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तीन वर्ष में सिर्फ 68 गांव हुए खुले में शौचमुक्त
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:12 AM IST
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वीडियो कांफ्रेसिंग में मौजूद प्रभारी डीएम व प्रभारी सीडीओ।
- फोटो : amarujala
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पिछले तीन साल में जिले के कुल 954 गांवों में 38 ही खुले में शौच मुक्त हो पाए हैं। प्रतिदिन जहां 350 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है उसके सापेक्ष केवल 90 ही बन रहे हैं। इसका खुलासा बुधवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार वीडियो कांफ्रें सिंग में हुआ। मुख्य सचिव ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
जिले को खुले में शौचमुक्त करने के लिए वर्ष 2014 से काम हो रहा है जिसे पूरा करने का समय अक्टूबर 2018 है। बुधवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार, प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए शौचालयों के निर्माण की समीक्षा की जिसमें शौचालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर हुई। डीपीआरओ ने उन्हें बताया कि कुल 954 गांव हैं जिसमें 68 गांव खुले में शौचमुक्त हो चुके हैं।
इस पर मुख्य सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई उन्होंने तीन वर्ष में केवल 68 गांव खुले में शौचमुक्त होने पर चिंता जताने के साथ जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी दी। प्रतिदिन शौचालय निर्माण के लक्ष्य के बारे जानकारी की तो बताया कि 350 शौचालय निर्माण का लक्ष्य है जिसमें केवल 90 बन पा रहे हैं। मुख्य सचिव ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने 2 अक्टूबर 2014 से अब तक निर्मित हुए शौचालयों को भारत सरकार की वेहसाइट पर अपलोड करने की स्थिति के बारे में जानकारी ली। वित्तीय वर्ष 2017-18 में आईईसी व एचआरडी मद से खर्च किए गए धनराशि की समीक्षा की।
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मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ओडीएफ के तहत शौचालय निर्माण में सबसे पहले उन गांवों को वरीयता दी जाए जिसमें 90 फीसदी शौचालय पहले से बने हुए हैं। उनमें काम करके उन्हें जल्द खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा सकता है। निर्देश दिया गया कि काम में तेजी लाने के साथ एक माह के अंदर हर हाल में 50 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जाए। इस मौके पर प्रभारी डीएम विद्याशंकर सिंह, प्रभारी सीडीओ अभिराम त्रिवेदी, डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव, डीसी विमल कुमार आदि मौजूद रहे।
प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों की सख्या बढ़ाएं
मुख्य सचिव ने कहा कि राजमिस्त्रियों की कमी दूर करने के लिए अधिक संख्या में राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित कर उन्हें काम पर लगाएं तथा नियमित रूप से मजदूरी का भुगतान करें। इसके साथ स्वच्छता ग्रहियों के चयन, तैनाती, भुगतान आदि के बारे में पूरी जानकारी ली गई।
कैसे पूरा होगा एक साल में लक्ष्य
954 गावों को खुले में शौचमुक्त करने का काम अक्तूबर 2018 में पूरा होना है। जबकि, तीन सालों में अभी तक केवल 68 गांव ही शौचमुक्त हो पाए हैं। ऐसे में एक साल में कैसे गांवों को खुले में शौचमुक्त किया जाएगा। इसमें लापरवाही होनी ही है।
मैथा में तीन गांव ओडीएफ घोषित
शिवली। मैथा कस्बे में तीन गांव को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है। करीब आधा दर्जन गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित करने की तैयारी चल रही है। एडीओ पंचायत अवधेश पांडे ने बताया कि मकरंदपुर बंथा, चक टोडरपुर व शेखूपुर को खुले में शौच मुक्त करते हुए ओडीएफ घोषित किया गया है।
जिले को खुले में शौचमुक्त करने के लिए वर्ष 2014 से काम हो रहा है जिसे पूरा करने का समय अक्टूबर 2018 है। बुधवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार, प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए शौचालयों के निर्माण की समीक्षा की जिसमें शौचालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर हुई। डीपीआरओ ने उन्हें बताया कि कुल 954 गांव हैं जिसमें 68 गांव खुले में शौचमुक्त हो चुके हैं।
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इस पर मुख्य सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई उन्होंने तीन वर्ष में केवल 68 गांव खुले में शौचमुक्त होने पर चिंता जताने के साथ जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी दी। प्रतिदिन शौचालय निर्माण के लक्ष्य के बारे जानकारी की तो बताया कि 350 शौचालय निर्माण का लक्ष्य है जिसमें केवल 90 बन पा रहे हैं। मुख्य सचिव ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने 2 अक्टूबर 2014 से अब तक निर्मित हुए शौचालयों को भारत सरकार की वेहसाइट पर अपलोड करने की स्थिति के बारे में जानकारी ली। वित्तीय वर्ष 2017-18 में आईईसी व एचआरडी मद से खर्च किए गए धनराशि की समीक्षा की।
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मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ओडीएफ के तहत शौचालय निर्माण में सबसे पहले उन गांवों को वरीयता दी जाए जिसमें 90 फीसदी शौचालय पहले से बने हुए हैं। उनमें काम करके उन्हें जल्द खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा सकता है। निर्देश दिया गया कि काम में तेजी लाने के साथ एक माह के अंदर हर हाल में 50 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जाए। इस मौके पर प्रभारी डीएम विद्याशंकर सिंह, प्रभारी सीडीओ अभिराम त्रिवेदी, डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव, डीसी विमल कुमार आदि मौजूद रहे।
प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों की सख्या बढ़ाएं
मुख्य सचिव ने कहा कि राजमिस्त्रियों की कमी दूर करने के लिए अधिक संख्या में राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित कर उन्हें काम पर लगाएं तथा नियमित रूप से मजदूरी का भुगतान करें। इसके साथ स्वच्छता ग्रहियों के चयन, तैनाती, भुगतान आदि के बारे में पूरी जानकारी ली गई।
कैसे पूरा होगा एक साल में लक्ष्य
954 गावों को खुले में शौचमुक्त करने का काम अक्तूबर 2018 में पूरा होना है। जबकि, तीन सालों में अभी तक केवल 68 गांव ही शौचमुक्त हो पाए हैं। ऐसे में एक साल में कैसे गांवों को खुले में शौचमुक्त किया जाएगा। इसमें लापरवाही होनी ही है।
मैथा में तीन गांव ओडीएफ घोषित
शिवली। मैथा कस्बे में तीन गांव को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है। करीब आधा दर्जन गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित करने की तैयारी चल रही है। एडीओ पंचायत अवधेश पांडे ने बताया कि मकरंदपुर बंथा, चक टोडरपुर व शेखूपुर को खुले में शौच मुक्त करते हुए ओडीएफ घोषित किया गया है।