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Firozabad News: करोड़ों खर्च, फिर भी कचरे के ढेर
Sat, 07 Feb 2026 11:47 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:47 PM IST
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गंदगी के ढेर में भोजन तलाश थी गाय पॉलिथीन खाती हुई। संवाद
- फोटो : गंदगी के ढेर में भोजन तलाश थी गाय पॉलिथीन खाती हुई। संवाद
फिरोजाबाद। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के शीर्ष 10 शहरों में शामिल होने का सपना देख रहे फिरोजाबाद नगर निगम की तैयारियों पर जमीनी हकीकत भारी पड़ रही है। करोड़ों रुपये के बजट और संसाधनों के बावजूद शहर के मुख्य चौराहों और गलियों में कचरे का साम्राज्य बना हुआ है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए नामित संस्था लॉयन सर्विसेज और निगम अधिकारियों की लापरवाही अब शहर की साख पर सवाल खड़े कर रही है।
निगम रिकॉर्ड के अनुसार, सफाई व्यवस्था के लिए संस्था को प्रति माह लगभग 1.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। साथ ही निगम ने 72 ट्रिपर, 15 कॉम्पेक्टर और 170 रिक्शा जैसे संसाधन भी उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद शनिवार को अग्रसेन चौक, गांधी पार्क, शास्त्री मार्केट और घंटाघर जैसे प्रमुख इलाकों में गंदगी का अंबार दिखाई दिया। पार्षदों ने पोल खोलते हुए बताया कि गाड़ियों के साथ पर्याप्त सफाईकर्मी नहीं होते और कूड़ा ढंककर नहीं ले जाया जाता, जिससे राहगीर परेशान होते हैं। यदि यही हाल रहा, तो पिछले वर्ष की 12वीं रैंक को बरकरार रखना भी मुश्किल होगा।
- बदहाल व्यवस्था: संस्था डकार रही करोड़ों, शहर में गंदगी का गढ़ सफाई के नाम पर हर महीने 1.42 करोड़ का भारी-भरकम भुगतान, फिर भी सड़कों पर कचरा।
- सर्वेक्षण पर संकट: 12वीं रैंक भी बचाना मुश्किल, रैंकिंग में कटेंगे नंबर सर्वेक्षण 2025 की तैयारियों में ढिलाई; सर्विस रोड और गलियों के नुक्कड़ बने डंपिंग ग्राउंड।
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पार्षदों ने कार्यदायी संस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए
पार्षद सुनील मिश्रा के अनुसार, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में केवल ड्राइवर होता है, जबकि नियमानुसार एक सफाईकर्मी साथ होना चाहिए। इसी वजह से कूड़ा सड़कों पर ही छूट जाता है। कूड़ा भी गाड़ियों में ढका नहीं जाता, राह चलते लोगों पर गिरता है। पार्षद प्रमोद राजौरिया का आरोप है कि कर्मचारी मोहल्लों में केवल एक बार चक्कर लगाते हैं, जिससे पूरा कचरा नहीं उठ पाता और लोग सड़कों पर कचरा फेंकने को मजबूर हैं।
आयुक्त की चेतावनी
नगर आयुक्त प्रशांत नागर ने कहा कि लॉयन सर्विसेज के कार्यों की होगी समीक्षा, कठोर कार्रवाई होगी।
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निगम रिकॉर्ड के अनुसार, सफाई व्यवस्था के लिए संस्था को प्रति माह लगभग 1.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। साथ ही निगम ने 72 ट्रिपर, 15 कॉम्पेक्टर और 170 रिक्शा जैसे संसाधन भी उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद शनिवार को अग्रसेन चौक, गांधी पार्क, शास्त्री मार्केट और घंटाघर जैसे प्रमुख इलाकों में गंदगी का अंबार दिखाई दिया। पार्षदों ने पोल खोलते हुए बताया कि गाड़ियों के साथ पर्याप्त सफाईकर्मी नहीं होते और कूड़ा ढंककर नहीं ले जाया जाता, जिससे राहगीर परेशान होते हैं। यदि यही हाल रहा, तो पिछले वर्ष की 12वीं रैंक को बरकरार रखना भी मुश्किल होगा।
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- बदहाल व्यवस्था: संस्था डकार रही करोड़ों, शहर में गंदगी का गढ़ सफाई के नाम पर हर महीने 1.42 करोड़ का भारी-भरकम भुगतान, फिर भी सड़कों पर कचरा।
- सर्वेक्षण पर संकट: 12वीं रैंक भी बचाना मुश्किल, रैंकिंग में कटेंगे नंबर सर्वेक्षण 2025 की तैयारियों में ढिलाई
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पार्षदों ने कार्यदायी संस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए
पार्षद सुनील मिश्रा के अनुसार, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में केवल ड्राइवर होता है, जबकि नियमानुसार एक सफाईकर्मी साथ होना चाहिए। इसी वजह से कूड़ा सड़कों पर ही छूट जाता है। कूड़ा भी गाड़ियों में ढका नहीं जाता, राह चलते लोगों पर गिरता है। पार्षद प्रमोद राजौरिया का आरोप है कि कर्मचारी मोहल्लों में केवल एक बार चक्कर लगाते हैं, जिससे पूरा कचरा नहीं उठ पाता और लोग सड़कों पर कचरा फेंकने को मजबूर हैं।
आयुक्त की चेतावनी
नगर आयुक्त प्रशांत नागर ने कहा कि लॉयन सर्विसेज के कार्यों की होगी समीक्षा, कठोर कार्रवाई होगी।