फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghatampur News ›   For workers in case of starvation brought Notbandi

कामगारों के लिए भूखे मरने की नौबत लाई नोटबंदी

Fri, 18 Nov 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 18 Nov 2016 02:23 AM IST
विज्ञापन
For workers in case of starvation brought Notbandi
एसबीआई डेरापुर के बाहर मायूस खड़े लोग। - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के चलते किसानों व गरीब मजदूरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। क्षेत्र की एसबीआई, बीओबी सहित अन्य बैंक शाखाओं में हर रोज ग्राहकों की भीड़ सुबह से उमड़ रही है। इसके चलते दोपहर तक बैंकों में कैश खत्म हो जाता है।
विज्ञापन



फलस्वरूप सैकड़ों जरूरतमंद मायूस होकर लौट रहे हैं। गुरुवार को कस्बे की बैंक आफ  बड़ौदा, एसबीआई, नुनारी स्थित बैंक आफ  बड़ौदा शाखा में दोपहर 12 बजे ही रुपये खत्म हो गए।
विज्ञापन



एसबीआई शाखा प्रबंधक विजय कुमार दुबे व बीओबी शाखा प्रबंधक श्यामसुंदर शुक्ला का कहना है कि वह अपने-अपने हेड आफिसों से निरंतर पैसा भेजने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मांग के अनुसार रुपये नहीं मिल पा रहे हैं, जो रुपये आते हैं, उनका नियमानुसार वितरण हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन




- पलिया निवासी प्रतिमा दो बच्चों को गोद में लेकर सुबह सात बजे बीओबी शाखा में भुगतान के लिए लाइन में खड़ी हो गई। बताया कि जब उसका नंबर आया तो पैसा खत्म हो गया। प्रतिमा बिहार की रहने वाली है और मजदूरी कर बच्चों  का पालन पोषण कर रही है। अब काम भी नहीं मिल रहा है। इससे परिवार भूखे मरने के कगार पर है, यह कहते-कहते वह रोने लगी।

- सरगांव खुर्द निवासी किसान रामचंद्र का कहना है कि खेत की परौहनी हो चुकी है। गेहूं बुवाई का समय चल रहा है, उसे खाद-बीज लेना है। इसके लिए अपने खाते से रुपये निकालने के लिए मंगलवार से अब तक बराबर बैंक के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक रुपये नहीं मिल पाए हैं।

- परौंख गांव निवासी किसान झम्मन लाल का कहना कि उसने खेत की परौहनी का काम तो उधार पैसा लेकर कर लिया, लेकिन अब बुवाई के लिए रुपयों की जरूरत है। एक बीघा खेत में खाद-बीज व मजदूर के लिए कम से कम तीन हजार रुपये की जरूरत है। रुपये न होने से सभी काम ठप हैं।


- परौंख गांव निवासी किसान चंद्रभान सिंह ने बताया कि उसकी धान, बाजरा, मक्का, ज्वार की रखी फसल गल्ला व्यापारी नहीं खरीद रहे हैं। गत वर्ष फसल की कीमत 1200 से 1400 रुपये तक थी, लेकिन इस वर्ष इनकी कीमत नोटबंदी के चलते 200 से 300 रुपये तक घट गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed