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महिला अस्पताल में दो बजे के बाद ऑपरेशन नहीं
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2015 01:10 AM IST
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फिर भी किसी बेहोशी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई हैं। यही वजह है कि दोपहर दो बजे के बाद पूरी रात अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को लौटा दिया जाता है।
महिला अस्पताल की डॉक्टरों व नर्सों का कहना है कि अस्पताल आने वाली प्रसूताओं को चिकित्सालय की वस्तु स्थिति से अवगत करा दिया जाता है। ताकि मरीज सोच समझ कर फैसला कर सकें।
क्योंकि जब कोई घटना हो जाती है तो अंतिम समय में मरीजों को तीमारदार और परिवारीजन यही करते हैं कि पहले बताया गया होता तो कुछ व्यवस्था करते।
गोसाईगंज निवासी राम प्यारे की पत्नी कांतिदेवी (32) को 3 अगस्त को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर जिला महिला अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल में उन्हें बताया गया कि यहां पर बेहोशी के चिकित्सक एक ही है।
यदि दोपहर दो बजे के बाद ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो नहीं हो पाएगा। जान बचाने के लिए जच्चा-बच्चा को लखनऊ के लिए रेफर किया जाएगा। प्रसूता के परिवारीजन सरकारी व्यवस्था को सोच कर सिहर उठे। अंतत: निजी नर्सिंगहोम में ले जाकर ऑपरेशन कराया।
दिल्ली दरवाजा निवासी प्रियंका गुप्ता (21) पत्नी जय प्रकाश 5 अगस्त को महिला अस्पताल में इलाज के लिए आई। पांच दिन बाद उन्हें प्रसव होने की संभावित तिथि बताई गई।
साथ ही उन्हें यह भी बताया कि सामान्य प्रसव हुआ तो कोई बात नहीं। यदि ऑपरेशन कराने की स्थिति बनती है तो बेहोशी चिकित्सक के उपलब्ध होने पर ही सीजेरियन ऑपरेशन हो पाएगा। इतना सुनने के बाद वह अस्पताल से लौट गईं।
जगपता (29) जग्गू शिवदयालगंज कटरा (गोंडा) शुक्रवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला अस्पताल में शाम पांच बजे इलाज के लिए आईं। प्राथमिक जांच के बाद स्टाफ नर्स ने बताया कि बच्चा उल्टा है।
ऑपरेशन करना पड़ेगा, लेकिन बेहोशी चिकित्सक मात्र एक है। जो दोपहर बाद नहीं होते है। यहां से बाहर जाना है तो चले जाइए। महिला अस्पताल से तो लखनऊ के लिए ही रेफर किया जाएगा।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीरजामाला का कहना है कि दो बजे के बाद सीजेरियन ऑपरेशन की नौबत आई तो पहले अपने बेहोशी चिकित्सक को सूचना भेजती हूं।
बेहोशी चिकित्सक के नहीं होने पर इस बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी को बताया जाता है। सीएमओ स्तर से चिकित्सक की व्यवस्था हुई तो ठीक हैं। नहीं तो मरीज को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
बेहोशी चिकित्सक डॉ. एसके शुक्ल मैं भी इंसान हूं। एक माह से अनवरत ड्यूटी कर रहा हूं। तबियत खराब होने के बाद भी घर से बुलाकर ऑपरेशन करवाया गया है।
अब और नहीं, जितनी ड्यूटी निर्धारित है उतनी ही करूंगा। इस बारे में अपने उच्च अधिकारियों को लिखित दे चुका हूं। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी फैजाबाद डॉ. राधेश्याम का कहना है कि बेहोशी चिकित्सक की स्थानीय स्तर पर तैनात किए जाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही एक बेहोशी चिकित्सक की महिला अस्पताल में तैनात कर दी जाएगी।
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महिला अस्पताल की डॉक्टरों व नर्सों का कहना है कि अस्पताल आने वाली प्रसूताओं को चिकित्सालय की वस्तु स्थिति से अवगत करा दिया जाता है। ताकि मरीज सोच समझ कर फैसला कर सकें।
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क्योंकि जब कोई घटना हो जाती है तो अंतिम समय में मरीजों को तीमारदार और परिवारीजन यही करते हैं कि पहले बताया गया होता तो कुछ व्यवस्था करते।
गोसाईगंज निवासी राम प्यारे की पत्नी कांतिदेवी (32) को 3 अगस्त को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर जिला महिला अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल में उन्हें बताया गया कि यहां पर बेहोशी के चिकित्सक एक ही है।
यदि दोपहर दो बजे के बाद ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो नहीं हो पाएगा। जान बचाने के लिए जच्चा-बच्चा को लखनऊ के लिए रेफर किया जाएगा। प्रसूता के परिवारीजन सरकारी व्यवस्था को सोच कर सिहर उठे। अंतत: निजी नर्सिंगहोम में ले जाकर ऑपरेशन कराया।
दिल्ली दरवाजा निवासी प्रियंका गुप्ता (21) पत्नी जय प्रकाश 5 अगस्त को महिला अस्पताल में इलाज के लिए आई। पांच दिन बाद उन्हें प्रसव होने की संभावित तिथि बताई गई।
साथ ही उन्हें यह भी बताया कि सामान्य प्रसव हुआ तो कोई बात नहीं। यदि ऑपरेशन कराने की स्थिति बनती है तो बेहोशी चिकित्सक के उपलब्ध होने पर ही सीजेरियन ऑपरेशन हो पाएगा। इतना सुनने के बाद वह अस्पताल से लौट गईं।
जगपता (29) जग्गू शिवदयालगंज कटरा (गोंडा) शुक्रवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला अस्पताल में शाम पांच बजे इलाज के लिए आईं। प्राथमिक जांच के बाद स्टाफ नर्स ने बताया कि बच्चा उल्टा है।
ऑपरेशन करना पड़ेगा, लेकिन बेहोशी चिकित्सक मात्र एक है। जो दोपहर बाद नहीं होते है। यहां से बाहर जाना है तो चले जाइए। महिला अस्पताल से तो लखनऊ के लिए ही रेफर किया जाएगा।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीरजामाला का कहना है कि दो बजे के बाद सीजेरियन ऑपरेशन की नौबत आई तो पहले अपने बेहोशी चिकित्सक को सूचना भेजती हूं।
बेहोशी चिकित्सक के नहीं होने पर इस बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी को बताया जाता है। सीएमओ स्तर से चिकित्सक की व्यवस्था हुई तो ठीक हैं। नहीं तो मरीज को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
बेहोशी चिकित्सक डॉ. एसके शुक्ल मैं भी इंसान हूं। एक माह से अनवरत ड्यूटी कर रहा हूं। तबियत खराब होने के बाद भी घर से बुलाकर ऑपरेशन करवाया गया है।
अब और नहीं, जितनी ड्यूटी निर्धारित है उतनी ही करूंगा। इस बारे में अपने उच्च अधिकारियों को लिखित दे चुका हूं। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी फैजाबाद डॉ. राधेश्याम का कहना है कि बेहोशी चिकित्सक की स्थानीय स्तर पर तैनात किए जाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही एक बेहोशी चिकित्सक की महिला अस्पताल में तैनात कर दी जाएगी।