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शहादत दिवस पर आज याद किए जाएंगे शिव नारायण
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जहानाबाद। अंग्रेजों की लगान वसूली के विरोध में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले शहीद स्व. शिव नारायण तिवारी का शहीद दिवस पैतृक गांव नोनारा में मनाया जाएगा।
साल 1928 में गुजरात के बारडोली सत्याग्रह से प्रभावित होकर बिंदकी तहसील के नोनारा गांव के किसानों ने भी लगान देने से मना कर दिया था। विरोध को दबाने के लिए तत्कालीन खजुहा तहसीलदार अवध बिहारी श्रीवास्तव 26 फरवरी 1931 को गांव पहुंचे। लगान न देने वाले किसानों को अपमानित किया तो शिव नारायण तिवारी का खून खौल उठा। उन्होंने बेटे दुलारे तिवारी को ललकारा, जिस पर दुलारे ने तहसीलदार को दौड़ा लिया।
गांव के मिश्रीलाल ने घोड़े के पैर पर लाठी मारकर उसे गिरा दिया। किसानों ने तहसीलदार को घेरकर पीट-पीटकर मार डाला। तहसीलदार के अंग रक्षकों की ओर से फायरिंग में किसान शिव नारायण तिवारी की मौत हो गई। घटना में पुलिस ने 192 लोगों पर मुकदमा चलाया। इसमेें दुलारे तिवारी को फांसी दई। 23 को आजीवन कारावास हुआ। क्रांतिकारी दुलारे तिवारी के भतीजे विशंभर तिवारी ने बताया कि 1937 में इस मामले को राजनीतिक करार देते हुए कई क्रांतिकारी आजीवन कारावास की सजा से बच गए थे। परिवार के डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि इसके बाद से हर साल क्रांतिकारियों की याद में 26 फरवरी को श्रद्धांजलि सभा होती चली आ रही है।
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साल 1928 में गुजरात के बारडोली सत्याग्रह से प्रभावित होकर बिंदकी तहसील के नोनारा गांव के किसानों ने भी लगान देने से मना कर दिया था। विरोध को दबाने के लिए तत्कालीन खजुहा तहसीलदार अवध बिहारी श्रीवास्तव 26 फरवरी 1931 को गांव पहुंचे। लगान न देने वाले किसानों को अपमानित किया तो शिव नारायण तिवारी का खून खौल उठा। उन्होंने बेटे दुलारे तिवारी को ललकारा, जिस पर दुलारे ने तहसीलदार को दौड़ा लिया।
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गांव के मिश्रीलाल ने घोड़े के पैर पर लाठी मारकर उसे गिरा दिया। किसानों ने तहसीलदार को घेरकर पीट-पीटकर मार डाला। तहसीलदार के अंग रक्षकों की ओर से फायरिंग में किसान शिव नारायण तिवारी की मौत हो गई। घटना में पुलिस ने 192 लोगों पर मुकदमा चलाया। इसमेें दुलारे तिवारी को फांसी दई। 23 को आजीवन कारावास हुआ। क्रांतिकारी दुलारे तिवारी के भतीजे विशंभर तिवारी ने बताया कि 1937 में इस मामले को राजनीतिक करार देते हुए कई क्रांतिकारी आजीवन कारावास की सजा से बच गए थे। परिवार के डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि इसके बाद से हर साल क्रांतिकारियों की याद में 26 फरवरी को श्रद्धांजलि सभा होती चली आ रही है।
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