{"_id":"68bde38d2219725f9f0b4df3","slug":"pitru-paksha-started-people-offered-water-to-their-ancestors-with-devotion-and-faith-farrukhabad-news-c-222-1-frk1002-129504-2025-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: पितृ पक्ष शुरू, श्रद्धा व आस्था के साथ लोगों ने पितरों को दिया जल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: पितृ पक्ष शुरू, श्रद्धा व आस्था के साथ लोगों ने पितरों को दिया जल
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, उनकी आराधना करने, पूजन, तर्पण-अर्पण आदि के विधान भाद्रपद पूर्णिमा रविवार को आरंभ हो गया। पितरों को तर्पण करने के लिए पांचाल घाट पर लोगों की भीड़ उमड़ी। मंत्रोच्चारण के बीच लोगों ने गंगाजल से पितरों को तर्पण किया।
रविवार को पितरों के तर्पण-अर्पण के लिए लोगों का पांचाल घाट पहुंचना शुरू हो गया। सुबह करीब 8.30 बजे आलम यह था कि गंगातटों पर तर्पण करने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा थी। बाढ़ के चलते गंगा के उस पार तर्पण न होने के चलते पुल के इसी तरफ तर्पण किए गए। इससे भीड़ और बढ़ी। गंगातटों पर एक-एक बार में 50 से 100 लोग तर्पण करते दिखाई दिए।
लोगों ने हाथों में पैंती पहनकर जनेऊ धारण किया। इसके बाद अंजुरी (हाथ) में तिल, जौं, चावल, शहद, दूध, फूल, दूध आदि लिया। पंडित जी के मंत्रोच्चारण पर लोग गंगाजल में तर्पण कर रहे थे। बाढ़ के चलते लोग किनारों पर ही स्नान कर पितरों को तर्पण अर्पण व पिंडदान कर रहे थे। लोगों ने श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा भी दी। इसके साथ ही गंगा मैय्या का पूजन भी किया। 21 सितंबर को पितृ विसर्जन के साथ पितृ पक्ष समाप्त होंगे।
विज्ञापन
घाटों पर गहरे स्थानों पर नहीं बंधी रस्सी
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद गहसे स्थानों पर रस्सी नहीं बांधी गई थी। पितृ पक्ष को लेकर श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गंगातटों पर पंडों ने अपने स्तर से लाल कपड़ा व छोटी-छोटी रस्सियां जरूर बांध रखी थीं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से गहरे स्थानों पर रस्सी नहीं बांधी गई थी। घाटों पर गोताखोर व पुलिसबल भी तैनात नहीं था। (संवाद)
विज्ञापन
रविवार को पितरों के तर्पण-अर्पण के लिए लोगों का पांचाल घाट पहुंचना शुरू हो गया। सुबह करीब 8.30 बजे आलम यह था कि गंगातटों पर तर्पण करने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा थी। बाढ़ के चलते गंगा के उस पार तर्पण न होने के चलते पुल के इसी तरफ तर्पण किए गए। इससे भीड़ और बढ़ी। गंगातटों पर एक-एक बार में 50 से 100 लोग तर्पण करते दिखाई दिए।
विज्ञापन
लोगों ने हाथों में पैंती पहनकर जनेऊ धारण किया। इसके बाद अंजुरी (हाथ) में तिल, जौं, चावल, शहद, दूध, फूल, दूध आदि लिया। पंडित जी के मंत्रोच्चारण पर लोग गंगाजल में तर्पण कर रहे थे। बाढ़ के चलते लोग किनारों पर ही स्नान कर पितरों को तर्पण अर्पण व पिंडदान कर रहे थे। लोगों ने श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा भी दी। इसके साथ ही गंगा मैय्या का पूजन भी किया। 21 सितंबर को पितृ विसर्जन के साथ पितृ पक्ष समाप्त होंगे।
विज्ञापन
घाटों पर गहरे स्थानों पर नहीं बंधी रस्सी
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद गहसे स्थानों पर रस्सी नहीं बांधी गई थी। पितृ पक्ष को लेकर श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गंगातटों पर पंडों ने अपने स्तर से लाल कपड़ा व छोटी-छोटी रस्सियां जरूर बांध रखी थीं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से गहरे स्थानों पर रस्सी नहीं बांधी गई थी। घाटों पर गोताखोर व पुलिसबल भी तैनात नहीं था। (संवाद)