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Farrukhabad News: जीएसटी इंस्पेक्टर ने यूपीएससी में मारी बाजी, 331वीं रैंक
Wed, 23 Apr 2025 11:48 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:48 PM IST
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यूपीएससी में चयनित अखिलेश सिंह राठौर।
- फोटो : यूपीएससी में चयनित अखिलेश सिंह राठौर।
राजेपुर। सेना में रिटायर सूबेदार मेजर के पुत्र ने अंतिम प्रयास में आखिरकार यूपीएससी की परीक्षा में बाजी मार ली। उसे 331वीं रैंक मिली है। वह इस समय लखनऊ में जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह रक्षा मंत्रालय में भी नौकरी कर चुके हैं। सफलता की खबर मिलते ही परिजन और दोस्तों में खुशी की लहर दौड़ गई।
राजेपुर निवासी रिटायर सूबेदार मेजर रामववीर सिंह राठौर के पुत्र अखिलेश सिंह का यूपीएससी में चयन हो गया। उनकी 331वीं रैंक आने से आईपीएस कैडर मिलना तय माना जा रहा है। अखिलेश शुरू से ही प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं। पिता सेना में होने की वजह से उनकी अधिकांश शिक्षा दिल्ली में हुई। सबसे पहले रक्षा मंत्रालय में सरकारी नौकरी मिली।
मेहनत में कभी हार न मानने वाले अखिलेश सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। इसके बाद उन्हें इनकम टैक्स में जीएसटी इंस्पेक्टर पद पर तैनाती मिल गई। इस समय वह लखनऊ में तैनात हैं। उनके साथ मां उर्मिला देवी, बहन निशा रहते हैं। पिता अधिकांश समय राजेपुर में ही खेती बाड़ी करवाते हैं।
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अखिलेश ने बताया कि उनकी शुरू से ही तमन्ना रही कि परिवार और गांव का नाम रोशन करें। इसमें अंतिम प्रयास में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि हार के आगे जीत है। एक बार असफल होने पर प्रयास बंद नहीं करने चाहिए। उनके सामने सरकारी नौकरी के काम के साथ तैयारी करना बेहद कठिन था, लेकिन माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद से चयन हो गया।
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राजेपुर निवासी रिटायर सूबेदार मेजर रामववीर सिंह राठौर के पुत्र अखिलेश सिंह का यूपीएससी में चयन हो गया। उनकी 331वीं रैंक आने से आईपीएस कैडर मिलना तय माना जा रहा है। अखिलेश शुरू से ही प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं। पिता सेना में होने की वजह से उनकी अधिकांश शिक्षा दिल्ली में हुई। सबसे पहले रक्षा मंत्रालय में सरकारी नौकरी मिली।
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मेहनत में कभी हार न मानने वाले अखिलेश सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। इसके बाद उन्हें इनकम टैक्स में जीएसटी इंस्पेक्टर पद पर तैनाती मिल गई। इस समय वह लखनऊ में तैनात हैं। उनके साथ मां उर्मिला देवी, बहन निशा रहते हैं। पिता अधिकांश समय राजेपुर में ही खेती बाड़ी करवाते हैं।
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अखिलेश ने बताया कि उनकी शुरू से ही तमन्ना रही कि परिवार और गांव का नाम रोशन करें। इसमें अंतिम प्रयास में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि हार के आगे जीत है। एक बार असफल होने पर प्रयास बंद नहीं करने चाहिए। उनके सामने सरकारी नौकरी के काम के साथ तैयारी करना बेहद कठिन था, लेकिन माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद से चयन हो गया।