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चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, भाई-बहन की मौत
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fire
- फोटो : GHATAMPUR
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घाटमपुर (कानपुर)। कोतवाली के गोपालपुर गांव में रविवार की सुबह चूल्हे की चिंगारी से मजदूर संतराम संखवार की झोपड़ी में आग लग गई। घर में मौजूद एक ही परिवार के चार बच्चे लपटों के बीच फंस गए। परिजनों और ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। हादसे में भाई-बहन की मौत हो गई। जबकि झुलसी जुड़वा बहनों को गंभीर हालत में कानपुर के हैलट में भर्ती कराया गया है।
गांव निवासी मजदूर संतराम संखवार के परिवार में पत्नी राधा और पांच बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा कृष्णा (8) घाटमपुर स्थित ननिहाल में रहता है। बाकी परिवार गांव में रहता है। रविवार की सुबह संतराम अपनी पत्नी राधा के साथ मजदूरी पर खेत में फसल की कटाई करने गया था। घर में उसकी जुड़वां बेटियां सीता और गीता (5), बेटा गोपाल (3) और छोटी बेटी रीता (डेढ़ वर्ष) थे। उसका घर गांव से बाहर कोरियां मार्ग के किनारे बना है। बगल में ही उसके चाचा रामभरोसे का भी मकान है। ग्रामीणों के मुताबिक सुबह करीब 9:30 बजे के आसपास अचानक संतराम की झोपड़ी में आग लग गई। पास रहने वाले संतराम के चाचा ने झोपड़ी से लपटें उठती देखीं। उनके और गांव की एक किशोरी के शोर मचाने पर आसपास के लोग खेतों पर फसल की कटाई कर रहे किसान दौड़कर मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर आग पर काबू पाया। तब तक झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। हादसे में झुलसे चारों बच्चों को झोपड़ी को झोपड़ी से बाहर निकाला गया। तब गोपाल की जलने से मौत हो चुकी थी। जबकि, तीनों बच्चियों को सीएचसी ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें हैलट रेफर कर दिया।
हैलट पहुंचने से पहले रीता ने भी दम तोड़ दिया। जुड़वा बहनों सीता और गीता का इलाज चल रहा है। मामले सीओ घाटमपुर रवि कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों की मां राधा ने सुबह चूल्हे पर खाना बनाया। राधा ने चूल्हे की आग पूरी तरह नहीं बुझाई और खेतों पर काम करने चली गई। इसके बाद चूल्हे की चिंगारी से उसकी झोपड़ी में आग लग गई।
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गांव निवासी मजदूर संतराम संखवार के परिवार में पत्नी राधा और पांच बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा कृष्णा (8) घाटमपुर स्थित ननिहाल में रहता है। बाकी परिवार गांव में रहता है। रविवार की सुबह संतराम अपनी पत्नी राधा के साथ मजदूरी पर खेत में फसल की कटाई करने गया था। घर में उसकी जुड़वां बेटियां सीता और गीता (5), बेटा गोपाल (3) और छोटी बेटी रीता (डेढ़ वर्ष) थे। उसका घर गांव से बाहर कोरियां मार्ग के किनारे बना है। बगल में ही उसके चाचा रामभरोसे का भी मकान है। ग्रामीणों के मुताबिक सुबह करीब 9:30 बजे के आसपास अचानक संतराम की झोपड़ी में आग लग गई। पास रहने वाले संतराम के चाचा ने झोपड़ी से लपटें उठती देखीं। उनके और गांव की एक किशोरी के शोर मचाने पर आसपास के लोग खेतों पर फसल की कटाई कर रहे किसान दौड़कर मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर आग पर काबू पाया। तब तक झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। हादसे में झुलसे चारों बच्चों को झोपड़ी को झोपड़ी से बाहर निकाला गया। तब गोपाल की जलने से मौत हो चुकी थी। जबकि, तीनों बच्चियों को सीएचसी ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें हैलट रेफर कर दिया।
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हैलट पहुंचने से पहले रीता ने भी दम तोड़ दिया। जुड़वा बहनों सीता और गीता का इलाज चल रहा है। मामले सीओ घाटमपुर रवि कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों की मां राधा ने सुबह चूल्हे पर खाना बनाया। राधा ने चूल्हे की आग पूरी तरह नहीं बुझाई और खेतों पर काम करने चली गई। इसके बाद चूल्हे की चिंगारी से उसकी झोपड़ी में आग लग गई।
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