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ढाई सौ साल पुराना कल्प वृक्ष मिला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2016 01:04 AM IST
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अति दुर्लभ कल्प वृक्ष क्षेत्र के नंदना और तेजपुर गांवों के मध्य पाया गया है। बुधवार को कृषि अनुसंधान केंद्र, दलीप नगर (कानपुर देहात) के कृषि वैज्ञानिकों ने पेड़ का निरीक्षण किया और बताया कि ऐसा ही एक वृक्ष कानपुर देहात जिले के भुजपुरा गांव के पास भी मिला है।
घाटमपुर क्षेत्र में मिले कल्प वृक्ष की आयु लगभग 250 वर्ष है। इसे पारिजात वृक्ष और पुत्रजीवा वृक्ष भी कहा जाता है।
घाटमपुर-गजनेर मार्ग स्थित नंदना गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के समय यहां पेड़-पौधे लगवाए गए थे। तभी कल्प का पौधा भी लगवाया गया होगा।
कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ अशोक कुमार और डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का वृक्ष है। पूरे कानपुर मंडल में फिलहाल इस प्रजाति के सिर्फ दो ही पेड़ मिले हैं।
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कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह वृक्ष सेमल प्रजाति से मिलता-जुलता है। विशेष औषधीय गुणों के चलते यह विशेष वृक्ष माना जाता है। ऐसे अन्य वृक्षों की खोज करने के साथ सूची तैयार की जा रही है। वृक्षों के संरक्षण और रिसर्च के लिए अब तक खोजे गए वृक्षों की सूची और तैयार की गई रिपोर्ट को केंद्रीय वन एवं पादप अनुसंधान केंद्र को सौंपा जाएगा।
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घाटमपुर क्षेत्र में मिले कल्प वृक्ष की आयु लगभग 250 वर्ष है। इसे पारिजात वृक्ष और पुत्रजीवा वृक्ष भी कहा जाता है।
घाटमपुर-गजनेर मार्ग स्थित नंदना गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के समय यहां पेड़-पौधे लगवाए गए थे। तभी कल्प का पौधा भी लगवाया गया होगा।
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कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ अशोक कुमार और डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का वृक्ष है। पूरे कानपुर मंडल में फिलहाल इस प्रजाति के सिर्फ दो ही पेड़ मिले हैं।
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कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह वृक्ष सेमल प्रजाति से मिलता-जुलता है। विशेष औषधीय गुणों के चलते यह विशेष वृक्ष माना जाता है। ऐसे अन्य वृक्षों की खोज करने के साथ सूची तैयार की जा रही है। वृक्षों के संरक्षण और रिसर्च के लिए अब तक खोजे गए वृक्षों की सूची और तैयार की गई रिपोर्ट को केंद्रीय वन एवं पादप अनुसंधान केंद्र को सौंपा जाएगा।