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फतेहपुर : शिवालयों में गूंजा बम-बम भोले का उद्धघोष

Mon, 18 Jul 2022 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 12:06 AM IST
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Fatehpur: The sound of bomb-bomb naive in the pagoda
तांबेश्वर मंदिर में बैरीकेडिंग करते श्रद्घालु। संवाद - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। सावन के पहले सोमवार की तैयारियां रविवार को पूरे दिन शिवालयों में चलतीं रहीं। पालिका कर्मियों के अलावा शिवभक्त व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे रहे।
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सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में सावन के पहले सोमवार को उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर रविवार दोपहर से ही पालिका कर्मी व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे रहे। मंदिर के गेट से लेकर चौराहे तक बैरिकेडिंग की गई, जिससे पुरुष और महिला श्रद्धालु अलग-अलग लाइन से मंदिर के अंदर जा सकें।
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ग्रामीण क्षेत्र के जागेश्वरधाम, थवईश्वर धाम, डूढ़ेश्वर धाम, कुंडेश्वर धाम समेत जिले में भगवान शिव के सिद्धपीठ मंदिर हैं। यहां पर सावन के सोमवार को जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने के लिए पुलिसकर्मी भी लगाए गए हैं।
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सावन हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवां महीना ईस्वी कलेंडर के जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है। इसे वर्षा ऋतु का महीना या ‘पावस ऋतु’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह बारिश का समय होता है। इस माह में कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं, जिसमें हरियाली तीज, रक्षाबंधन, नागपंचमी प्रमुख हैं। सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। इस माह में पड़ने वाले सोमवार सावन के सोमवार कहे जाते हैं, जिनमें स्त्रियां तथा विशेषतौर से कुंवारी युवतियां भगवान शिव के निमित्त व्रत रखती हैं।

पंडित दुर्गादत्त शास्त्री बताते हैं कि सावन के बारे में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से शरीर त्यागने से पहले महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अगले जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था में सावन महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।
ऐसे करें भगवान शिव की आराधना
सावन मास में भगवान शिव की पूजा उनके परिवार के सदस्यों संग करनी चाहिए। इस माह में भगवान शिव के ‘रुद्राभिषेक’ का विशेष महत्व है।
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