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Farrukhabad News: गंगा का फिर बढ़ेगा जलस्तर, नरौरा बांध से चेतावनी जारी
Thu, 21 Aug 2025 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 21 Aug 2025 11:57 PM IST
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फर्रुखाबाद। नरौरा बांध पर फ्लशिंग के चलते गंगा का जलस्तर फिर बढ़ेगा। बांध से जिम्मेदारों ने चेतावनी जारी की है। गंगा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन भी खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर है। वहीं, रामगंगा के जलस्तर में 10 सेमी की कमी दर्ज की गई रामगंगा का जलस्तर 136.90 मीटर पर है। दोनों ही नदियों में खतरे का निशान 137.10 मीटर पर है। विगत 15 दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों के सामने भोजन और स्वास्थय की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। लगातार पानी के बीच रहने से पांव की उंगलियों की खाल सड़ने लगी है। पैरों में घाव होने से लोग परेशान हैं।
नरौरा खंड निचली गंगा नहर के अधिशाषी अभियंता ने बांध से होने वाली फ्लशिंग से जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। नरौरा खंड से पत्र जारी होने के बाद बाढ़ग्रस्त इलाकों के वाशिंदों में खलबली बची है। लोगों का कहना है कि अभी तक बांध के ऊपरी गेट खोले जाने से इतना पानी नदी में आता था, अब निचले गेट खुलने पर कितना पानी आएगा, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है। ग्रामीण तेज गति से पानी आने की आशंका जता रहे हैं। वहीं, अधिकारियों ने भी लोगों से गंगा के तेज बहाव वाले क्षेत्राें में पशुओं को न ले जाने, कृषि कार्य और मछली पकड़ने जैसे कार्य न करने की चेतावनी दी है। सिंचाई विभाग के सूत्रों की माने तो फ्लशिंग के दौरान अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका बन गई है।
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क्या होती है बांध की फ्लशिंग
बांध की फ्लशिंग का मतलब बांध के जलाशय से पानी को तेजी से बहाना होता है। इस प्रक्रिया में बांध के गेटों को खोल दिया जाता है ताकि पानी तेजी से जलाशय से बाहर निकल सके। बांध के जलाशय के निचले गेट से तेजी से पानी बहने के साथ ही तली में जमा सिल्ट भी बहकर निकल जाती है। इससे जलाशय की भंडारण क्षमता बढ़ती है।
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नरौरा खंड निचली गंगा नहर के अधिशाषी अभियंता ने बांध से होने वाली फ्लशिंग से जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। नरौरा खंड से पत्र जारी होने के बाद बाढ़ग्रस्त इलाकों के वाशिंदों में खलबली बची है। लोगों का कहना है कि अभी तक बांध के ऊपरी गेट खोले जाने से इतना पानी नदी में आता था, अब निचले गेट खुलने पर कितना पानी आएगा, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है। ग्रामीण तेज गति से पानी आने की आशंका जता रहे हैं। वहीं, अधिकारियों ने भी लोगों से गंगा के तेज बहाव वाले क्षेत्राें में पशुओं को न ले जाने, कृषि कार्य और मछली पकड़ने जैसे कार्य न करने की चेतावनी दी है। सिंचाई विभाग के सूत्रों की माने तो फ्लशिंग के दौरान अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका बन गई है।
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क्या होती है बांध की फ्लशिंग
बांध की फ्लशिंग का मतलब बांध के जलाशय से पानी को तेजी से बहाना होता है। इस प्रक्रिया में बांध के गेटों को खोल दिया जाता है ताकि पानी तेजी से जलाशय से बाहर निकल सके। बांध के जलाशय के निचले गेट से तेजी से पानी बहने के साथ ही तली में जमा सिल्ट भी बहकर निकल जाती है। इससे जलाशय की भंडारण क्षमता बढ़ती है।
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