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UP: गले में सूजन के बाद आ रहा बुखार...इस बीमारी की चपेट में बच्चे, चिकित्सकों ने बताया कैसे करें बचाव
Sat, 08 Feb 2025 05:48 PM IST
अरुन पाराशर
संंवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संंवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sat, 08 Feb 2025 05:48 PM IST
सार
बच्चों में बीमारी तेजी से फैल रही है। बाल रोग चिकित्सकों ने बताया कि यह बीमारी गलसुआ या कनफेड है। जिसे अंग्रेजी में मम्प्स कहते हैं। कुछ एहतियात बरतते हुए बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
फिरोजाबाद में मौसम के बदलाव से बच्चों के गले में सूजन (गलसुआ) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसकी चपेट में आने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। कान के पास सूजन होने के साथ ही बच्चों को बुखार हो जा रहा है। ओपीडी में ऐसे बीमार बच्चों की संख्या इस समय बढ़ गई है।
मेडिकल कॉलेज में शनिवार को 1326 मरीज इलाज कराने पहुंचे। बाल रोग ओपीडी में 238 बच्चे इलाज कराने पहुंचे, इसमें कई बच्चों को कान के नीचे वाले हिस्से मे सूजन होने के साथ दर्द व बुखार की समस्या थी। खाना खाने पर दर्द की परेशानी होती है।
इस तरह के मामले शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं। बच्चों में बीमारी तेजी से फैल रही है। बाल रोग चिकित्सक डॉक्टर एलके गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी गलसुआ या कनफेड है। जिसे अंग्रेजी में मम्प्स कहते हैं। यह एक विषाणुजनित रोग है।
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डाॅक्टर ने बताया कि यह पैरोटिड ग्रंथि में संक्रमण की वजह से होता है। संक्रमण की वजह से इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है। पैरोटिड ग्रंथि कान के नीचे तक होती है और मुंह में लार और थूक बनाती है। गलसुआ कोई हवा से फैलने वाला रोग नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में विषाणु की वजह से फैलता है।
किसी बच्चे को समस्या होेने पर उसका जूठन दूसरे को न खिलाएं, ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन कराएं। रोग के लक्षण देर से दिखाई देते हैं। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। संक्रमण होता है तो लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमित बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखें। बच्चों के एक दूसरे के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है।
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मेडिकल कॉलेज में शनिवार को 1326 मरीज इलाज कराने पहुंचे। बाल रोग ओपीडी में 238 बच्चे इलाज कराने पहुंचे, इसमें कई बच्चों को कान के नीचे वाले हिस्से मे सूजन होने के साथ दर्द व बुखार की समस्या थी। खाना खाने पर दर्द की परेशानी होती है।
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इस तरह के मामले शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं। बच्चों में बीमारी तेजी से फैल रही है। बाल रोग चिकित्सक डॉक्टर एलके गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी गलसुआ या कनफेड है। जिसे अंग्रेजी में मम्प्स कहते हैं। यह एक विषाणुजनित रोग है।
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डाॅक्टर ने बताया कि यह पैरोटिड ग्रंथि में संक्रमण की वजह से होता है। संक्रमण की वजह से इस ग्रंथि में सूजन आ जाती है। पैरोटिड ग्रंथि कान के नीचे तक होती है और मुंह में लार और थूक बनाती है। गलसुआ कोई हवा से फैलने वाला रोग नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में विषाणु की वजह से फैलता है।
किसी बच्चे को समस्या होेने पर उसका जूठन दूसरे को न खिलाएं, ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन कराएं। रोग के लक्षण देर से दिखाई देते हैं। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। संक्रमण होता है तो लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमित बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखें। बच्चों के एक दूसरे के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है।