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Firozabad News: मृत गवाह वाली वसीयत को आधार बनाकर सुना दिया फैसला
Sat, 06 Jul 2024 12:06 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 06 Jul 2024 12:06 AM IST
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फिरोजाबाद। सिरसागंज तहसील प्रशासन ने रुधैनी स्थित जमीन के मामले में जिस वसीयत को आधार बनाते हुए विपक्षियों के पक्ष में फैसला सुना दिया। उस वसीयत के गवाह महावीर सिंह की 1980 में ही मौत हो गई थी। जबकि वसीयत 1985 में हुई थी। पीड़ित का कहना है वसीयत की दूसरी गवाह श्यामा देवी बेटी होने का दावा कर रही थीं। उनके कोई बेटी नहीं थी। पीड़ित ने ऐसे अफसरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए। सिरसागंज तहसील के रुधैनी निवासी वेदेंद्र कुमार ने कहा कि सिरसागंज एसडीएम ने जिस वसीयत को आधार बनाकर विपक्षियों के पक्ष में सात जून का फैसला सुनाया था। उस वसीयत में मैनपुरी के करहल क्षेत्र के गांव असरोही निवासी महावीर सिंह को गवाह बनाया था। वसीयत 1985 में की गई, जबकि महावीर की मौत 1980 में हो गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस लिहाज से साफ है कि वसीयत फर्जी है। उसके सबूत के लिए मृतक के परिवार रजिस्टर की प्रति कोर्ट में प्रस्तुत की गयी थी। दूसरी गवाह श्यामा देवी जो तथाकथिक भगवति कुंवरि की बेटी बता रही थीं। जबकि उनके कोई बेटी ही नहीं थी।
एसडीएम कोर्ट में जमीन का मुकदमा लड़ रहे योगेंद्र और उसके बड़े भाई वेदेंद्र शर्मा एडवोकेट ने बताया कोर्ट ने जिस वसीयत पर फैसला दिया है, उनके विरोध में उन्होंने कोर्ट के समक्ष कागजात प्रस्तुति किए थे। इससे साफ है कि तहसील प्रशासन ने मनमाने ढंग से फैसला सुनाया है। शुक्रवार को पीड़ित वेदेंद्र कुमार की गुप्तचर विभाग की टीमें भी निगरानी करती रहीं।
फसल जोतकर कर दिया लाखों का नुकसान
पीड़ित वेदेंद्र कुमार ने बताया कि उनके खेत में 22 बीघा बाजरा, 15 बीघा मूंग और 12 बीघा मक्का की फसल खड़ी थी। फसल पककर तैयार हो गई थी, लेकिन 15 जून की रात 12 बजे छह ट्रैक्टर और 40 से 50 लोग आए और आनन फानन में उनके खेत की फसल को जबरन जोतकर चले गए। घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षियों ने धमकाकर भगा दिया।
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39 वर्ष पुराना है भूमि विवाद
वेदेंद्र कुमार ने बताया वह मूलरूप से पिल्खतर जैत के निवासी थे, लेकिन उनके पिता कालीचरन को आठ वर्ष की उम्र में ही मेरी बुआ भगवती कुंवरि ने अपने गांव रुधैनी बुला लिया था। क्योंकि उनके पति की मौत हो गई थी। बुआ ने उनके पिता के नाम 35 बीघा कर दी थी। वहीं छोटे भाई योगेंद्र कुमार को गोद लेने के कारण 75 बीघा जमीन का वह मालिक था। क्यों कि बुआ के पास तो 110 बीघा भूमि थी।
लगातार मिल रहीं थीं धमकियां
सिरसागंज। वेदेंद्र और योगेंद्र ने बताया कि उन्हें जिला पंचायत के वार्ड संख्या 28 के सदस्य हरीश धनकर की ओर से उसे लगातार धमकियां मिल रहीं थीं। उन्होंने मुकदमा का फैसला होने के बाद जब वो खेत पर गये तो हरीश धनगर ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। साफ कहा आज के बाद खेत पर दिख मत जाना।
आंधी व तूफान की तरह तहसील में होते गए ऑर्डर
सिरसागंज। वेदेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि सरकारी काम महीनों में होते थे, वह काम आंधी एवं तूफान की तरह होते चले गए। सात जून को एसडीएम कोर्ट ने फैसला लिख दिया। पीड़ित को 11 जून को पता चला। 11 जून को खतौनी में जमीन शिवप्रसाद के पुत्र प्रदीप कुमार, प्रशांत कुमार और प्रवीन कुमार व मनोज पुत्र रामकिशन के नाम दर्ज कर लिए गए। इतना नहीं जमीन पर नाम दर्ज होने के साथ 12 जून को ही उरई जालौन, आगरा एवं मैनपुरी से ग्राहक आ गए और जमीन के बैनामा भी कर दिए गए। आखिर ये तहसील प्रशासन की मिली भगत नहीं हो क्या है। इसके लिए जिम्मेदार तत्कालीन एसडीएम सिरसागंज एवं नायब तहसीलदार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण में सिरसागंज के एक नेता की भूमिका भी सामने आ रही है। वह इन अधिकारियों के बेहद करीबी हैं। वह जमीन का इस समय बड़े स्तर पर काम करते हैं। बताते हैं कि इसके कारण उन्होंने भी इस काम में अधिकारियों का सहयोग किया है।
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एसडीएम कोर्ट में जमीन का मुकदमा लड़ रहे योगेंद्र और उसके बड़े भाई वेदेंद्र शर्मा एडवोकेट ने बताया कोर्ट ने जिस वसीयत पर फैसला दिया है, उनके विरोध में उन्होंने कोर्ट के समक्ष कागजात प्रस्तुति किए थे। इससे साफ है कि तहसील प्रशासन ने मनमाने ढंग से फैसला सुनाया है। शुक्रवार को पीड़ित वेदेंद्र कुमार की गुप्तचर विभाग की टीमें भी निगरानी करती रहीं।
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फसल जोतकर कर दिया लाखों का नुकसान
पीड़ित वेदेंद्र कुमार ने बताया कि उनके खेत में 22 बीघा बाजरा, 15 बीघा मूंग और 12 बीघा मक्का की फसल खड़ी थी। फसल पककर तैयार हो गई थी, लेकिन 15 जून की रात 12 बजे छह ट्रैक्टर और 40 से 50 लोग आए और आनन फानन में उनके खेत की फसल को जबरन जोतकर चले गए। घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षियों ने धमकाकर भगा दिया।
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39 वर्ष पुराना है भूमि विवाद
वेदेंद्र कुमार ने बताया वह मूलरूप से पिल्खतर जैत के निवासी थे, लेकिन उनके पिता कालीचरन को आठ वर्ष की उम्र में ही मेरी बुआ भगवती कुंवरि ने अपने गांव रुधैनी बुला लिया था। क्योंकि उनके पति की मौत हो गई थी। बुआ ने उनके पिता के नाम 35 बीघा कर दी थी। वहीं छोटे भाई योगेंद्र कुमार को गोद लेने के कारण 75 बीघा जमीन का वह मालिक था। क्यों कि बुआ के पास तो 110 बीघा भूमि थी।
लगातार मिल रहीं थीं धमकियां
सिरसागंज। वेदेंद्र और योगेंद्र ने बताया कि उन्हें जिला पंचायत के वार्ड संख्या 28 के सदस्य हरीश धनकर की ओर से उसे लगातार धमकियां मिल रहीं थीं। उन्होंने मुकदमा का फैसला होने के बाद जब वो खेत पर गये तो हरीश धनगर ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। साफ कहा आज के बाद खेत पर दिख मत जाना।
आंधी व तूफान की तरह तहसील में होते गए ऑर्डर
सिरसागंज। वेदेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि सरकारी काम महीनों में होते थे, वह काम आंधी एवं तूफान की तरह होते चले गए। सात जून को एसडीएम कोर्ट ने फैसला लिख दिया। पीड़ित को 11 जून को पता चला। 11 जून को खतौनी में जमीन शिवप्रसाद के पुत्र प्रदीप कुमार, प्रशांत कुमार और प्रवीन कुमार व मनोज पुत्र रामकिशन के नाम दर्ज कर लिए गए। इतना नहीं जमीन पर नाम दर्ज होने के साथ 12 जून को ही उरई जालौन, आगरा एवं मैनपुरी से ग्राहक आ गए और जमीन के बैनामा भी कर दिए गए। आखिर ये तहसील प्रशासन की मिली भगत नहीं हो क्या है। इसके लिए जिम्मेदार तत्कालीन एसडीएम सिरसागंज एवं नायब तहसीलदार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण में सिरसागंज के एक नेता की भूमिका भी सामने आ रही है। वह इन अधिकारियों के बेहद करीबी हैं। वह जमीन का इस समय बड़े स्तर पर काम करते हैं। बताते हैं कि इसके कारण उन्होंने भी इस काम में अधिकारियों का सहयोग किया है।