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मेडिकल बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण बैरंग लौटने को मजबूर हुए दिव्यांग व दुर्घटना का शिकार कई कर्मचारी
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पंचायत चुनाव के लिए गठित मेडिकल बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से दिव्यांग एवं दुर्घटना ?
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। कर्मचारियों की जांच के लिए सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण कई दिव्यांग, सड़क हादसे में घायल कर्मचारियों को बैरंग लौटना पड़ा। कर्मचारियों का कहना था कि उम्मीदों के साथ आए थे, लेकिन अब दोबारा आना पड़ेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की सूची संबंधित विभागों के द्वारा तैयार कर ली गई है। इस सूची में जिले के 312 अधिकारी- कर्मचारियों ने चुनाव में ड्यूटी करने में असमर्थता जाहिर की थी। इन कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच को प्रशासन द्वारा मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। मेडिकल बोर्ड शुक्रवार को विकास भवन प्रांगण में बैठा था। इसमें सर्जन डॉ. हंसराज, फिजीशियन डॉ. संजय सिंह, नेत्र रोग परामर्शदाता डॉ. राकेश यादवेंदु और ईएनटी सर्जन डॉ. हिमांशु कुमार शामिल थे। मेडिकल बोर्ड की टीम में कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ का नाम नहीं था। जबकि अधिकांश कर्मचारी हड्डी रोग विशेषज्ञ से जुड़े आ रहे थे।
डीडीओ कार्यालय में तैनात राजेंद्र सिंह व्हीलचेयर पर अपनी जांच कराने मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए। लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। रेवती देवी स्कूल की शिक्षिका साधना शर्मा पति के साथ ड्यूटी करने में असमर्थ होने की जानकारी बीमारी के कागज लेकर पहुंची थी। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका गीता देवी खेरिया सिरसागंज से दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बाद भी पहुंची थी, मदनपुर के शिक्षक प्रदीप कुमार एवं अरांव क्षेत्र के निवासी मनोज कुमार सिंह दोनों के एक-एक पैर नही हैं इसलिए अपनी ड्यूटी करने में असमर्थता बताने पहुंचे थे। शालिनी वर्मा पोलियोग्रस्त होने के कारण पहुंची थी।
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महिला कर्मचारियों को भी हुई परेशानी
फिरोजाबाद। मेडिकल बोर्ड के लिए सीएमओ द्वारा गठित टीम में किसी महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को नहीं रखा है। इसके कारण गर्भवती महिला कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। आखिर पुरुष डॉक्टर को वह अपनी परेशानी कैसे बताएं। चिकित्सक उन्हें जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए वापस भेज रहे हैं।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की सूची संबंधित विभागों के द्वारा तैयार कर ली गई है। इस सूची में जिले के 312 अधिकारी- कर्मचारियों ने चुनाव में ड्यूटी करने में असमर्थता जाहिर की थी। इन कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच को प्रशासन द्वारा मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। मेडिकल बोर्ड शुक्रवार को विकास भवन प्रांगण में बैठा था। इसमें सर्जन डॉ. हंसराज, फिजीशियन डॉ. संजय सिंह, नेत्र रोग परामर्शदाता डॉ. राकेश यादवेंदु और ईएनटी सर्जन डॉ. हिमांशु कुमार शामिल थे। मेडिकल बोर्ड की टीम में कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ का नाम नहीं था। जबकि अधिकांश कर्मचारी हड्डी रोग विशेषज्ञ से जुड़े आ रहे थे।
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डीडीओ कार्यालय में तैनात राजेंद्र सिंह व्हीलचेयर पर अपनी जांच कराने मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए। लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। रेवती देवी स्कूल की शिक्षिका साधना शर्मा पति के साथ ड्यूटी करने में असमर्थ होने की जानकारी बीमारी के कागज लेकर पहुंची थी। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका गीता देवी खेरिया सिरसागंज से दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बाद भी पहुंची थी, मदनपुर के शिक्षक प्रदीप कुमार एवं अरांव क्षेत्र के निवासी मनोज कुमार सिंह दोनों के एक-एक पैर नही हैं इसलिए अपनी ड्यूटी करने में असमर्थता बताने पहुंचे थे। शालिनी वर्मा पोलियोग्रस्त होने के कारण पहुंची थी।
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महिला कर्मचारियों को भी हुई परेशानी
फिरोजाबाद। मेडिकल बोर्ड के लिए सीएमओ द्वारा गठित टीम में किसी महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को नहीं रखा है। इसके कारण गर्भवती महिला कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। आखिर पुरुष डॉक्टर को वह अपनी परेशानी कैसे बताएं। चिकित्सक उन्हें जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए वापस भेज रहे हैं।