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Fatehpur News: विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल
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फोटो-02-जिला अस्पताल में मरीजाें को देखते डॉक्टर। संवाद
फतेहपुर। जिला अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी का असर सीधे मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से उन्हें या तो सामान्य उपचार देकर वापस भेज दिया जाता है या कानपुर, प्रयागराज और लखनऊ रेफर किया जाता है। यहां कुल 134 स्वीकृत पद में मात्र 57 डॉक्टर कार्यरत हैं। 77 पद रिक्त पड़े हुए हैं।
सबसे अधिक परेशानी हृदय रोग, पेट, दिमाग, गुर्दा समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उठानी पड़ रही है।कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से आवश्यक जांचें नहीं हो पाती है। एनेस्थेटिस्ट के न होने से सर्जरी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में समय पर इलाज नहीं मिल पाता है।
अस्पताल में कई पैरामेडिकल कर्मचारियों, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और वार्ड ब्वॉय के पद भी रिक्त हैं। इस कारण जांच, वार्ड प्रबंधन और मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है। कर्मचारियों की कमी के चलते मौजूद स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि मरीज सुरेंद्र सिंह और राहुल कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल में सभी विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।
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वर्जन
रिक्त पदों की जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है और नियुक्तियां होने के बाद स्थिति में सुधार आएगा। - डॉ. राजेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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सबसे अधिक परेशानी हृदय रोग, पेट, दिमाग, गुर्दा समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उठानी पड़ रही है।कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से आवश्यक जांचें नहीं हो पाती है। एनेस्थेटिस्ट के न होने से सर्जरी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में समय पर इलाज नहीं मिल पाता है।
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अस्पताल में कई पैरामेडिकल कर्मचारियों, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और वार्ड ब्वॉय के पद भी रिक्त हैं। इस कारण जांच, वार्ड प्रबंधन और मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है। कर्मचारियों की कमी के चलते मौजूद स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि मरीज सुरेंद्र सिंह और राहुल कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल में सभी विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।
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रिक्त पदों की जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है और नियुक्तियां होने के बाद स्थिति में सुधार आएगा। - डॉ. राजेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक