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Firozabad News: अति पिछड़ों व ब्राह्मण-वैश्य के प्रति बेरुखी बिगाड़ न दे गणित

Sat, 16 Sep 2023 12:08 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Sat, 16 Sep 2023 12:08 AM IST
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Mathematics should not spoil the indifference towards extremely backward people and Brahmins and Vaishyas.
फिरोजाबाद। भाजपा ने जिला व महानगर अध्यक्ष की घोषणा के साथ भले ही संगठन की मजबूती की तैयारी की हो, लेकिन पार्टी से जुड़े पुराने नेताओं का कहना है कि संगठन ने जिले में जातिगत समीकरणों को ध्यान में नहीं रखा है। इसका नुकसान पार्टी को हो सकता है। जिले के राजनीति के धुरंधरों का मानना है कि पार्टी ने महानगर में ब्राह्मण, वैश्य को दरकिनार किया, जबकि जिले में अति पिछड़ों को दायित्य न देकर पार्टी को नफा कम, नुकसान ज्यादा किया है। फिरोजाबाद जिला यादव बाहुल्य है। सैफई परिवार की काफी रिश्तेदारी भी यहां पर हैं। सपा का गढ़ कहे जाने वाली इस लोकसभा सीट पर भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव मे जीत हासिल की थी। भाजपा के डाॅ. चंद्रसेन जादौन ने सपा में आपसी बिखराव का लाभ उठाते हुए लोकसभा की कठिन डगर भी आसानी से अक्षय यादव को हराते हुए पार कर ली थी। इस जीत में फिरोजाबाद विधानसभा व टूंडला विधानसभा का बड़ा हाथ था। क्यों कि शिकोहाबाद, जसराना, सिरसागंज की लीड को इन दोनों विधानसभा ने कवर किया था। फिरोजाबाद विधानसभा में ब्राह्मण, वैश्य निर्णायक की भूमिका में रहते हैं, लेकिन दोनों समाज को पिछले कई वर्षों से लोकसभा व विधानसभा चुनाव के साथ ही निकाय चुनाव में भी निराशा हाथ लगी।
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वहीं जसराना व शिकोहाबाद विधानसभा अति पिछड़ा वर्ग लोधे राजपूत व निषाद बाहुल्य है। उम्मीद थी कि जिले में इस समाज को ही प्रतिनिधित्व मिलेगा। जिससे जातिगत आंकड़े दुरुस्त किए जा सके, लेकिन भाजपा हाईकमान ने जिलाध्यक्ष की कमान क्षत्रिय उदय प्रताप सिंह को सौंपी है। उदय प्रताप खांटी संघी हैं, चुनाव प्रबंधन उन्हें अच्छे ढंग से आता है क्योंकि स्थानीय नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी प्रभारी रहे और चुनाव जीते हैं। हालांकि जातिगत आंकड़ों में वह पार्टी के लिहाज से फिट नहीं बैठ रहे हैं, क्योंकि जिले के क्षत्रिय नेता व मैनपुरी से चुनाव जीते कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह पहले से प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
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क्षत्रिय समाज का जुड़ाव उनकी ओर है। लेकिन क्षत्रिय की जगह अति पिछड़ा वर्ग में शामिल लोधे राजपूत या फिर निषाद समाज को जिले का दायित्व मिलता तो इसका लाभ कई विधानसभा में मिल सकता था। वहीं भाजपा महानगर के हालात भी इससे जुदा नहीं है। जिले में शंखवार समाज अच्छी खासी संख्या में है। संगठन ने बदलाव न करके उन्हें दोबारा मौका दिया है, जबकि महानगर अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण व वैश्य जोरदार दावेदारी कर रहे थे। शुक्रवार को हाईकमान द्वारा लिस्ट जारी की गई तो चौंक गए। उन्हें मायूसी हाथ लगी। लेकिन भाजपा हाईकमान ने यहां कोई बदलाव नहीं करके एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा हाईकमान अपने मूल वोट बैंक वैश्य, ब्राह्मण के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग को कहां स्थान देती है।
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