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नहीं सुधर रही एमडीएम की ‘सेहत’
Fatehpur
Updated Thu, 24 Jan 2013 05:31 AM IST
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फतेहपुर। मध्यान्ह भोजन योजना मजाक बनगर रह गई है। इस योजना में पौष्टिक भोजन पकाने के नाम पर करीब बीस करोड़ की धनराशि साल में खर्च की जा रही है और बच्चों की सेहत बनने का नाम नहीं ले रही है। जबकि इसके विपरीत संचालकों के बैंक खातों की सेहत जरूर मजबूत हो रही है। जिलेभर के परिषदीय, वित्तपोषित मिलाकर कक्षा एक से लेकर कक्षा छह तक पढ़ने वाले पौने दो लाख बच्चों को दोपहर के समय भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए खद्यान के साथ चार रुपए प्रतिदिन प्रति बच्चे के हिस्से का भोजन पकाने के नाम पर खर्च किया जा रहा है। इस तरह से साल में सिर्फ भोजन पकाने के काम पर बीस करोड़ की धनराशि व्यय हो रही है, लेकिन बच्चों की सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। जबकि योजना शुरु करते समय सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए थे, कि निर्धारित मीनू के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन परोसा जाएगा और हर महीने प्रत्येक बच्चे का वजन करके रजिस्टर में अंकित किया जाएगा। महीना पूरा होने पर बच्चे के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा, इसका भी उल्लेख किया जाएगा। यह सब व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त हो गई है। एमडीएम के खाते में कनवर्जन कास्ट की धनराशि भेजी जा रही है और कोटेदार के माध्यम से प्रधानों के यहंा अनाज पहुंच रहा हैै, जबकि ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को पीले रंग की तहरी या नमकीन चावल और दरिया परोसी जा रही है। कनवर्जन कास्ट के नाम पर मिलने वाली मोटी रकम संचालक अपने बैंक खातों में जमा कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि जिन स्कूलों में एमडीएम के मेनू का अनुपालन न होने की शिकायत मिलती है, वहां की जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। एमडीएम में गड़बड़ी करने वाले दो दर्जन ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बैंक खातों से उनकी सहभागिता समाप्त की जा चुकी है।
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