससे किसानों को अब खेतों में पकी व कटी पड़ी धान की फसल बर्बाद होने की आशंका से हड़कंप है। किसान किसी तरह फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पानी का बहाव फसलों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।
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