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विकास भवन आज भी ग्राम समाज की जमीन पर दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Jan 2017 02:22 AM IST
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डीडीओ कार्यालय का निरीक्षण करते सीडीओ।
- फोटो : अमर उजाला
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सरकारी मशीनरी की सुस्ती कहें या अफसरों की लापरवाही। वर्ष 1999 में विकास भवन की बिल्डिंग बनकर हैंडओवर हो गई, लेकिन 18 वर्ष बीतने के बावजूद राजस्व अभिलेखों में भूमि विकास भवन के नाम दर्ज नहीं हो सकी है।
इसका खुलासा मंगलवार को सीडीओ केके गुप्ता के निरीक्षण में हुआ। लापरवाही पर खफा सीडीओ ने डीडीओ व एसडीएम अकबरपुर को भूमि विकास भवन के नाम दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को सीडीओ केके गुप्त ने विकास भवन स्थित जिला विकास अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वच्छता एवं पेयजल कार्यालय में अभिलेख देखे, जहां व्यवस्था दुरस्त मिली। इसके बाद डीडीओ कार्यालय में भवन नक्शा, खतौनी आदि विवरणों के अभिलेख जांचे। वहीं विकास भवन से संबंधित पत्रावली देखीं।
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जुलाई 1999 में विकास भवन बिल्डिंग हैंडओवर होने के बावजूद अभी तक खतौनी में जमीन विकास भवन के नाम दर्ज न होने पर सीडीओ खफा दिखे।
इस पर डीडीओ राजितराम मिश्रा ने बताया कि ग्राम सभा भूमि गाटा संख्या 464, 465 व 466 की जमीन विकास भवन के नाम दर्ज कराने के लिए एसडीएम अकबरपुर को पत्र भेजा गया है। सीडीओ ने एसडीएम सदर से फोन पर वार्ता कर खतौनी में भूमि विकास भवन के नाम दर्ज कराने को कहा। निरीक्षण में सीडीओ को शिकायत रजिस्टर में निस्तारण का अंकन नहीं मिला।
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इसका खुलासा मंगलवार को सीडीओ केके गुप्ता के निरीक्षण में हुआ। लापरवाही पर खफा सीडीओ ने डीडीओ व एसडीएम अकबरपुर को भूमि विकास भवन के नाम दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
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मंगलवार को सीडीओ केके गुप्त ने विकास भवन स्थित जिला विकास अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वच्छता एवं पेयजल कार्यालय में अभिलेख देखे, जहां व्यवस्था दुरस्त मिली। इसके बाद डीडीओ कार्यालय में भवन नक्शा, खतौनी आदि विवरणों के अभिलेख जांचे। वहीं विकास भवन से संबंधित पत्रावली देखीं।
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जुलाई 1999 में विकास भवन बिल्डिंग हैंडओवर होने के बावजूद अभी तक खतौनी में जमीन विकास भवन के नाम दर्ज न होने पर सीडीओ खफा दिखे।
इस पर डीडीओ राजितराम मिश्रा ने बताया कि ग्राम सभा भूमि गाटा संख्या 464, 465 व 466 की जमीन विकास भवन के नाम दर्ज कराने के लिए एसडीएम अकबरपुर को पत्र भेजा गया है। सीडीओ ने एसडीएम सदर से फोन पर वार्ता कर खतौनी में भूमि विकास भवन के नाम दर्ज कराने को कहा। निरीक्षण में सीडीओ को शिकायत रजिस्टर में निस्तारण का अंकन नहीं मिला।