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कोरोना संक्रमण से बढ़ गया इंसाफ का इंतजार
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फर्रुखाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का न्यायिक प्रक्रिया पर खासा असर पड़ा है। करीब एक माह से कचहरी नियमित नहीं खुल रही है। इससे मुकदमों की सुनवाई लंबित होने से अदालतों पर बोझ भी बढ़ रहा है और पीड़ितों को न्याय पाने को इंतजार करना पड़ रहा है। वर्तमान में अर्जेंट जमानतों और रिमांड जैसी प्रक्रिया की सुनवाई ऑनलाइन हो रही है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का हर विभाग पर असर डाला है। 31 अप्रैल तक लगभग 97212 मुकदमें अदालतों में लंबित हैं। इसमें सिविल के करीब 17434 और क्रमिनल के 79778 मामले लंबित हैं। सुनवाई न होने से अदालतों पर बोझ बढ़ रहा है, वहीं इन मुकदमों के वादकारियों को न्याय मिलने की आस का इंतजार करना पड़ रहा है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला जज ने वर्चुअल कोर्ट (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) से विशेष मामलों की सुनवाई के लिए प्रति दिन तीन-तीन अपर जिला जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेटों की ड्यूूटी लगाई है। अधिवक्ता ईमेल के माध्यम से जमानत प्रार्थना पत्र व अन्य अर्जेंट मामलों के आवेदन करते हैं। जिला जज ने वर्चुअल कोर्ट से सुनवाई को समय भी निर्धारित किया है। जिला एवं अपर जिला जज की अदालतों के मामलों की सुनवाई वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से सुबह 11.30 से 12 बजे, 12 से 12.30 बजे और 12.30 से 1 बजे तक तथा मजिस्ट्रेट न्यायालयों में 1 से 1.30 बजे, 1.30 से 2 बजे, 2 से 2.30 बजे तक होती है। यह सुनवाई जिला एवं अपर जिला जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने आवासीय कार्यालय/न्यायालय परिसर से करते हैं। कर्मचारियों के आने का भी रोस्टर लागू है।
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कमालगंज क्षेत्र की बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या संबंधी मामला राज्य बनाम विपिन शर्मा की सुनवाई लगभग पूरी होने को थी। कोरोना संक्रमण के कारण सुनवाई लटक गई है। पुत्री से दुष्कर्म में लेखपाल पिता व उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आरोप पत्र नहीं बन पा रहा है। सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के खिलाफ सिपाही को आत्महत्या करने के लिए उकसाने के मुकदमे में भी आरोप तय नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा अन्य भी चर्चित मामले हैं। जो कोरोना संक्रमण के उनमें अग्रिम कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
जिला बार एसोसिएशन के महा सचिव संजीव पारिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण से न्यायिक कार्य पर काफी असर पड़ा है। साक्ष्य और गवाह कोई पेश नहीं हो रहा है। इससे अदालतों पर बोझ बढ़ गया है। अब सिर्फ अर्जेंट मामलों में वर्चुअल कोर्ट से सुनवाई हो रही है। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से करीब 15 वकीलों की मौत भी हो चुकी है। इससे वकीलों को संक्रमण से बचाने के लिए अध्यक्ष के आदेश पर वकील न्यायिक कार्य से विरत चल रहे हैं।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का हर विभाग पर असर डाला है। 31 अप्रैल तक लगभग 97212 मुकदमें अदालतों में लंबित हैं। इसमें सिविल के करीब 17434 और क्रमिनल के 79778 मामले लंबित हैं। सुनवाई न होने से अदालतों पर बोझ बढ़ रहा है, वहीं इन मुकदमों के वादकारियों को न्याय मिलने की आस का इंतजार करना पड़ रहा है।
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उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला जज ने वर्चुअल कोर्ट (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) से विशेष मामलों की सुनवाई के लिए प्रति दिन तीन-तीन अपर जिला जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेटों की ड्यूूटी लगाई है। अधिवक्ता ईमेल के माध्यम से जमानत प्रार्थना पत्र व अन्य अर्जेंट मामलों के आवेदन करते हैं। जिला जज ने वर्चुअल कोर्ट से सुनवाई को समय भी निर्धारित किया है। जिला एवं अपर जिला जज की अदालतों के मामलों की सुनवाई वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से सुबह 11.30 से 12 बजे, 12 से 12.30 बजे और 12.30 से 1 बजे तक तथा मजिस्ट्रेट न्यायालयों में 1 से 1.30 बजे, 1.30 से 2 बजे, 2 से 2.30 बजे तक होती है। यह सुनवाई जिला एवं अपर जिला जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने आवासीय कार्यालय/न्यायालय परिसर से करते हैं। कर्मचारियों के आने का भी रोस्टर लागू है।
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कमालगंज क्षेत्र की बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या संबंधी मामला राज्य बनाम विपिन शर्मा की सुनवाई लगभग पूरी होने को थी। कोरोना संक्रमण के कारण सुनवाई लटक गई है। पुत्री से दुष्कर्म में लेखपाल पिता व उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आरोप पत्र नहीं बन पा रहा है। सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह के खिलाफ सिपाही को आत्महत्या करने के लिए उकसाने के मुकदमे में भी आरोप तय नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा अन्य भी चर्चित मामले हैं। जो कोरोना संक्रमण के उनमें अग्रिम कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
जिला बार एसोसिएशन के महा सचिव संजीव पारिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण से न्यायिक कार्य पर काफी असर पड़ा है। साक्ष्य और गवाह कोई पेश नहीं हो रहा है। इससे अदालतों पर बोझ बढ़ गया है। अब सिर्फ अर्जेंट मामलों में वर्चुअल कोर्ट से सुनवाई हो रही है। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से करीब 15 वकीलों की मौत भी हो चुकी है। इससे वकीलों को संक्रमण से बचाने के लिए अध्यक्ष के आदेश पर वकील न्यायिक कार्य से विरत चल रहे हैं।