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आधी रात फूली मरीजों की सांसे...
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फतेहपुर। सांस की तकलीफ से जूझ रहे 85 मरीजों की सोमवार की आधी रात सांसें अटक गईं। रात करीब डेढ़ बजे जिला अस्पताल की पाइप लाइन से प्राणवायु मिलना बंद होने से मरीजों का ऑक्सीजन लेबल गिरने लगा। तीमारदारों में अफरा तफरी मच गई।
वह आपूर्ति चालू कराने के लिए गिड़गिड़ाते नजर आए। लेकिन ऑक्सीजन न होने के कारण स्टाफ भी असहाय नजर आया। रात भर आपाधापी के बीच तीमारदारों की धड़कने बढ़ती रहीं। सुबह सात बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू होने पर राहत मिली।
जिस तरह से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर गंभीर हो रही है, उससे अस्पतालों के बेड मरीजों से भर चुके हैं। सदर अस्पताल के 120 बेड में ज्यादातर ऐसे मरीज हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है। सोमवार रात करीब डेढ़ बजे सांस रोगियों को बेचैनी होने लगी।
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उन्हें अचानक ऑक्सीजन मिलना बंद होने से उनकी सांसे अटकने लगीं। इससे तीमारदारों की नींद उड़ गई। देखा तो पाइपलाइन से मिलने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद थी। तीमारदारों ने अस्पताल स्टाफ से मरीजों की तकलीफ बयां की लेकिन वह भी ऑक्सीजन न होने के कारण कुछ नहीं कर सके। सरकी गांव की 75 साल की शिव प्यारी को सांस की तकलीफ होने पर सोमवार को भर्ती कराया गया।
बेटी कमला ने बताया कि ऑक्सीजन मिलना बंद होने से मां का ऑक्सीजन लेवल घटकर 60 पर पहुंच गया। हथगाम कस्बे के राजेश सिंह अपने पिता देव शरण को रात में लेकर आए थे। बकौल राजेश, ऑक्सीजन आपूर्ति न मिलने से पिता का ऑक्सीजन लेवल 60 से नीचे आ गया।
जबकि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर यह 70 के आसपास था। इसी तरह और भी मरीज और उनके तीमारदार रात भर ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर दौड़ भाग लगाते रहे। साढ़े पांच घंटे बाद सुबह सात बजे ऑक्सीजन सप्लाई चालू होने पर समस्या दूर हो सकी।
रात भर मिलाते रहे हैं अपनों को फोन
सदर अस्पताल की सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति रात में रुक जाने से मरीजों के साथ आए तीमारदारों की चिंता बढ़ गई। तीमारदार, हर तरह के प्रयास करते नजर आए। हर कोई अपने मरीज के लिए एक अदद ऑक्सीजन सिलिंडर की गुहार लगाते नजर आया। बच्चा वार्ड में भर्ती एक मरीज के तीमारदार को छोटे सिलिंडर कि हर कीमत देने का सौदा करते सुना गया। (संवाद)
सिलिंडर खत्म होने से बने हालात
जिला अस्पताल में 16 बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। इनका प्रयोग सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन देने में होता है। फिलवक्त 14 सिलिंडर ही सही सलामत हैं। सिलिंडर की कमी की वजह से आधी रात के बाद अक्सर इस तरह के हालात बन पड़ते हैं। ऑक्सीजन यूनिट की हेड रेखा चंदेल ने बताया कि जिले की इकलौती ऑक्सीजन यूनिट शाम को बंद हो जाती है। इस नाते रात दो से ढाई बजे के बाद सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकनी पड़ती है। सुबह पांच बजे एक गाड़ी भेजकर सिलिंडर मंगाए गए और फिर ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू की गई। एक गाड़ी शाम चार बजे रिफिलिंग के लिए भेजी गई है।
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वह आपूर्ति चालू कराने के लिए गिड़गिड़ाते नजर आए। लेकिन ऑक्सीजन न होने के कारण स्टाफ भी असहाय नजर आया। रात भर आपाधापी के बीच तीमारदारों की धड़कने बढ़ती रहीं। सुबह सात बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू होने पर राहत मिली।
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जिस तरह से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर गंभीर हो रही है, उससे अस्पतालों के बेड मरीजों से भर चुके हैं। सदर अस्पताल के 120 बेड में ज्यादातर ऐसे मरीज हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है। सोमवार रात करीब डेढ़ बजे सांस रोगियों को बेचैनी होने लगी।
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उन्हें अचानक ऑक्सीजन मिलना बंद होने से उनकी सांसे अटकने लगीं। इससे तीमारदारों की नींद उड़ गई। देखा तो पाइपलाइन से मिलने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद थी। तीमारदारों ने अस्पताल स्टाफ से मरीजों की तकलीफ बयां की लेकिन वह भी ऑक्सीजन न होने के कारण कुछ नहीं कर सके। सरकी गांव की 75 साल की शिव प्यारी को सांस की तकलीफ होने पर सोमवार को भर्ती कराया गया।
बेटी कमला ने बताया कि ऑक्सीजन मिलना बंद होने से मां का ऑक्सीजन लेवल घटकर 60 पर पहुंच गया। हथगाम कस्बे के राजेश सिंह अपने पिता देव शरण को रात में लेकर आए थे। बकौल राजेश, ऑक्सीजन आपूर्ति न मिलने से पिता का ऑक्सीजन लेवल 60 से नीचे आ गया।
जबकि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर यह 70 के आसपास था। इसी तरह और भी मरीज और उनके तीमारदार रात भर ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर दौड़ भाग लगाते रहे। साढ़े पांच घंटे बाद सुबह सात बजे ऑक्सीजन सप्लाई चालू होने पर समस्या दूर हो सकी।
रात भर मिलाते रहे हैं अपनों को फोन
सदर अस्पताल की सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति रात में रुक जाने से मरीजों के साथ आए तीमारदारों की चिंता बढ़ गई। तीमारदार, हर तरह के प्रयास करते नजर आए। हर कोई अपने मरीज के लिए एक अदद ऑक्सीजन सिलिंडर की गुहार लगाते नजर आया। बच्चा वार्ड में भर्ती एक मरीज के तीमारदार को छोटे सिलिंडर कि हर कीमत देने का सौदा करते सुना गया। (संवाद)
सिलिंडर खत्म होने से बने हालात
जिला अस्पताल में 16 बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। इनका प्रयोग सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन देने में होता है। फिलवक्त 14 सिलिंडर ही सही सलामत हैं। सिलिंडर की कमी की वजह से आधी रात के बाद अक्सर इस तरह के हालात बन पड़ते हैं। ऑक्सीजन यूनिट की हेड रेखा चंदेल ने बताया कि जिले की इकलौती ऑक्सीजन यूनिट शाम को बंद हो जाती है। इस नाते रात दो से ढाई बजे के बाद सेंट्रलाइज पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकनी पड़ती है। सुबह पांच बजे एक गाड़ी भेजकर सिलिंडर मंगाए गए और फिर ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू की गई। एक गाड़ी शाम चार बजे रिफिलिंग के लिए भेजी गई है।