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राधेश्याम के बाद विक्रम भी हैट्रिक से चूके
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फतेहपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने 2022 के चुनाव में भी 38 साल पुराना इतिहास टूटने नहीं दिया। इस बार जीत की हैट्रिक मारने उतरे भाजपा विधायक विक्रम सिंह को नकारते हुए जनता ने सपा के चंद्रप्रकाश लोधी को जीत का ताज पहना दिया। इससे पहले खान गुफरान जाहिदी ही एक मात्र नेता रहे हैं जो कि 1977, 1880 व 85 में जीत की हैट्रिक मार चुके हैं।
साल 1977 में पहली बार खान गुफरान इस सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे लगातार 1880 व 1985 में विधायक बने। 1989 में सैय्यद लियाकत हुसैन और 1991 में कासिम हसन विधायक चुने गए। 1993 में भाजपा से राधेश्याम गुप्ता विधायक बने। दूसरी बार 1996 में फिर विधायक बने। उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद भी मिला लेकिन 2002 में जीत की हैट्रिक न लगा सके। इस चुनाव में राधेश्याम बसपा के आनंद प्रकाश लोधी से चुनाव हार गए।
2007 में राधेश्याम गुप्ता फिर विधायक बने। 2012 में सैय्यद कासिम हसन विधायक चुने गए, लेकिन 2014 में इनका इंतकाल होने के कारण लोकसभा के साथ हुए उप चुनाव में भाजपा के विक्रम सिंह विधायक चुने गए। 2017 में विक्रम सिंह दोबारा विधायक बने। 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके हैट्रिक मारने की उम्मीद भाजपा समर्थक लगाए थे लेकिन विक्रम सिंह भी पूर्व मंत्री राधेश्याम की तरह हैट्रिक लगाने से चूक गए।
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साल 1977 में पहली बार खान गुफरान इस सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वे लगातार 1880 व 1985 में विधायक बने। 1989 में सैय्यद लियाकत हुसैन और 1991 में कासिम हसन विधायक चुने गए। 1993 में भाजपा से राधेश्याम गुप्ता विधायक बने। दूसरी बार 1996 में फिर विधायक बने। उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद भी मिला लेकिन 2002 में जीत की हैट्रिक न लगा सके। इस चुनाव में राधेश्याम बसपा के आनंद प्रकाश लोधी से चुनाव हार गए।
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2007 में राधेश्याम गुप्ता फिर विधायक बने। 2012 में सैय्यद कासिम हसन विधायक चुने गए, लेकिन 2014 में इनका इंतकाल होने के कारण लोकसभा के साथ हुए उप चुनाव में भाजपा के विक्रम सिंह विधायक चुने गए। 2017 में विक्रम सिंह दोबारा विधायक बने। 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके हैट्रिक मारने की उम्मीद भाजपा समर्थक लगाए थे लेकिन विक्रम सिंह भी पूर्व मंत्री राधेश्याम की तरह हैट्रिक लगाने से चूक गए।
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