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बेशकीमती गिरधर गोपाल की मूर्ति बदमाशों ने लूटी

Mon, 06 Apr 2015 12:28 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फतेहपुर
ब्यूरो,अमर उजाला फतेहपुर Updated Mon, 06 Apr 2015 12:28 AM IST
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Girdhar Gopal prized statue miscreants looted

औंग थाना क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल शिवराजपुर स्थिति मंदिर से

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अष्टधातु की गिरधर गोपाल की मूर्ति स्कार्पियों सवार सशस्त्र बदमाश पुजारिन को पीट करके लूट ले गए। लूट की खबर फैलते ही कई गांव के श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया। पुलिस ने नाकेबंदी करके  वाहनों की चेकिंग शुरू कराई है


गंगा कटरी में बसे शिवराजपुर गांव में गिरधर गोपाल की मीराबाई के हाथों की मूर्ति स्थापित थी। मंदिर के पुजारी पुरुषोत्तम बाजपेई दोपहर को किसी काम से चौडगरा चले गए थे। मंदिर में महिला पुजारिन विमला देवी मौजूद रही है।

शाम को मंदिर मेंदर्शन के बहाने चार बदमाश पहुंचे थे। उन्होंने दर्शन करने के बहाने मंदिर को चैनर दरवाजा खुलवा लिया।

तभी वृद्धा को  दो बदमाशों ने दबोच लिया। असलहे निकाल कर पिटाई की और जान से मारने क ी धमकी देेकर मुंह में चम्मच व कपड़ा ठूंस दिया।

दूसरे बदमाशों ने मूर्ति को उठाकर स्कार्पियो में उठा ले गए। वृद्धा को बंद करके बदमाश फरार हो गए। बदमाशों के जाने के बाद वृद्धा की चीख पुकार सुनकर पास में खेल रहे बच्चों ग्रामीणों की सूचना दी। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना देकर एक बार चौपहिया वाहनों ने बदमाशों का पीछा किया। लेकिन कोई पता नहीं चल सका। सीओ अनुराग दर्शन, एसओ अजय सेठ घटना स्थल की पड़ताल के लिए पहुंचे। मौके की पड़ताल के बाद हाइवे पर नाकेबंदी कर दी गई और चेकिंग अभियान शुरू किया गया। घटना की तहरीर पुजारी के पुत्र हरिओम बाजपेई ने पुलिस को दी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। बताते चले कि  गिरधर गोपाल की मूर्ति को 12 साल पहले भी चोरी किया गया था। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद मूर्ति की बरामदगी हो सकी थी। उस समय पर मूर्ति के अद्वितीय होने के कारण करोड़ों की कीमत आंकी गई थी। सीओ ने बताया कि मुकदमा दर्ज करके मूर्ति की तलाश की जा रही है। जल्द ही बदमाशों को पकड़ कर मूर्ति बरामद कर ली जाएगी।

साइड स्टोरी
 
12 साल पहले चोरी के बाद करोड़ों का तय हुआ था सौदा
- मीराबाई के हाथों स्थापित होने पर विख्यात है मूर्ति
फतेहपुर। शिवराजपुर के प्राचीन मंदिर से गिरधर गोपाल की मूर्ति को एक दशक पहले 2003 में भी बदमाश दरवाजे तोड़कर चुरा ले गए थे। जिलेभर में मूर्ति को लेकर हंगामा हुआ है। पुलिस की कड़ी मेहनत के बाद मूर्ति बरामद हो सकी थी। मूर्ति को मीराबाई के हाथों से स्थापित करने की किवदंतियों में बताया जाता है। इसी वजह से मूर्ति को असहज प्रतिमा का दर्जा है और इसी वजह से कीमत भी करोड़ों में आंकी जाती है।
दशक भर पहले शातिरों ने मंदिर के दरवाजे ताले तोड़कर मूर्ति को पार कर दिया था। एक माह तक पड़ताल होने के बाद शहर के सनगांव इलाके से मूर्ति पुलिस ने बरामद की थी। बदमाशों ने मूर्ति को एक कोठरी के अंदर भूसे में रख दिया था। हाइवे के इंडस्ट्री क्षेत्र के प्रमुख व्यवसाइयों और आम श्रद्धालुओं ने मूर्ति चोरी के पुलिस प्रशासन की नींद हराम कर दी थी। पुलिस दबाव से परेशान हो गई थी और कड़ी मेहनत के बाद सफलता हाथ लगी थी। पुलिस के हत्थे चढ़े बदमाशों ने मूर्ति का सौदा करोड़ों में तय किए जाने की बात क बूल की थी। मंदिर के पुजारी पुरषोत्तम बाजपेई ने बताया कि वह लोग दशक भर पहले हुई चोरी के बाद  काफी सतर्क रहते थे। मंदिर में मूर्ति सुरक्षा के  कड़े इंतजाम हैं। उन्हें दिन में मूर्ति को लूट ले जाने का कतई भरोसा नहीं था। इसी वजह से  वृद्ध बहन को रखवाली के लिए छोड़ गए थे। वह लोग खुद ही रात को मंदिर में रहते हैं। कई पीढ़ियों से उनके  बुजुर्ग मंदिर की देखरेख करते आ रहे हैं। उनके बुजुर्ग बताते थे कि इस मूर्ति को मीराबाई ने अपने हाथों से स्थापित किया था। तभी से इसी मान्यता के साथ मूर्ति को भक्त पूजते आ रहे हैं।

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