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फतेहपुरः आर्थकि तंगी से परेशान चाचा-भतीजे ने मालगाड़ी से कटकर दी जान

Fri, 26 Jun 2020 11:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 11:46 PM IST
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Troubled by economic tightness, uncle and nephew cut his from goods train in fatehpur
घटना स्थल पर रोते विलखते परिजन - फोटो : FATEHPUR
अल्लीपुर (फतेहपुर)। आर्थिक तंगी से जूझ रहे रिश्ते के चाचा-भतीजे ने मालगाड़ी से कटकर जान दे दी। दोनों लॉकडाउन के दौरान 15 मई को मुंबई से लौटे थे। परिजनों ने बताया कि दोनों सुबह किसी से पैसे लेने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद घटना की जानकारी मिली।
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मलवां थानाक्षेत्र के बरमतपुर गांव निवासी महेंद्र पासवान का बेटा धीरेंद्र पासवान (18) और रामखेलावन का बेटा रामू पासवान (19) मुंबई में शटरिंग का काम करते थे। लॉकडाउन में काम छिना तो 15 मई को गांव लौट आए। रामू धीरेंद्र का रिश्ते में चाचा लगता था। दोनों बचपन से गहरे दोस्त थे। महेंद्र पासवान ने बताया कि सुबह किसी से रुपये लेने की बात कहकर दोनों घर से निकले थे।
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मलवां के चक्की नाका ओवरब्रिज के नीचे दोपहर करीब डेढ़ बजे डाउन लाइन पर मालगाड़ी से कट गए। स्टेशन मास्टर की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। चरवाहों ने दोनों की पहचान की। पुलिस की सूचना पर परिजन भी पहुंच गए। धीरेंद्र के पिता महेंद्र ने बताया कि मुंबई से लौटने के बाद दोनों काम की तलाश में थे।
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वहीं मलवां थाना प्रभारी शेर सिंह राजपूत ने बताया कि घटनास्थल से दोनों के घर की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। इतनी दूर यह दोनों बगैर किसी काम से आए थे। स्टेशन मास्टर ने मेमो में लिखकर दिया है कि मालगाड़ी आने पर दोनों इंजन के सामने आ गए। इससे आत्महत्या की बात स्पष्ट होती है। दोनों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों काम न मिलने से परेशान थे।
रिश्ते से दूर दोनों के बीच थी गहरी दोस्ती
रिश्ते में भले ही दोनों चाचा-भतीजे लगते थे, इनमें दोस्ती का रिश्ता गहरा था। घटना से दोनों परिवार का हाल बेहाल है। एक परिवार का चिराग बुझ गया है। बरमतपुर गांव के रामू और धीरेंद्र एक साल पहले महाराष्ट्र में काम करने गए थे। रामू पासवान परिवार का इकलौता बेटा था। दो बहनें नीलम, सोनम हैं। मां सावित्री पुल के नीचे बेटे का शव देख बदहवास हो र्गइं।

बेटा परिवार का सहारा था। उसकी कमाई से जीवन यापन होता था। धीरेंद्र का बड़ा भाई वीरेंद्र है। उसकी मां क्षमा देवी बेटे का शव देखकर बेेहोश हो गईं। वह बार-बार गश खाकर गिर जाती थीं। बड़ा भाई वीरेंद्र भी महाराष्ट्र के मुंबई में शटरिंग का काम करता है। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों गांव लौटने के बाद एक साथ क्वारंटीन हुए थे। क्वारंटीन का समय खत्म होने के बाद दोनों धान की रोप लगाने साथ आते-जाते थे।
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