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जनपद में पांच सालों के भीतर 40 मदरसे हुए बंद
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फिरोजाबाद। मदरसा के विज्ञान के शिक्षकों को राज्यांश राशि भले ही मिल रही हो, लेकिन केंद्रांश की राशि पिछले करीब पांच वर्षों से नहीं मिली है। शासन स्तर से मदरसों की हो रही अनदेेेखी के कारण करीब पांच साल में जिले के 40 से अधिक मदरसे बंद हो गए हैं। इन बंद हुए मदरसों में अब ज्यादातर में सीबीएसई या फिर आईसीएसई की मान्यता लेकर चलाए जा रहे हैं। मदरसा शिक्षक भी आजीविका चलाने के लिए दूसरे कार्यों में लग रहे हैं।
आधुनिक शिक्षा के तहत मदरसा में ग्रेजुएट शिक्षकों को राज्यांश दो हजार एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को तीन हजार रुपये मिलते हैं, जबकि केंद्रांश ग्रेजुएट शिक्षकों को छह हजार एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को 12 हजार रुपये मिलते हैं। राज्यांश की रकम काफी कम होने के कारण मदरसा शिक्षकों की आजीविका नहीं चल पाती है। ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब 68 है।
जिले में 42 मदरसें हैं संचालित
जिले में अनुदानित एवं गैर अनुदानित सहित कुल 42 मदरसे संचालित हो रहे हैं। सभी मदरसों में विज्ञान, अंग्रेजी और गणित के शिक्षक तैनात हैं। इसमें उनको बतौर मानदेय कुछ राशि राज्यांश एवं कुछ केंद्रांश से दी जाती है। राज्यांश की राशि तो उनको मिल रही है, मगर बीते पांच वर्षों में उनको केवल 77 दिन का केंद्रांश मिला है। इसे लेकर शिक्षकों में काफी आक्रोश है। राज्यांश भी अगस्त माह के बाद नहीं आया।
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बीते पांच वर्षों में से उनको केवल 77 दिनों का ही केंद्रांश मिला है। कई बार इसके लिए आवाज उठाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। केंद्रांश नहीं मिलने से काफी समस्या हो रही है। दूसरे काम कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। मदद न मिलने के कारण कई मदरसे बंद हो गए हैं। मोहम्मद आरिफ, कुरैशियान मदरसा
मदरसा की अनदेखी लगातार हो रही है। राज्यांश समय से नहीं मिलता। मिलता है तो बहुत कम है। शिक्षक हैं, इसलिए हर कार्य भी नहीं कर सकते। क्योंकि शिक्षकों का समाज में अलग पहचान है। इसलिए ट्यूशन पढ़ाने से ही कार्य चलता है। -इमरान अजीज, कुरैशियान मदरसा
मदरसों की अदेखी के कारण छात्र उपस्थिति बेहद कम है। मदरसों को उच्चीकरण करने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। संकट का दौर मदरसा शिक्षक झेल रहे हैं। -मोहम्मद आसिफ, प्रबंधक, मदरसा गुलशन ए उलूफ
पूरे प्रदेश का मामला है, केंद्रांश नहीं आ रहा है इसलिए भुगतान नहीं हो सका है। केंद्र सरकार से राशि आते ही शिक्षकों को भुगतान करा दिया जाएगा
-जितेंद्र कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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आधुनिक शिक्षा के तहत मदरसा में ग्रेजुएट शिक्षकों को राज्यांश दो हजार एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को तीन हजार रुपये मिलते हैं, जबकि केंद्रांश ग्रेजुएट शिक्षकों को छह हजार एवं पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को 12 हजार रुपये मिलते हैं। राज्यांश की रकम काफी कम होने के कारण मदरसा शिक्षकों की आजीविका नहीं चल पाती है। ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब 68 है।
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जिले में 42 मदरसें हैं संचालित
जिले में अनुदानित एवं गैर अनुदानित सहित कुल 42 मदरसे संचालित हो रहे हैं। सभी मदरसों में विज्ञान, अंग्रेजी और गणित के शिक्षक तैनात हैं। इसमें उनको बतौर मानदेय कुछ राशि राज्यांश एवं कुछ केंद्रांश से दी जाती है। राज्यांश की राशि तो उनको मिल रही है, मगर बीते पांच वर्षों में उनको केवल 77 दिन का केंद्रांश मिला है। इसे लेकर शिक्षकों में काफी आक्रोश है। राज्यांश भी अगस्त माह के बाद नहीं आया।
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बीते पांच वर्षों में से उनको केवल 77 दिनों का ही केंद्रांश मिला है। कई बार इसके लिए आवाज उठाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। केंद्रांश नहीं मिलने से काफी समस्या हो रही है। दूसरे काम कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। मदद न मिलने के कारण कई मदरसे बंद हो गए हैं। मोहम्मद आरिफ, कुरैशियान मदरसा
मदरसा की अनदेखी लगातार हो रही है। राज्यांश समय से नहीं मिलता। मिलता है तो बहुत कम है। शिक्षक हैं, इसलिए हर कार्य भी नहीं कर सकते। क्योंकि शिक्षकों का समाज में अलग पहचान है। इसलिए ट्यूशन पढ़ाने से ही कार्य चलता है। -इमरान अजीज, कुरैशियान मदरसा
मदरसों की अदेखी के कारण छात्र उपस्थिति बेहद कम है। मदरसों को उच्चीकरण करने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। संकट का दौर मदरसा शिक्षक झेल रहे हैं। -मोहम्मद आसिफ, प्रबंधक, मदरसा गुलशन ए उलूफ
पूरे प्रदेश का मामला है, केंद्रांश नहीं आ रहा है इसलिए भुगतान नहीं हो सका है। केंद्र सरकार से राशि आते ही शिक्षकों को भुगतान करा दिया जाएगा
-जितेंद्र कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी