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Farrukhabad News: 2500 मीट्रिक टन डीएपी मिली, समितियों पर भेजी
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फर्रुखाबाद। समितियों के चक्कर काट रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शुक्रवार को 2500 मीट्रिक टन डीएपी की रैक आ गई। रैक प्वाइंट से सीधे समितियों को डीएपी भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। 1500 मीट्रिक टन डीएपी समितियों पर भेजी जाएगी, जबकि 1000 मीट्रिक टन डीएपी दुकानों को मिलेगी। शनिवार को पीपीएल कंपनी की डीएपी की 1700 मीट्रिक टन की दूसरी रैक आने की उम्मीद है।
रेलवे रैक से 2500 मीट्रिक टन डीएपी आने पर जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने मौके पर निरीक्षण किया। साथ ही रैक प्वाइंट से ही साधन सहकारी समितियों (बी-पैक्स) के लिए सीधे उठान शुरू करा दिया। इसके पीछे से आ रही 1700 मीट्रिक टन डीएपी रैक से 1000 मीट्रिक टन (20 हजार बोरी) समितियों पर व 700 मीट्रिक टन (14 हजार बोरी) दुकानों पर भेजी जाएगी।
जिले में यूरिया 26,131 मीट्रिक टन, डीएपी 10,351 मीट्रिक टन, पोटाश 8,251 मीट्रिक टन, एनपीके 19,636 मीट्रिक टन व सिंगल सुपर फास्फेट 15,320 मीट्रिक टन उपलब्ध बताई गई है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि अधिक दाम वसूलने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उर्वरक विक्रेताओं को दुकानों पर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। बताया कि डीएपी की जगह एनपीके व एसएसपी का प्रयोग किया जा सकता है।
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समितियों पर देखी व्यवस्था
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र ने साधन सहकारी समिति कमालगंज, रजीपुर व खुदागंज का निरीक्षण किया। समितियों पर डीएपी, एनपीके व पोटाश उपलब्ध मिली। उन्होंने खाद वितरण की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि रैक प्वाइंट से सहकारी समिति कंपिल, पुरौरी, पपड़ी खुर्द, हरकमपुर, सकवाई, ज्योता, अलीगढ़, जहानगंज, जैनापुर, बरौन, चुनूपुर गढि़या, पिथनापुर, कुबेरपुर कुतलूपुर व बरुआ समिति पर डीएपी भेजी गई है।
एनपीके महंगी होने से किसानों का रुख डीएपी की तरफ
फोटो-36 दुकान से डीएपी लेकर जाता किसान। संवाद
नवाबगंज। एनपीके महंगी होने से किसान डीएपी अधिक मांग रहे हैं। इसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। दुकानदार डीएपी के साथ अन्य दवाएं दे रहे हैं। इससे किसानों को डीएपी के तय मूल्य से अधिक धन देना पड़ रहा है।
क्षेत्र की सहकारी समितियों पर डीएपी न होने से किसान आलू की बोआई के लिए परेशान हैं। किसान दुकानों का रुख कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि एनपीके 12:32:16 का सरकारी रेट 2200 रुपये है, जबकि डीएपी 1350 रुपये में समितियों पर मिल रही है। गांव कुद्दीपुर निवासी किसान रामरूप यादव ने बताया कि समिति पर डीएपी न मिलने से वह नवाबगंज तिराहा स्थित दुकान से दो बोरी डीएपी ले आए हैं।आलू शक्ति व आलू प्रधान के दो बैग साथ में देकर उनसे 4050 रुपये लिए गए।
साधन सहकारी समिति गनीपुर जोगपुर के सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि 15 मीट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी गई है, चेक भी सोमवार को बैंक में लगा दी। समिति पर डीएपी कब आएगी, इसकी जानकारी नहीं है। सहकारी समिति कनासी के सचिव वीर सिंह ने बताया कि 15 मीट्रिक डीएपी का मांग पत्र भेजा है। समिति पर एनपीके पर्याप्त मौजूद है। एनपीके महंगी होने से किसान डीएपी मांग रहे हैं। सचिव अजय कुमार, भावना ने बताया कि एनपीके मौजूद है, डीएपी के लिए मांगपत्र भेजा जा चुका है। सहकारी समिति गठवाया व मई रसीदपुर में भी डीएपी नहीं है।
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रेलवे रैक से 2500 मीट्रिक टन डीएपी आने पर जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने मौके पर निरीक्षण किया। साथ ही रैक प्वाइंट से ही साधन सहकारी समितियों (बी-पैक्स) के लिए सीधे उठान शुरू करा दिया। इसके पीछे से आ रही 1700 मीट्रिक टन डीएपी रैक से 1000 मीट्रिक टन (20 हजार बोरी) समितियों पर व 700 मीट्रिक टन (14 हजार बोरी) दुकानों पर भेजी जाएगी।
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जिले में यूरिया 26,131 मीट्रिक टन, डीएपी 10,351 मीट्रिक टन, पोटाश 8,251 मीट्रिक टन, एनपीके 19,636 मीट्रिक टन व सिंगल सुपर फास्फेट 15,320 मीट्रिक टन उपलब्ध बताई गई है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि अधिक दाम वसूलने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उर्वरक विक्रेताओं को दुकानों पर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। बताया कि डीएपी की जगह एनपीके व एसएसपी का प्रयोग किया जा सकता है।
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समितियों पर देखी व्यवस्था
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र ने साधन सहकारी समिति कमालगंज, रजीपुर व खुदागंज का निरीक्षण किया। समितियों पर डीएपी, एनपीके व पोटाश उपलब्ध मिली। उन्होंने खाद वितरण की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि रैक प्वाइंट से सहकारी समिति कंपिल, पुरौरी, पपड़ी खुर्द, हरकमपुर, सकवाई, ज्योता, अलीगढ़, जहानगंज, जैनापुर, बरौन, चुनूपुर गढि़या, पिथनापुर, कुबेरपुर कुतलूपुर व बरुआ समिति पर डीएपी भेजी गई है।
एनपीके महंगी होने से किसानों का रुख डीएपी की तरफ
फोटो-36 दुकान से डीएपी लेकर जाता किसान। संवाद
नवाबगंज। एनपीके महंगी होने से किसान डीएपी अधिक मांग रहे हैं। इसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। दुकानदार डीएपी के साथ अन्य दवाएं दे रहे हैं। इससे किसानों को डीएपी के तय मूल्य से अधिक धन देना पड़ रहा है।
क्षेत्र की सहकारी समितियों पर डीएपी न होने से किसान आलू की बोआई के लिए परेशान हैं। किसान दुकानों का रुख कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि एनपीके 12:32:16 का सरकारी रेट 2200 रुपये है, जबकि डीएपी 1350 रुपये में समितियों पर मिल रही है। गांव कुद्दीपुर निवासी किसान रामरूप यादव ने बताया कि समिति पर डीएपी न मिलने से वह नवाबगंज तिराहा स्थित दुकान से दो बोरी डीएपी ले आए हैं।आलू शक्ति व आलू प्रधान के दो बैग साथ में देकर उनसे 4050 रुपये लिए गए।
साधन सहकारी समिति गनीपुर जोगपुर के सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि 15 मीट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी गई है, चेक भी सोमवार को बैंक में लगा दी। समिति पर डीएपी कब आएगी, इसकी जानकारी नहीं है। सहकारी समिति कनासी के सचिव वीर सिंह ने बताया कि 15 मीट्रिक डीएपी का मांग पत्र भेजा है। समिति पर एनपीके पर्याप्त मौजूद है। एनपीके महंगी होने से किसान डीएपी मांग रहे हैं। सचिव अजय कुमार, भावना ने बताया कि एनपीके मौजूद है, डीएपी के लिए मांगपत्र भेजा जा चुका है। सहकारी समिति गठवाया व मई रसीदपुर में भी डीएपी नहीं है।