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Farrukhabad News: अमेरिका के टैरिफ से परेशान कपड़ा छपाई उद्योग पर बंदी का झटका

Sat, 03 Jan 2026 12:34 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Sat, 03 Jan 2026 12:34 AM IST
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Textile Printing Industry
फोटो-13 अंगूरी बाग के एक कारखाने में छपाई के बाद सूखते कपड़े। संवाद
फर्रुखाबाद। एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कपड़ा छपाई उद्योग इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। पहले अमेरिका के टैरिफ ने कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया और अब माघ मेले के कारण बंदी ने उद्योग की कमर तोड़ दी है। माघ मेले के चलते 29 दिसंबर से 15 फरवरी तक मुख्य छह स्नान पर्वों के दौरान 24 दिन तक छपाई कारखानों पर ताले लगे रहेंगे। इस दौरान कारखानों के कारीगर दूसरे शहरों की ओर जाने लगे हैं। उन्हें दोबारा वापस लाना कारखाना संचालकों के लिए चुनौती बन जाता है। एक अदद इफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) न होने से हर रोज चार करोड़ की छपाई प्रभावित है।
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उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शहर में करीब 150 से अधिक कपड़ा छपाई कारखाने हैं। इनमें रोजाना चार करोड़ से अधिक का कपड़ा छपाई का कारोबार होता है। जिले में छपा कपड़ा नोए़डा, गाजियाबाद के रास्ते कई देशों में भेजा जाता है। अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद बाद कपड़ा छपाई कारोबार प्रभावित हुआ है। कुछ खाड़ी देशों में सरकार की मदद से कारोबार संभालने का प्रयास शुरू हुआ तो अब माघ में प्रयागराज व पांचाल घाट पर लगने वाले मेले रामनगरिया के चलते बंदी की मार पड़ गई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई दीपक कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार स्नान पर्वों पर छपाई कारखानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि गंगा में गंदा पानी न जा सके। (संवाद)
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आर्डर पूरे करने में छूट रहे पसीने
शहर में 20 से अधिक ऐसे कारखाने हैं जिनमें नोएडा जैसे बड़े शहरों के एक्सपोर्टर ऑर्डर दे रहे हैं। बंदी आदेश के चलते इन्हें पूरा कर पाना दिक्कत भरा काम है। समय से आर्डर पूरे न होने से इन एक्सपोर्टर्स का दूसरे जिलों के कारखानों को काम देने का अंदेशा बढ़ रहा है।


ईटीपी लगने पर ही छपाई उद्योग को लग सकेंगे पंख
हेल्थ एंड स्पोर्ट्स संस्था के सेटलर प्रमुख एक्सपोर्टर कपिल साध कहते हैं कि सधवाड़ा, अंगूरीबाग, जटवारा जदीद, चांदपुर आदि में सबसे अधिक छपाई कारखाने हैं। यहां एक अदद ईटीपी लग जाए तो छपाई उद्योग को बड़ा फायदा होगा। सरकार और प्रशासन को इस ओर गंभीरता से प्रयास करने चाहिए। एनएस इंटरनेशनल के मालिक अर्पित साध कहते हैं कि अमेरिकी टैरिफ के कुछ महीने बाद ही बंदी से बड़ा नुकसान है। विदेश के लिए लगे ऑर्डर समय से पूरे नहीं होने पर तगड़ा नुकसान होता है। एक बार झटका लगने के बाद कारोबारी जल्द उबर नहीं पाता। कपड़ा छपाई उद्यमी निक्की साध ने बताया कि इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार गंभीरता से प्रयास नहीं करते। ईटीपी के लिए सर्वे भी कराया जा चुका है मगर इसके बाद मामला फाइलों में दबा दिया गया है। राजनेता कोशिश करें तो बंदी से छुटकारा मिल सकता है।
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