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जेन-जी से आगे: यूपी के फतेहपुर में सरकारी स्कूल के बच्चों ने दिखाए तेवर, सड़क पर उतरकर प्रशासन को झुकाया

Wed, 29 Jul 2026 03:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, फतेहपुर
अमर उजाला नेटवर्क, फतेहपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 Jul 2026 03:22 AM IST
सार

मूलभूत सुविधाओं में कमी को लेकर बच्चों का आक्रोश देख शिक्षा विभाग को आखिकरकार झ़ुकना पड़ा। विभाग ने पेयजल व दूसरी मांगे पूरी कर दीं।

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Government school students in UP's Fatehpur take to the streets and force the administration to yield.
तेवर... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए जेन-जी आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अपने हक के लिए सरकारी स्कूल के बच्चों को सड़क पर उतरना पड़ा। भीषण गर्मी के बावजूद किशनपुर कस्बे के सर्वोदय इंटर कॉलेज में पंखा न होने और पीने के पानी की व्यवस्था न होने से नाराज  कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने स्कूल गेट पर प्रदर्शन किया।  मूलभूत सुविधाओं में कमी को लेकर बच्चों का आक्रोश देख शिक्षा विभाग को आखिकरकार झ़ुकना पड़ा। विभाग ने पेयजल व दूसरी मांगे पूरी कर दीं।

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प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने पेयजल, जर्जर भवन, टपकती छत, पर्याप्त पंखे, फर्नीचर और खेल सुविधाओं के लिए मंगलवार सुबह बैनर लहराए। छात्र हाथों में पोस्टर लहरा रहे थे, जिसमें लिखा था कि डीएम को आना होगा। प्रदर्शन की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। नायब तहसीलदार नितिन कुमार ने भी स्कूल पहुंचकर समस्याएं सुनीं। सुबह आठ बजे शुरू हुआ प्रदर्शन दोपहर 12 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। प्रधानाचार्य लाल बहादुर सिंह ने कहा कि शासन तक मांगें भेजी जा चुकी हैं।
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वाटर कूलर तो है, मगर सिर्फ शिक्षकों के लिए 
छात्रों का आरोप है कि खेल शिक्षक होने के बावजूद नियमित खेल गतिविधियां नहीं होतीं। खेल मैदान की भी समुचित साफ-सफाई और देखरेख नहीं होती। विद्यालय में लगा वाटर कूलर केवल शिक्षकों और कर्मचारियों के उपयोग में आता है। विद्यार्थी पानी नहीं ले सकते। 
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17 कमरों में 1,850 बच्चे, कई बार हुए बेहोश
स्कूल में 1,850 बच्चों का नामांकन है, जबकि कमरे सिर्फ 17 हैं। 40 की क्षमता वाले कमरों में 70 से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। चार कमरे तो बेहद जर्जर हैं। कई कक्षाएं टिनशेड के नीचे संचालित की जा रही हैं। कई कमरों में पंखे खराब हैं और बच्चे गर्मी से बेहोश तक हो जाते हैं।


बैठते हैं जमीन पर छात्रों ने कहा, कक्षा 8 तक के बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। जमीन पर बैठ पढ़ाई करनी पड़ती है। मिड-डे मील के दूध में पानी मिलाया जाता है। 

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