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Fatehpur News: कार्रवाई की जद में आ सकते हैं और अधिकारी
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फतेहपुर। असोथर ब्लॉक की सरकंडी ग्रामसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मजदूरी भुगतान में हुए घोटाले को लेकर जांच तेज हो गई है। अब तक 10 कर्मचारियों पर कार्रवाई के बावजूद कई वरिष्ठ जवाबदेह अधिकारी अभी तक जांच के दायरे से बाहर हैं। शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में सरकंडी में प्रधानमंत्री आवास की मजदूरी में करीब 56.83 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है। परियोजना निदेशक मनरेगा शेषमणि की ओर से कराई गई जांच में सामने आया है कि प्रति आवास औसतन 20,000 की अनियमितता हुई। ग्राम पंचायत में उस वर्ष 709 आवास स्वीकृत हुए थे।
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने अपने कार्यकाल के दौरान घोटाले के बावजूद ब्लॉक में तैनात 10 कर्मचारियों पर धोखाधड़ी और कूटरचना की रिपोर्ट दर्ज कराई है। हालांकि मजदूरी भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी बीडीओ और प्रधान की होने के बावजूद उन्हें अब तक कार्रवाई से बाहर रखा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई हुई, तो कई अन्य जिम्मेदार भी जांच के दायरे में आएंगे। आरोप है कि मस्टर रोल तैयार करने में ग्राम प्रधान की भूमिका की अनदेखी की गई है।
परियोजना निदेशक शेषमणि ने बताया कि यह जांच शासन स्तर से कराई गई थी। एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर अनियमितता की पुष्टि हुई है। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। फिलहाल 10 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन जांच के दौरान घोटाले में अभी रकम या आरोपी बढ़ सकते हैं।
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वित्तीय वर्ष 2023-24 में सरकंडी में प्रधानमंत्री आवास की मजदूरी में करीब 56.83 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है। परियोजना निदेशक मनरेगा शेषमणि की ओर से कराई गई जांच में सामने आया है कि प्रति आवास औसतन 20,000 की अनियमितता हुई। ग्राम पंचायत में उस वर्ष 709 आवास स्वीकृत हुए थे।
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खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने अपने कार्यकाल के दौरान घोटाले के बावजूद ब्लॉक में तैनात 10 कर्मचारियों पर धोखाधड़ी और कूटरचना की रिपोर्ट दर्ज कराई है। हालांकि मजदूरी भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी बीडीओ और प्रधान की होने के बावजूद उन्हें अब तक कार्रवाई से बाहर रखा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई हुई, तो कई अन्य जिम्मेदार भी जांच के दायरे में आएंगे। आरोप है कि मस्टर रोल तैयार करने में ग्राम प्रधान की भूमिका की अनदेखी की गई है।
परियोजना निदेशक शेषमणि ने बताया कि यह जांच शासन स्तर से कराई गई थी। एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर अनियमितता की पुष्टि हुई है। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। फिलहाल 10 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन जांच के दौरान घोटाले में अभी रकम या आरोपी बढ़ सकते हैं।