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सेटेलाइट के जरिए सुधरेगा भूगर्भीय जलस्तर
Sat, 20 Apr 2019 11:32 PM IST
प्रशांत कुमार
farrukhabad
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Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 20 Apr 2019 11:32 PM IST
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दिल्ली की टीम से वार्ता करते सीडीओ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जनपद में गिरते जलस्तर को रोकने की पहल शुरू हो गई है। इसके लिए रिमोट सेंसिंग (सेटेलाइट) के जरिए भौगोलिक स्थिति व जल संचयन इकाइयों का विवरण एकत्र करने का काम शुरू कर दिया गया है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही इस पर तेजी से काम शुरू हो जाएगा।
जिले का भौगोलिक ढांचा काफी ऊंचा-नीचा है। इससे गंगा के तटवर्ती निचले क्षेत्र में बाढ़ आती है तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों का जलस्तर गिरता जाता है। इससे कुछ क्षेत्र पर डार्क जोन का खतरा मंडरा रहा है। इस गिरते जलस्तर को रोकने व सुधारने के लिए पहल शुरू कर दी गई है।
इसके लिए दिल्ली से भौगोलिक सूचना प्रणाली की चार सदस्यीय टीम बुलाई गई है। यह टीम सबसे पहले सेटेलाइट के माध्यम से जनपद की भूमि का ढलान देखेगी और ऊंचे व निचले स्तर की भूमि का जलस्तर नापकर तुलना करेगी। यह भी विवरण एकत्र किया जाएगा कि ऊंचे स्थान की तुलना में निचले क्षेत्र की भूमि के जलस्तर में कितना अंतर है और इसे बराबर कैसे लाया जा सकता है।
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इसके लिए जिले में उपलब्ध जल संचयन संसाधनों तालाब, पोखर, नदी, नाला, बंबा, कुआं आदि का भी विवरण एकत्र होगा। रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग प्लांट के तहत जल स्तर सुधारा जाएगा। इसके लिए डाटा कलेक्शन टीम के रविंद्र नाथ तिवारी, कुलदीप अहलावत, स्वयंभू महापात्रा व जसकौर मीना ने सीडीओ के साथ बैठक की।
टीम के सदस्यों का कहना है कि जिले में मौजूद जल संचयन संसाधनों का उपयोग कर गिरते जलस्तर को रोका जा सकता है। बारिश के दिनों में पानी का संचयन न हो पाने से वह बहकर बर्बाद हो जाता है। इसी पानी का संचयन कर लिया जाए जो गिरते जलस्तर को रोकने के साथ सुधार किया जा सकता है और इसी पद्धति पर वह काम करेंगे। उपलब्ध संचयन के संसाधन का सही तरीके से इस्तेमाल कर जलस्तर सुधारा जाएगा।
सीडीओ डा. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि उन्होंने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) दिल्ली की टीम को उन्होंने बुलाया है। टीम ने सेटेलाइट के माध्यम से डाटा कलेक्शन शुरू कर दिया है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस क्षेत्र में तेजी से काम कराया जाएगा।
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जिले का भौगोलिक ढांचा काफी ऊंचा-नीचा है। इससे गंगा के तटवर्ती निचले क्षेत्र में बाढ़ आती है तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों का जलस्तर गिरता जाता है। इससे कुछ क्षेत्र पर डार्क जोन का खतरा मंडरा रहा है। इस गिरते जलस्तर को रोकने व सुधारने के लिए पहल शुरू कर दी गई है।
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इसके लिए दिल्ली से भौगोलिक सूचना प्रणाली की चार सदस्यीय टीम बुलाई गई है। यह टीम सबसे पहले सेटेलाइट के माध्यम से जनपद की भूमि का ढलान देखेगी और ऊंचे व निचले स्तर की भूमि का जलस्तर नापकर तुलना करेगी। यह भी विवरण एकत्र किया जाएगा कि ऊंचे स्थान की तुलना में निचले क्षेत्र की भूमि के जलस्तर में कितना अंतर है और इसे बराबर कैसे लाया जा सकता है।
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इसके लिए जिले में उपलब्ध जल संचयन संसाधनों तालाब, पोखर, नदी, नाला, बंबा, कुआं आदि का भी विवरण एकत्र होगा। रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग प्लांट के तहत जल स्तर सुधारा जाएगा। इसके लिए डाटा कलेक्शन टीम के रविंद्र नाथ तिवारी, कुलदीप अहलावत, स्वयंभू महापात्रा व जसकौर मीना ने सीडीओ के साथ बैठक की।
टीम के सदस्यों का कहना है कि जिले में मौजूद जल संचयन संसाधनों का उपयोग कर गिरते जलस्तर को रोका जा सकता है। बारिश के दिनों में पानी का संचयन न हो पाने से वह बहकर बर्बाद हो जाता है। इसी पानी का संचयन कर लिया जाए जो गिरते जलस्तर को रोकने के साथ सुधार किया जा सकता है और इसी पद्धति पर वह काम करेंगे। उपलब्ध संचयन के संसाधन का सही तरीके से इस्तेमाल कर जलस्तर सुधारा जाएगा।
सीडीओ डा. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि उन्होंने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) दिल्ली की टीम को उन्होंने बुलाया है। टीम ने सेटेलाइट के माध्यम से डाटा कलेक्शन शुरू कर दिया है। आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस क्षेत्र में तेजी से काम कराया जाएगा।