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लोकगीतों में रमी दिखी महिलाएं, वृद्धों में भी उत्साह
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अयोध्या। चौदहकोसी परिक्रमा के साथ रामनगरी के कार्तिक मेले का शुभारंभ शुक्रवार से हो गया है। परिक्रमा कर पुण्यार्जन करने की कामना से लंबी यात्रा कर लोग अयोध्या पहुंचे हैं।
आस-पास के जिलों सहित कई अन्य प्रांतों के श्रद्धालु भी परिक्रमा में शामिल हुए हैं। भगवान राम और उनकी नगरी के प्रति अगाध आस्था ऐसे लाखों लोगों को एक सतह पर खड़ा करती है। इसकी पुष्टि परिक्रमा में उमड़े हर वर्ग के भक्तों से होती दिखी।
जानाबाजार अयोध्या निवासी 65 वर्षीय शकुंतला सिंह लोकगीत गुनगुनाते हुए परिक्रमा पथ पर बढ़ी जा रही थी। बताया कि यह उनकी छठवीं परिक्रमा है। उम्र जवाब दे रही है पर प्रभु की कृपा से परिक्रमा कर लेती हूं।
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उन्हें विश्वास है कि परिक्रमा से परमात्मा प्रसन्न होता है। अयोध्या निवासी 68 वर्षीय बाबा शंकर दास दूूसरी बार चौदहकोसी परिक्रमा पथ पर उतरे थे। श्रीराम जय राम, सीता राम, सीताराम गुनाते हुए वे परिक्रमा पथ पर चल रहे थे।
कहा कि परिक्रमा के माध्यम से शरीर से मुक्त हो आत्मा में प्रवेश पाया जा सकता है। बाराबंकी की रहने वाली 75 वर्षीय सुमन परिक्रमा के दौरान थककर चूर दिख रहीं थीं। पूछने पर कहा कि भगवान की कृपा पाने के लिए ही परिक्रमा कर रही हूं।
अंबेडकरनगर निवासी 80 वर्षीय मंशाराम सातवीं बार चौदहकोसी परिक्रमा कर रहे थे। उनका दृढ़ संकल्प वृद्धावस्था पर भारी नजर आ रहा था। कहा कि परिक्रमा से प्रभु की कृपा तो मिलती ही है तन-मन की शुद्धि भी होती है। इसी भाव से परिक्रमा के लिए निकल पड़े हैं हर हाल में परिक्रमा पूरा ही करेंगें।
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आस-पास के जिलों सहित कई अन्य प्रांतों के श्रद्धालु भी परिक्रमा में शामिल हुए हैं। भगवान राम और उनकी नगरी के प्रति अगाध आस्था ऐसे लाखों लोगों को एक सतह पर खड़ा करती है। इसकी पुष्टि परिक्रमा में उमड़े हर वर्ग के भक्तों से होती दिखी।
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जानाबाजार अयोध्या निवासी 65 वर्षीय शकुंतला सिंह लोकगीत गुनगुनाते हुए परिक्रमा पथ पर बढ़ी जा रही थी। बताया कि यह उनकी छठवीं परिक्रमा है। उम्र जवाब दे रही है पर प्रभु की कृपा से परिक्रमा कर लेती हूं।
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उन्हें विश्वास है कि परिक्रमा से परमात्मा प्रसन्न होता है। अयोध्या निवासी 68 वर्षीय बाबा शंकर दास दूूसरी बार चौदहकोसी परिक्रमा पथ पर उतरे थे। श्रीराम जय राम, सीता राम, सीताराम गुनाते हुए वे परिक्रमा पथ पर चल रहे थे।
कहा कि परिक्रमा के माध्यम से शरीर से मुक्त हो आत्मा में प्रवेश पाया जा सकता है। बाराबंकी की रहने वाली 75 वर्षीय सुमन परिक्रमा के दौरान थककर चूर दिख रहीं थीं। पूछने पर कहा कि भगवान की कृपा पाने के लिए ही परिक्रमा कर रही हूं।
अंबेडकरनगर निवासी 80 वर्षीय मंशाराम सातवीं बार चौदहकोसी परिक्रमा कर रहे थे। उनका दृढ़ संकल्प वृद्धावस्था पर भारी नजर आ रहा था। कहा कि परिक्रमा से प्रभु की कृपा तो मिलती ही है तन-मन की शुद्धि भी होती है। इसी भाव से परिक्रमा के लिए निकल पड़े हैं हर हाल में परिक्रमा पूरा ही करेंगें।