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लाखों की आंखें, दिखता कुछ भी नहीं
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 26 Dec 2015 08:03 PM IST
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योजना तो बहुत अच्छी थी, लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई। व्यापारियों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए बाजारों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने की प्रशासन ने पहल की, जिसमें व्यापारियों का भी सहयोग लिया गया। बात आगे बढ़ी और लाखों रुपये खर्च कर पुलिस विभाग ने एक एजेंसी के माध्यम से बाजारों में कैमरे लगवा दिए गए, लेकिन कुछ महीने बाद ही वह खराब हो गए। कैमरे लगवाने का काम जिस एजेंसी को दिया गया था, उससे संपर्क करने पर पता चला कि वह अब शहर में नहीं है। तब से व्यापारी शासन और प्रशासन से कैमरे ठीक कराने की मांग कर रहे हैं।
सीसीटीवी कैमरे लगवाने का मकसद
नगर के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के पीछे प्रशासन का मकसद था कि जो लोग यातायात नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही चौराहों और उनके आसपास होने वाली हर गतिविधि को पुलिस अधिकारी जिला मुख्यालय पर बैठकर देख सकेंगे। लेकिन यह सब कुछ एक सपना ही बनकर गया। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को सही कराने की सुध न तो पुलिस ने ली और न ही संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कोई प्रयास किया।
तीन वर्ष पहले लगे थे कैमरे
तीन वर्ष पहले एसएसपी डा. राकेश सिंह के समय पर शहर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था की गई थी। इस पर लाखों रुपये खर्च हुए। करीब पांच महीने बाद यह कैमरे खराब होने लगे तो पुलिस से इस बात की शिकायत की गई कि जिस कंपनी से कैमरे लगवाए हैं उसे बुलाएं और इन्हें ठीक कराया जाए। इस पर पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया और कैमरों की सुध तक नहीं ली।
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आसफाबाद चौराहा
हाईवे का आसफाबाद शहर के प्रमुख स्थानों में गिना जाता है। यहां सीसीटीवी कैमरे के साथ ही ट्रैफिक सिग्नल भी है। यह दोनों ही खबरा पड़े हैं।
जाटवपुरी चौराहा
यह चौराहा अतिसंवेदनशील क्षेत्र में गिना जाता है। आए दिन होने वाले हादसों को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर बनवाने के साथ ही ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया था। रामगढ़ थाने के साथ ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्ड भी तैनात किए जाते हैं फिर भी वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं।
नगला बरी चौराहा
मिश्रित आबादी वाले इस चौराहा पर सीसीटीवी कैमरा नहीं है। कहने को ट्रैफिक सिग्नल काम करते हैं। इसके बाद भी वाहन चालक और राहगीर इसका पालन नहीं करते और न ही यातायात नियमों का पालन कराने के लिए कोई प्रयास किया जाता।
सुभाष तिराहा
पुलिस बूथ होने के साथ ही 12 घंटे पुलिस पिकेट तैनात रहती है। इसके बाद भी पुलिस यातायात नियमों का पालन नहीं करा पाती।
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सीसीटीवी कैमरे लगवाने का मकसद
नगर के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के पीछे प्रशासन का मकसद था कि जो लोग यातायात नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही चौराहों और उनके आसपास होने वाली हर गतिविधि को पुलिस अधिकारी जिला मुख्यालय पर बैठकर देख सकेंगे। लेकिन यह सब कुछ एक सपना ही बनकर गया। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को सही कराने की सुध न तो पुलिस ने ली और न ही संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कोई प्रयास किया।
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तीन वर्ष पहले लगे थे कैमरे
तीन वर्ष पहले एसएसपी डा. राकेश सिंह के समय पर शहर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था की गई थी। इस पर लाखों रुपये खर्च हुए। करीब पांच महीने बाद यह कैमरे खराब होने लगे तो पुलिस से इस बात की शिकायत की गई कि जिस कंपनी से कैमरे लगवाए हैं उसे बुलाएं और इन्हें ठीक कराया जाए। इस पर पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया और कैमरों की सुध तक नहीं ली।
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आसफाबाद चौराहा
हाईवे का आसफाबाद शहर के प्रमुख स्थानों में गिना जाता है। यहां सीसीटीवी कैमरे के साथ ही ट्रैफिक सिग्नल भी है। यह दोनों ही खबरा पड़े हैं।
जाटवपुरी चौराहा
यह चौराहा अतिसंवेदनशील क्षेत्र में गिना जाता है। आए दिन होने वाले हादसों को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर बनवाने के साथ ही ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया था। रामगढ़ थाने के साथ ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्ड भी तैनात किए जाते हैं फिर भी वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं।
नगला बरी चौराहा
मिश्रित आबादी वाले इस चौराहा पर सीसीटीवी कैमरा नहीं है। कहने को ट्रैफिक सिग्नल काम करते हैं। इसके बाद भी वाहन चालक और राहगीर इसका पालन नहीं करते और न ही यातायात नियमों का पालन कराने के लिए कोई प्रयास किया जाता।
सुभाष तिराहा
पुलिस बूथ होने के साथ ही 12 घंटे पुलिस पिकेट तैनात रहती है। इसके बाद भी पुलिस यातायात नियमों का पालन नहीं करा पाती।