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मदरसों में देनी होगी फीस, प्रबंधन तय करेगा शुल्क
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फिरोजाबाद। मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शासन स्तर से मिलने वाली नि:शुल्क शिक्षा समाप्त कर दी है। मदरसे में पढ़ाई करने वाले छात्रों को शुल्क देना होगा। मदरसे की प्रबंध समिति शैक्षिक सत्र शुरू होने से एक माह पूर्व शिक्षा शुल्क का निर्धारण कर सकेगी। शुल्क की क्षेत्रीय आधार पर बनाकर जिला अल्पसंख्यक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करनी पड़ेेगी। मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार की ओर से आदेश जारी किया गया है।
अभी तक मदरसों में नि:शुल्क शिक्षा मिलती थी लेकिन अब मदरसों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबें भी लागू की गई हैं। अब निशुल्क शिक्षा को खत्म कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे की प्रबंध समिति शैक्षिक सत्र के शुरू होने से एक माह पूर्व अपने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए छात्र-छात्राओं से लेने वाला शुल्क का निर्धारण खुली बैठक में तय करेंगे। प्रत्येक छात्र से शुल्क लेने के बाद रसीद भी देनी होगी। शुल्क निर्धारण के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा।
मदरसों में नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान अब शासन ने समाप्त कर दिया है। मदरसा प्रबंधन को नियमानुसार खुली बैठक में शुल्क निर्धारण करना होगा और उसका अनुमोदन विभाग से कराना होगा। -जितेंद्र कुमार, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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अभी तक मदरसों में नि:शुल्क शिक्षा मिलती थी लेकिन अब मदरसों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबें भी लागू की गई हैं। अब निशुल्क शिक्षा को खत्म कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे की प्रबंध समिति शैक्षिक सत्र के शुरू होने से एक माह पूर्व अपने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए छात्र-छात्राओं से लेने वाला शुल्क का निर्धारण खुली बैठक में तय करेंगे। प्रत्येक छात्र से शुल्क लेने के बाद रसीद भी देनी होगी। शुल्क निर्धारण के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा।
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मदरसों में नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान अब शासन ने समाप्त कर दिया है। मदरसा प्रबंधन को नियमानुसार खुली बैठक में शुल्क निर्धारण करना होगा और उसका अनुमोदन विभाग से कराना होगा। -जितेंद्र कुमार, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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