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ओटी और उगाही का काफी गहरा नाता
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फतेहपुर। सदर अस्पताल में आपरेशन के नाम पर रुपए वसूलने का खेल काफी पुराना है। अरसे से यह खेल चल रहा है। जिसे रोकने के सटीक प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिससे सरकारी इलाज कराने आने वाली जनता को अस्पताल की उगाही से दो-चार होना पड़ रहा है।
शुक्रवार इस मुद्दे पर हुए बवाल के बाद अस्पताल प्रशासन ने दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच बिठा दी है। जांच कमेटी शनिवार तक किसी नतीजे में नहीं पहुंच सकी। हालांकि जांच कमेटी को रिपोर्ट पेश करने का सोमवार तक का वक्त मिला है। ऐसा माना जा रहा है कि जांच की आंच में कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
सदर अस्पताल में शुक्रवार को एक सर्जन पर आपरेशन के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। मामले को लेकर न केवल सीएमएस दफ्तर में हंगामा काटा गया था बल्कि ओटी में सर्जन के हेल्पर की सेवाएं देने वाले एक स्वास्थ्य कर्मी पिट भी गया था। सदर नगर पालिका चेयरमैन के प्रतिनिधि हाजी रजा ने सर्जन पर साफ तौर पर उगाही का आरोप लगाया था।
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जिस पर सीएमएस डॉ. प्रभाकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर फिजीशियन डॉ. आरएम गुप्ता व ह्दयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार तिवारी को जांच कमेटी का सदस्य नामित किया था। इस कमेटी को तीन दिन में मामले की सच्चाई पता करके रिपोर्ट देनी है।
सूत्रों बताते हैं कि आपरेशन थियेटर में सौदे के बाद ही डॉक्टर हाथ लगाते हैं। मजबूरी में तीमारदार रिश्वत की पेशकश स्वीकारने को विवश होता है। शुक्रवार को दो प्रकरण में एक ऐसा ही रहा। आरोप लगाया गया कि महज मांगी गई रकम न मिलने की वजह से आपरेशन टरकाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस प्रकरण के सामने आने से कई और मामले पर अस्पताल प्रशासन के मुखिया की निगाह लग गई है। ऐसे में माना यही जा रहा है कि सोमवार तक बड़ा खुलासा हो सकता है। जिसमें कई और नाम सामने आ सकते हैं।
शुक्रवार रिश्वतखोरी के सामने आए प्रकरण ने अस्पताल के सिस्टम की पोल खोल करके रख दी। एक कर्मचारी पर विरोध जताने वालों का गुस्सा फूटा। जिससे एक बात साफ हो गई कि रिश्वतखोरी के खेल में ओटी का पूरा स्टाफ शामिल रहता है। एक सर्जन इस बात को स्वीकारते भी हैं। बकौल सर्जन, हर तरह के आपरेशन का रेट होता है। इस बाबत तीमारदार को बता दिया जाता है। चूंकि बाहर महंगा आपरेशन होता है। इसलिए तीमारदार रिश्वतखोरी की शर्त मानने को तैयार रहता है।
जांच कमेटी को तीन दिन का समय दिया गया है। जो बात सामने आई है। उससे इतना तो साफ है कि कुछ न कुछ है, क्या है, यही जानने का प्रयास किया जा रहा है। अगर आरोप साबित होते हैं तो सर्जन समेत पूरे स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रभाकर, सीएमएस, सदर अस्पताल।
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शुक्रवार इस मुद्दे पर हुए बवाल के बाद अस्पताल प्रशासन ने दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच बिठा दी है। जांच कमेटी शनिवार तक किसी नतीजे में नहीं पहुंच सकी। हालांकि जांच कमेटी को रिपोर्ट पेश करने का सोमवार तक का वक्त मिला है। ऐसा माना जा रहा है कि जांच की आंच में कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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सदर अस्पताल में शुक्रवार को एक सर्जन पर आपरेशन के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। मामले को लेकर न केवल सीएमएस दफ्तर में हंगामा काटा गया था बल्कि ओटी में सर्जन के हेल्पर की सेवाएं देने वाले एक स्वास्थ्य कर्मी पिट भी गया था। सदर नगर पालिका चेयरमैन के प्रतिनिधि हाजी रजा ने सर्जन पर साफ तौर पर उगाही का आरोप लगाया था।
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जिस पर सीएमएस डॉ. प्रभाकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर फिजीशियन डॉ. आरएम गुप्ता व ह्दयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार तिवारी को जांच कमेटी का सदस्य नामित किया था। इस कमेटी को तीन दिन में मामले की सच्चाई पता करके रिपोर्ट देनी है।
सूत्रों बताते हैं कि आपरेशन थियेटर में सौदे के बाद ही डॉक्टर हाथ लगाते हैं। मजबूरी में तीमारदार रिश्वत की पेशकश स्वीकारने को विवश होता है। शुक्रवार को दो प्रकरण में एक ऐसा ही रहा। आरोप लगाया गया कि महज मांगी गई रकम न मिलने की वजह से आपरेशन टरकाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस प्रकरण के सामने आने से कई और मामले पर अस्पताल प्रशासन के मुखिया की निगाह लग गई है। ऐसे में माना यही जा रहा है कि सोमवार तक बड़ा खुलासा हो सकता है। जिसमें कई और नाम सामने आ सकते हैं।
शुक्रवार रिश्वतखोरी के सामने आए प्रकरण ने अस्पताल के सिस्टम की पोल खोल करके रख दी। एक कर्मचारी पर विरोध जताने वालों का गुस्सा फूटा। जिससे एक बात साफ हो गई कि रिश्वतखोरी के खेल में ओटी का पूरा स्टाफ शामिल रहता है। एक सर्जन इस बात को स्वीकारते भी हैं। बकौल सर्जन, हर तरह के आपरेशन का रेट होता है। इस बाबत तीमारदार को बता दिया जाता है। चूंकि बाहर महंगा आपरेशन होता है। इसलिए तीमारदार रिश्वतखोरी की शर्त मानने को तैयार रहता है।
जांच कमेटी को तीन दिन का समय दिया गया है। जो बात सामने आई है। उससे इतना तो साफ है कि कुछ न कुछ है, क्या है, यही जानने का प्रयास किया जा रहा है। अगर आरोप साबित होते हैं तो सर्जन समेत पूरे स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रभाकर, सीएमएस, सदर अस्पताल।