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बेसहारा गायों को मिलेगा सहारा
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kanpur dehat cow
- फोटो : GHATAMPUR
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घाटमपुर/पतारा (कानपुर)। प्रदेश सरकार की पहल पर पशुपालकों ने आश्रयस्थलों में बंद गोवंशों को पालने का मन बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत पतारा के भाट और भदेवना गांवों के आश्रयस्थलों में कैद कुल 71 गोवंशों को चिन्हित किया गया है। जिनको पशुपालकों ने अपने घरों में बांधकर पालन-पोषण करने की इच्छा जताई है। शुक्रवार को पशुपालन विभाग और ब्लाक के अधिकारियों की देखरेख में मवेशियों के वितरण का कार्य शुरू कराया गया।
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि शासन की ओर से पशुपालकों को प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से माह में कुल 900 रुपये चारे के लिए देय है। संबंधित पशुपालक के बैंक खाते में सीधे भेजा जाना है। एक व्यक्ति को अधिकतम चार मवेशी ही दिए जाने हैं। बताया कि योजना के तहत इच्छुक पशुपालकों से पहले फार्म भरवाए जाते हैं। ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी और पशुपालन विभाग के स्थानीय अधिकारी की संस्तुति के बाद फार्म अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजा जाता है। बताया कि वहां से अनुमोदन मिलने के बाद संबंधित किसान को मवेशी सौंपे जाते हैं। बताया कि सौंपे गए मवेशी के कान पर टैग लगाने के साथ उसका विवरण और रिकार्ड दर्ज किया जाता है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ अमित जायसवाल ने बताया कि शुक्रवार को योजना के शुभारंभ में चतुरीपुर गांव निवासी ज्ञानसिंह, योगेश कुमार और गुलाब सिंह कस्बा पतारा निवासी नीतेंद्र कुमार और श्यामजी, तिलसड़ा गांव निवासी विश्वनाथ और सलामतपुर (स्योंढ़ारी) गांव निवासी अमित कुमार को गोवंश सौंपे गए। खंड विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा, हरदीप सिंह पतारा ग्राम प्रधान मधुबाला सिंह के बेटे अजय सिंह, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ ज्ञानेंद्र प्रसाद गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि शासन की ओर से पशुपालकों को प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से माह में कुल 900 रुपये चारे के लिए देय है। संबंधित पशुपालक के बैंक खाते में सीधे भेजा जाना है। एक व्यक्ति को अधिकतम चार मवेशी ही दिए जाने हैं। बताया कि योजना के तहत इच्छुक पशुपालकों से पहले फार्म भरवाए जाते हैं। ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी और पशुपालन विभाग के स्थानीय अधिकारी की संस्तुति के बाद फार्म अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजा जाता है। बताया कि वहां से अनुमोदन मिलने के बाद संबंधित किसान को मवेशी सौंपे जाते हैं। बताया कि सौंपे गए मवेशी के कान पर टैग लगाने के साथ उसका विवरण और रिकार्ड दर्ज किया जाता है।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ अमित जायसवाल ने बताया कि शुक्रवार को योजना के शुभारंभ में चतुरीपुर गांव निवासी ज्ञानसिंह, योगेश कुमार और गुलाब सिंह कस्बा पतारा निवासी नीतेंद्र कुमार और श्यामजी, तिलसड़ा गांव निवासी विश्वनाथ और सलामतपुर (स्योंढ़ारी) गांव निवासी अमित कुमार को गोवंश सौंपे गए। खंड विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा, हरदीप सिंह पतारा ग्राम प्रधान मधुबाला सिंह के बेटे अजय सिंह, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ ज्ञानेंद्र प्रसाद गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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