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Fatehpur News: स्वदेशी मेले में उमड़ा जनसैलाब, आल्हा-ऊदल की वीरता पर झूमे लोग
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फोटो-55-स्वदेशी मेले के समापन पर मौजूद अधिकारी व अन्य। संवाद
फतेहपुर। आईटीआई परिसर में आयोजित स्वदेशी मेले का शनिवार शाम रंगारंग समापन हुआ। आठ दिनों तक चले इस मेले में लोगों ने पारंपरिक वस्तुओं की खूब खरीदारी की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद उठाया। अनुमानित तौर पर मेले के दौरान करीब 50 लाख रुपये की खरीदारी की गई। इससे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिला।
शुरुआत में मेले में लगभग 65 स्टॉल लगाए गए थे, लेकिन बढ़ती भीड़ और भागीदारी को देखते हुए यह संख्या बढ़कर 80 हो गई। हर स्टॉल पर अलग-अलग स्वदेशी उत्पादों की रौनक थी। हस्तशिल्प, गृह उपयोगी सामान, पारंपरिक वस्त्र और खाने-पीने के लोकल व्यंजन खास आकर्षण रहे। लोगों ने पूरे उत्साह से खरीदारी की और छोटे कारोबारियों का हौसला बढ़ाया।
मेले का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। इसमें आल्हा गायन ने लोगों को रोमांचित कर दिया। कलाकारों ने जब बज रहे थे ढोल और नगाड़े, दुश्मन कांप रहा था और बड़े लड़इया महुबे वाले जिनसे हार गई तलवार जैसे आल्हा गीतों की प्रस्तुति दी, तो दर्शकों में जोश की लहर दौड़ गई। वीर रस से भरे इन गीतों ने समां बांध दिया और दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
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महर्षि विद्या मंदिर और जयपुरिया स्कूल के बच्चों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। गीत, नृत्य और कवि सम्मेलन जैसे आयोजन बच्चों की प्रतिभा और भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे थे, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। समापन समारोह में उपायुक्त उद्योग कुंवर चंद्रभान सिंह ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
उन्होंने मेले में स्टॉल लगाने वाले सभी प्रतिभागियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों, छात्र-छात्राओं तथा आयोजन में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मेलों से न सिर्फ स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।
स्वदेशी मेले में लकड़ी के फर्नीचर सहित अन्य सामान, कैफेे, पिज्जा, चाट बतासे, भेलपूरी, पॉपकॉन, आइस्क्रीम, चाउमीन खान-पान के स्टॉल, झूले, मिट्टी व गोबर के दीपक, झालर, अचार, मसाले, सहारनपुर का फर्नीचर, भदोही की कालीन के स्टाल लगे थे।
उपायुक्त उद्योग ने बताया कि मेले में भदोही की कालीन और सहारनपुर के फर्नीचर के साथ ही अन्य सामानों की खूब खरीदारी हुई। मेले के दौरान करीब 50 लाख रुपये की लोगों ने खरीदारी की।
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शुरुआत में मेले में लगभग 65 स्टॉल लगाए गए थे, लेकिन बढ़ती भीड़ और भागीदारी को देखते हुए यह संख्या बढ़कर 80 हो गई। हर स्टॉल पर अलग-अलग स्वदेशी उत्पादों की रौनक थी। हस्तशिल्प, गृह उपयोगी सामान, पारंपरिक वस्त्र और खाने-पीने के लोकल व्यंजन खास आकर्षण रहे। लोगों ने पूरे उत्साह से खरीदारी की और छोटे कारोबारियों का हौसला बढ़ाया।
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मेले का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। इसमें आल्हा गायन ने लोगों को रोमांचित कर दिया। कलाकारों ने जब बज रहे थे ढोल और नगाड़े, दुश्मन कांप रहा था और बड़े लड़इया महुबे वाले जिनसे हार गई तलवार जैसे आल्हा गीतों की प्रस्तुति दी, तो दर्शकों में जोश की लहर दौड़ गई। वीर रस से भरे इन गीतों ने समां बांध दिया और दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
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महर्षि विद्या मंदिर और जयपुरिया स्कूल के बच्चों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। गीत, नृत्य और कवि सम्मेलन जैसे आयोजन बच्चों की प्रतिभा और भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे थे, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। समापन समारोह में उपायुक्त उद्योग कुंवर चंद्रभान सिंह ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
उन्होंने मेले में स्टॉल लगाने वाले सभी प्रतिभागियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले कलाकारों, छात्र-छात्राओं तथा आयोजन में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मेलों से न सिर्फ स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।
स्वदेशी मेले में लकड़ी के फर्नीचर सहित अन्य सामान, कैफेे, पिज्जा, चाट बतासे, भेलपूरी, पॉपकॉन, आइस्क्रीम, चाउमीन खान-पान के स्टॉल, झूले, मिट्टी व गोबर के दीपक, झालर, अचार, मसाले, सहारनपुर का फर्नीचर, भदोही की कालीन के स्टाल लगे थे।
उपायुक्त उद्योग ने बताया कि मेले में भदोही की कालीन और सहारनपुर के फर्नीचर के साथ ही अन्य सामानों की खूब खरीदारी हुई। मेले के दौरान करीब 50 लाख रुपये की लोगों ने खरीदारी की।

फोटो-55-स्वदेशी मेले के समापन पर मौजूद अधिकारी व अन्य। संवाद