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सत्य से बड़ा संसार में कुछ भी नहीं
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 24 Nov 2015 10:38 PM IST
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सत्य की किसी भी प्रकार परीक्षा ले ली जाए, अंत में विजय सत्य की ही होती है और उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है। ऐसे ही थे महाराजा हरिश्चंद्र, उनका सर्वस्व समाप्त होने के बावजूद उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा और अंत में जीत उन्हीं की हुई। यह बात ठाकुर बीरी सिंह कालेज में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान आचार्य कौशिक जी महाराज ने व्यक्त किए।
व्यास गद्दी से प्रवचन करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि सत्य ही संसार में सबसे बड़ा है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना कठोरतम तपस्या है, जिसे साधारण मानव तो कर ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने वालों को कितने कष्ट झेलने पड़ते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के जीवन चरित्र को देखने से ही मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने का यह अर्थ नहीं है कि व्यक्ति को महज कठिनाई सहन करनी पड़ती है लेकिन अंत में भगवान सत्यवादी को अपने धाम बैकुंठ में स्थान देते हैं। उन्होंने कहा कि कलियुग में सबसे बड़ी तपस्या सत्य बोलना ही है। इस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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व्यास गद्दी से प्रवचन करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि सत्य ही संसार में सबसे बड़ा है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना कठोरतम तपस्या है, जिसे साधारण मानव तो कर ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने वालों को कितने कष्ट झेलने पड़ते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के जीवन चरित्र को देखने से ही मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने का यह अर्थ नहीं है कि व्यक्ति को महज कठिनाई सहन करनी पड़ती है लेकिन अंत में भगवान सत्यवादी को अपने धाम बैकुंठ में स्थान देते हैं। उन्होंने कहा कि कलियुग में सबसे बड़ी तपस्या सत्य बोलना ही है। इस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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