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फिरोजाबाद में किसान सम्मान निधि में 85791 किसानों की संख्या हुई कम
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फिरोजाबाद। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त करने वाले किसानों की संख्या हर किश्त में कम होती गई। प्रथम किश्त जिले के दो लाख 18 हजार 559 परिवारों को मिली थी। जबकि सातवीं किश्त के जारी होने तक किसानों 85,791 किसानों की संख्या कम हो गई। सातवीं किश्त जिले के एक लाख 32,768 किसानों को जारी हुई है। सवाल यह है कि 85,791 किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल सका। यदि वह फर्जी थे तो इनको पहली एवं दूसरे किश्त का लाभ क्यों दिया गया।
किसान सम्मान निधि की शुरूआत केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में प्रथम किश्त देकर की थी। दिसंबर 2018 को बेस मानकर पहली किश्त जारी की थी। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले के तीन लाख आठ हजार 965 किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था। इसमें दो लाख 23 हजार 640 किसान परिवार पात्र मिले थे। जिले के दो लाख 18 हजार 559 लघु एवं सीमांत किसान परिवारों के बैंक एकाउंट में किसान सम्मान निधि भेजी जा रही थी।
एक नजर में किसानों को जारी हुई किश्त.....
किश्त नं. किसान धनराशि
प्रथम किश्त 218559 43.71 करोड़
द्वितीय किश्त 212591 42.51 करोड़
तृतीय किश्त 205704 41.14 करोड़
चतुर्थ किश्त 180465 36.09 करोड़
पंचम किश्त 172607 34.52 करोड़
षष्टम किश्त 152543 30.50 करोड़
सातवीं किश्त 132768 26.55 करोड़
पहली किश्त जारी होने के दौरान आधार फीडिंग नहीं कराई थी। बिना आधार फीडिंग के प्रथम किश्त दो लाख 18559 को जारी की थी। आधार फीडिंग कराए जाने के दौरान यह संख्या घट गई। किसानों के डाटा को ठीक कराए जाने का काम अभी भी चल रहा है। इसके कारण आठवीं किश्त में किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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डा. हंसराज उप निदेशक कृषि प्रसार फिरोजाबाद।
पात्र किसान आज भी किश्त आने का कर रहें इंतजार
-किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था। विभाग में जाकर कई बार जांच कराई लेकिन आज तक किसान सम्मान निधि खाते में नहीं आई।
लोकेश भटेले किसान
-तीन बीघा खेत होने के कारण किसान सम्मान निधि को ऑनलाइन आवेदन किया था। काफी भागदौड़ की। आधार कार्ड विभाग में भेज दिया लेकिन आज तक एक पैसा बैंक एकाउंट में नहीं आया।
दिनेश उपाध्याय किसान
-एक बीघा खेती होने के कारण सोचा था कि चले किसान सम्मान निधि के छह हजार रुपया मिल जाया करेंगे लेकिन एक पैसा नहीं मिला। लड़कों को भेजा लेकिन हाथ खाली लौटे। विभाग में कोई सुनने वाला नहीं है।
शंभूनाथ पचौरी किसान
-ढाई से तीन बीघा खेत हमारे पास है। हमें तो ज्यादा जानकारी नहीं है। लड़कों ने किसान सम्मान निधि के लिए फार्म प्रधान के माध्यम से भरवाए थे लेकिन एक पैसा खाते में नहीं आया। आधार कार्ड तक दे दिए। नतीजा सिफर रहा।
जवाहरलाल ओझा किसान
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किसान सम्मान निधि की शुरूआत केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में प्रथम किश्त देकर की थी। दिसंबर 2018 को बेस मानकर पहली किश्त जारी की थी। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले के तीन लाख आठ हजार 965 किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था। इसमें दो लाख 23 हजार 640 किसान परिवार पात्र मिले थे। जिले के दो लाख 18 हजार 559 लघु एवं सीमांत किसान परिवारों के बैंक एकाउंट में किसान सम्मान निधि भेजी जा रही थी।
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एक नजर में किसानों को जारी हुई किश्त.....
किश्त नं. किसान धनराशि
प्रथम किश्त 218559 43.71 करोड़
द्वितीय किश्त 212591 42.51 करोड़
तृतीय किश्त 205704 41.14 करोड़
चतुर्थ किश्त 180465 36.09 करोड़
पंचम किश्त 172607 34.52 करोड़
षष्टम किश्त 152543 30.50 करोड़
सातवीं किश्त 132768 26.55 करोड़
पहली किश्त जारी होने के दौरान आधार फीडिंग नहीं कराई थी। बिना आधार फीडिंग के प्रथम किश्त दो लाख 18559 को जारी की थी। आधार फीडिंग कराए जाने के दौरान यह संख्या घट गई। किसानों के डाटा को ठीक कराए जाने का काम अभी भी चल रहा है। इसके कारण आठवीं किश्त में किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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डा. हंसराज उप निदेशक कृषि प्रसार फिरोजाबाद।
पात्र किसान आज भी किश्त आने का कर रहें इंतजार
-किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था। विभाग में जाकर कई बार जांच कराई लेकिन आज तक किसान सम्मान निधि खाते में नहीं आई।
लोकेश भटेले किसान
-तीन बीघा खेत होने के कारण किसान सम्मान निधि को ऑनलाइन आवेदन किया था। काफी भागदौड़ की। आधार कार्ड विभाग में भेज दिया लेकिन आज तक एक पैसा बैंक एकाउंट में नहीं आया।
दिनेश उपाध्याय किसान
-एक बीघा खेती होने के कारण सोचा था कि चले किसान सम्मान निधि के छह हजार रुपया मिल जाया करेंगे लेकिन एक पैसा नहीं मिला। लड़कों को भेजा लेकिन हाथ खाली लौटे। विभाग में कोई सुनने वाला नहीं है।
शंभूनाथ पचौरी किसान
-ढाई से तीन बीघा खेत हमारे पास है। हमें तो ज्यादा जानकारी नहीं है। लड़कों ने किसान सम्मान निधि के लिए फार्म प्रधान के माध्यम से भरवाए थे लेकिन एक पैसा खाते में नहीं आया। आधार कार्ड तक दे दिए। नतीजा सिफर रहा।
जवाहरलाल ओझा किसान