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आया नवरात्र, सजा मां दुर्गा का दरबार

Wed, 10 Oct 2018 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 10 Oct 2018 01:51 AM IST
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Decoration in the Court of Goddess Durga
दुर्गा मंदिर के बाहर सजी फूलों व चुनरी की दुकान।
कानपुर देहात। जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में आज से भक्तों का जमावड़ा दर्शन व पूजन के लिए लगेगा। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। वहीं नवरात्र पर धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू हो रहे हैं। शरदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां शैल पुत्री का पूजन किया जाएगा। घरों में भी कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा विधि विधान से की जाएगी। सुरक्षा के लिए प्रमुख मंदिरों पर पुलिस बल तैनात रहेगा।
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 मंगलवार की शाम तक लोगों ने कलश, देवी पूजन  के लिए सामग्री की खरीददारी की। मंदिरों के आसपास फूल मालाओं व मां दुर्गा की परिधान चुनरी, चूड़ी आदि के अलावा फल, मेवा की दुकानें सज गई हैं। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप शैल पुत्री का पूजन विधि विधान से किया जाएगा। आचार्य राजेश दीक्षित ने बताया कि मां दुर्गा रोग, शोक का विनाश करती हैं। भक्त प्रतिदिन नए मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।
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मां शैल पुत्री की आराधना से भक्तों को चेतना का सर्वोच्च शिखर प्राप्त होता है। शैल पुत्री माता शती पार्वती का रूप हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में कमल का फूल रहता है, इनका वाहन बैल है। जिले के अकबरपुर, रूरा, झींझक, रसूलाबाद, डेरापुर, रनियां, गजनेर, सिकंदरा, कौसम आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में भक्त भारी संख्या में पहुंचेंगे। अकबरपुर के कालिका मंदिर, लम्हरा की परहुल देवी, कथरी की कात्यायनी देवी, शिवली की पंथा माता मंदिर, मैथा के सम्मोहनी देवी मंदिरों में सुरक्षा की व्यवस्था की गई है, जिसमें महिला पुलिस कर्मी के साथ पुलिस बल भी तैनात रहेगा।
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वहीं जनपद के विभिन्न कस्बों में धार्मिक अनुष्ठान में भगवत कथा, रामायण, कीर्तन, देवी जागरण आदि आयोजन शुरू हो रहे हैं। इसके साथ ही घरों में महिलाएं कलश की स्थापना कर विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा करेंगी। देवी भक्त महिलाएं व पुरुष नौ दिन का व्रत भी रखेंगे। रूरा प्रतिनिधि के अनुसार लमहरा गंाव के प्राचीन परहुल देवी माता मंदिर भक्तों के लिए भोर पहर से खोल दिया जाएगा।


रिंद नदी किनारे स्थित इस मंदिर के किवदंतियों के अनुसार यह मंदिर आल्हा ऊदल के समय पर भी आस्था का केंद्र था। आल्हा ने इस मंदिर में सोने का एक दीपक चढ़ाया था, जिसको युद्ध के दौरान ऊदल ने उठवाकर रिंद नदी में फिंकवा दिया था। ग्रामीणों की मानें तो आज भी रात में यहां दिया जलता रहता है और भोर पहर देवी जी की मूर्ति पर सफेद एवं गुलाबी फूल चढ़े मिलते हैं।
 
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